अरविंद केजरीवाल की अगुआई वाली आम आदमी पार्टी (आप) को शुक्रवार को उस समय तगड़ा झटका लगा जब राघव चड्ढा और संदीप पाठक समेत राज्य सभा के उसके 10 सांसदों में सात ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने का ऐलान कर दिया। इन सातों सांसदों ने कहा कि उन्होंने अपने हस्ताक्षर वाला पत्र राज्य सभा अध्यक्ष सी पी राधाकृष्णन को सौंप दिया है।
इन नेताओं ने कहा कि पार्टी के 10 राज्य सभा सांसदों में सात के पास संविधान के तहत पार्टी के विलय के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत है। इन सात में छह पंजाब से हैं जहां अगले साल फरवरी-मार्च में चुनाव होने हैं।
इस घटनाक्रम पर आप के राष्ट्रीय संयोजक केजरीवाल ने कहा, ‘भाजपा ने एक बार फिर पंजाब के लोगों को धोखा दिया है।’
यह दलबदल उस दिन हुआ जब शुक्रवार को गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों के लिए प्रचार समाप्त हुआ। 26 अप्रैल को होने वाले चुनावों में 15 नगर निगमों, 84 नगर पालिकाओं, 34 जिला पंचायतों और 260 तालुका पंचायतों के लिए 9,992 स्थानीय प्रतिनिधि मैदान में हैं।
आप को यह झटका ऐसे समय में लगा है जब चुनावों के लिहाज से यह वर्ष बेहद महत्त्वपूर्ण है। पंजाब में चुनाव के अलावा आप दिल्ली नगर निगम के सियासी जंग में भी आगे रहना चाहती है। दिल्ली नगर निगम के चुनाव 2027 के अंत में होने हैं। पार्टी गुजरात में भी मजबूत चुनौती पेश करना चाहती है जहां 2027 में नवंबर-दिसंबर विधान सभा चुनाव होने हैं। दिल्ली की सत्ता हाथ से जाने के बाद अब केवल पंजाब में आप की सरकार है।
एक बार जब आप के ये सात सांसद राज्य सभा में भाजपा में शामिल हो जाएंगे तो 245 सदस्यीय सदन में उसकी संख्या बढ़कर 113 हो जाएगी। राजग की संख्या बढ़कर 141 हो गई है जो बहुमत के 123 के आंकड़े से काफी अधिक है।
भाजपा की संख्या में उन 12 मनोनीत सांसदों में पांच शामिल हैं जो शपथ लेने के कुछ ही महीनों के भीतर भाजपा में शामिल हो गए थे। भाजपा के नेतृत्व वाला राजग अहम विधेयकों पर मतदान के लिए शेष सात मनोनीत सांसदों से समर्थन की उम्मीद लगा सकता है जिससे उसकी संख्या प्रभावी रूप से 148 हो जाएगी। इन सात सांसदों में हरिवंश नारायण सिंह, मीनाक्षी जैन, सुधा मूर्ति, पीटी उषा और वी विजयेंद्र प्रसाद शामिल हैं। भाजपा के नेतृत्व वाले राजग को सदन में संविधान संशोधन विधेयकों को पारित करने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत (163) से केवल 15 सीटें कम हैं।
भाजपा में शामिल हुए आप के 7 सांसदों में छह पंजाब से हैं जिनमें चड्ढा, पाठक, पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी हरभजन सिंह, अशोक मित्तल, विक्रमजीत सिंह साहनी और राजिंदर गुप्ता शामिल हैं। स्वाति मालीवाल दिल्ली से हैं। पंजाब में अगले साल फरवरी-मार्च में विधान सभा चुनाव होने हैं।
राज्य सभा से आप के शेष बचे सांसदों में संजय सिंह, नारायण दास गुप्ता और बलबीर सिंह शामिल हैं। संजय सिंह और दास गुप्ता दिल्ली से सांसद हैं जबकि संत बलबीर सिंह पंजाब से हैं। चड्ढा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया,‘आज भारत के संविधान के प्रावधानों का प्रयोग करते हुए, राज्य सभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई से अधिक सांसदों का भाजपा में विलय हो गया है। सात सांसदों ने दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे राज्य सभा अध्यक्ष को सौंप दिया गया है। मैंने दो अन्य सांसदों के साथ व्यक्तिगत रूप से हस्ताक्षरित दस्तावेज सौंपे।’
राज्य सभा सांसद मालीवाल ने आरोप लगाया कि पार्टी अपने राष्ट्रीय संयोजक केजरीवाल के नेतृत्व में अपने संस्थापक सिद्धांतों से भटक गई है और कदाचार में लिप्त व्यक्तियों को संरक्षण दे रही है।
भाजपा के सूचना-प्रौद्योगिकी (आईटी) विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा,‘आम आदमी पार्टी पूरी तरह से बिखर गई है। पतन अब अटकल नहीं है बल्कि इसकी शुरुआत हो गई है।’
चड्ढा ने एक संवाददाता सम्मेलन में इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य सभा के सभापति राधाकृष्णन को पत्र सभी आवश्यक दस्तावेज के साथ सौंप दिया गया है। पाठक और मित्तल (जिन्हें आप ने हाल ही में राज्य सभा में अपना उपनेता नियुक्त किया था) चड्ढा के साथ संवाददाता सम्मेलन में मौजूद थे।
आप नेता संजय सिंह भाजपा पर ‘ऑपरेशन लोटस’ चलाने का आरोप लगाया और कहा कि पंजाब की जनता पार्टी छोड़ने वाले सातों सांसदों को माफ नहीं करेगