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Explainer: क्या है सरकार का ‘Common Landing Portal’, जिससे बैंकों व शेयर्स में फंसा लावारिस पैसा मिलेगा

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भारत सरकार ने अनक्लेम्ड एसेट्स के लिए 'कॉमन लैंडिंग पोर्टल' शुरू किया है, जिससे लोग बैंकों, इंश्योरेंस और शेयर्स में लावारिस पड़े अपने पैसों को आसानी से खोज सकेंगे

Last Updated- June 01, 2026 | 7:06 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

क्या आपके दादा-दादी या माता-पिता ने सालों पहले किसी बैंक में फिक्स डिपॉजिट (FD) कराई थी और उसका सर्टिफिकेट कहीं खो गया? या किसी कंपनी के शेयर खरीदकर लोग भूल गए? देश में ऐसे करोड़ों रुपये बैंकों, इंश्योरेंस कंपनियों और म्यूचुअल फंड हाउसेज में बिना किसी दावेदार के पड़े हुए हैं। लोग अक्सर निवेश करके भूल जाते हैं या परिवार में किसी अप्रिय घटना के बाद नॉमिनी को उस निवेश की जानकारी ही नहीं मिल पाती।

इस बड़ी समस्या को सुलझाने के लिए भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज (DFS) ने एक बेहद क्रांतिकारी कदम उठाया है। सरकार ने देश में पहली बार एक सिंगल यूनिफाइड ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ‘Common Landing Portal’ लॉन्च किया है। इसके जरिए देश का कोई भी नागरिक महज कुछ ही क्लिक में अपनी या अपने पूर्वजों की भूली-बिसरी और लावारिस पड़ी संपत्ति (Unclaimed Assets) का पता लगा सकता है।

‘आपकी पूंजी, आपका अधिकार’: सरकार की नई और बड़ी मुहिम

इस नए डिजिटल पोर्टल को सरकार के राष्ट्रव्यापी अभियान ‘आपकी पूंजी, आपका अधिकार’ के तहत पेश किया गया है। इसे आधिकारिक तौर पर PSB अलायंस के सहयोग से लॉन्च किया गया है। इस पोर्टल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह देश के पूरे फाइनेंशियल इकोसिस्टम को एक ही जगह पर समेट लेता है।

पहले लोगों को अपनी भूली-बिसरी संपत्ति ढूंढने के लिए कई जगहों के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब तक स्थिति यह थी कि अगर आपको लावारिस डिपॉजिट ढूंढना होता था, तो आपको बैंकों के लिए रिजर्व बैंक के ‘उद्गम’ (UDGAM) पोर्टल पर जाना पड़ता था, म्यूचुअल फंड के लिए SEBI के ‘मित्रा’ (MITRA) पोर्टल पर जाना पड़ता था, और इंश्योरेंस के लिए IRDAI के चक्कर लगाने पड़ते थे।

इस झंझट और परेशानी की वजह से कई लोग अपनी संपत्ति वापस पाने की कोशिश ही छोड़ देते थे। लेकिन अब सरकार ने अलग-अलग डेटाबेस को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ दिया है, जिससे लोग आसानी से अपनी संपत्ति खोज और क्लेम कर सकते हैं।

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एक ही छत के नीचे मिलेगी इन चीजों की जानकारी

अब लोगों को अपनी भूली-बिसरी रकम या संपत्ति ढूंढने के लिए अलग-अलग जगह जाने की जरूरत नहीं होगी। नए केंद्रीय पोर्टल ‘www.unclaimedassetsportal.in’ पर जाकर वे एक ही जगह पर अपनी बिना दावे वाली संपत्तियों की जानकारी हासिल कर सकते हैं। इस पोर्टल पर इन कुछ चीजों को खोजा जा सकता है, जिन पर लंबे समय से कोई दावा नहीं किया गया है। इनमें शामिल हैं:

  • बैंक डिपॉजिट: ऐसे बचत या चालू खाते, जिनमें पिछले 10 साल या उससे ज्यादा समय से कोई लेनदेन नहीं हुआ है और जिनकी जमा राशि RBI के पास ट्रांसफर कर दी गई है।
  • इंश्योरेंस क्लेम: बीमा कंपनियों के पास पड़े वे पैसे जो पॉलिसी मैच्योर होने के बाद भी किसी वजह से पॉलिसीहोल्डर या उसके परिवार तक नहीं पहुंच सके।
  • शेयर्स और अनक्लेम्ड डिविडेंड: कंपनियों के ऐसे शेयर और डिविडेंड, जिन पर सात साल तक किसी ने दावा नहीं किया और बाद में उन्हें इन्वेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड (IEPF) में ट्रांसफर कर दिया गया।
  • म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट्स: म्यूचुअल फंड स्कीम्स में निवेश की गई वह राशि जिसे निवेशकों ने सालों से भुनाया नहीं है।

बिना किसी रजिस्ट्रेशन के ढूंढें अपना पैसा, यह है सबसे आसान तरीका

अक्सर सरकारी वेबसाइट्स पर लॉगिन और रजिस्ट्रेशन की लंबी प्रक्रिया देखकर लोग पीछे हट जाते हैं, लेकिन सरकार ने इस पोर्टल को आम आदमी की सहूलियत के हिसाब से बेहद सरल बनाया है। इसके इस्तेमाल के लिए किसी भी तरह के सेफ और पूरी तरह से फ्री है।

इस पोर्टल पर अपनी भूली-बिसरी रकम या संपत्ति ढूंढने की प्रक्रिया काफी आसान रखी गई है। इसके लिए सबसे पहले आपको आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वहां पहुंचने के बाद खाताधारक का पूरा नाम जैसी बुनियादी जानकारी दर्ज करनी होगी। अगर आप चाहें तो खोज को और ज्यादा सटीक बनाने के लिए पैन (PAN) नंबर जैसी अतिरिक्त जानकारी भी दे सकते हैं। इसके बाद जैसे ही आप सर्च बटन पर क्लिक करेंगे, सिस्टम अपने डेटाबेस में उपलब्ध रिकॉर्ड्स को खंगालेगा और आपके नाम से जुड़ी सभी संभावित संपत्तियों या रकम की सूची स्क्रीन पर दिखा देगा। इससे आपको यह पता चल सकेगा कि कहीं आपके नाम कोई ऐसी राशि या संपत्ति तो नहीं पड़ी है, जिस पर अभी तक दावा नहीं किया गया है।

मैच मिलने के बाद क्या करना होगा? समझें क्लेम का पूरा प्रोसेस

अगर सर्च करने के बाद पोर्टल पर आपके या आपके परिवार के नाम से कोई पुरानी रकम या संपत्ति दिखाई देती है, तो आगे की प्रक्रिया भी काफी आसान है। यह पोर्टल सिर्फ जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उस रकम या संपत्ति को वापस पाने का तरीका भी बताता है। पोर्टल पर आपको संबंधित संस्था या विभाग की जानकारी मिल जाएगी, जहां दावा (क्लेम) करने के लिए आवेदन करना होगा। इससे आपको यह समझने में आसानी होगी कि अपनी रकम वापस पाने के लिए अगला कदम क्या है और किन चीजों का पालन करना है।

जब स्क्रीन पर आपके नाम से जुड़ी कोई रकम या संपत्ति दिखाई देती है, तो उसके साथ आगे की प्रक्रिया के लिए जरूरी निर्देश भी दिए जाते हैं। अगर यह राशि किसी बैंक खाते से जुड़ी है, तो पोर्टल आपको बताएगा कि किस बैंक और किस शाखा से संपर्क करना है। इसके बाद आपको संबंधित बैंक या संस्थान में जाकर जरूरी डॉक्यूमेंट जमा करने होंगे।

इनमें पहचान और पते के लिए जरूरी KYC डॉक्यूमेंट, जैसे पैन कार्ड या वोटर ID शामिल हो सकते हैं। अगर मूल खाताधारक की मौत हो चुकी है, तो डेथ सर्टिफिकेट और कानूनी उत्तराधिकारी या नॉमिनी होने से जुड़े डॉक्यूमेंट भी देने होंगे। डॉक्यूमेंट्स की जांच और वेरिफिकेश पूरा होने के बाद संबंधित संस्था रकम आपके बैंक खाते में ट्रांसफर कर देगी।

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देश में पड़ा है ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा का लावारिस खजाना

सरकार के लिए यह कदम कितना जरूरी था, इसका अंदाजा देश में बिना दावे वाली संपत्तियों और रकम के बड़े आंकड़े से लगाया जा सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में अलग-अलग खातों, निवेशों और अन्य जगहों में करीब 1.08 लाख करोड़ रुपये (लगभग 13 अरब डॉलर) की राशि ऐसी पड़ी है, जिस पर अब तक किसी ने दावा नहीं किया है। यही वजह है कि लोगों को उनकी भूली-बिसरी संपत्ति तक पहुंचाने के लिए एक पोर्टल की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।

सरकार के ‘आपकी पूंजी, आपका अधिकार’ अभियान के शुरुआती महीनों में ही इसके अच्छे नतीजे देखने को मिले हैं। देश के सैकड़ों जिलों में चलाए गए जागरूकता कार्यक्रमों की मदद से लोगों ने करीब 2,000 करोड़ रुपये की अपनी भूली-बिसरी रकम और संपत्तियों को सफलतापूर्वक वापस हासिल किया है।

सरकार का मानना है कि नए केंद्रीय पोर्टल के आने से लोगों को अपनी भूली-बिसरी रकम या निवेश खोजने के लिए अलग-अलग संस्थानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। वे घर बैठे एक ही प्लेटफॉर्म पर अपनी बिना दावे वाली संपत्तियों की जानकारी देख सकेंगे और उन्हें वापस पाने की प्रक्रिया भी समझ सकेंगे। इससे लोगों के लिए अपनी फंसी हुई पूंजी तक पहुंच आसान होगी और यह भी साफ तौर पर पता चल सकेगा कि किस संस्था के पास कितनी बिना दावे वाली रकम पड़ी है। साथ ही, फाइनेंशियल सिस्टम पर लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा।

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First Published - June 1, 2026 | 7:06 PM IST

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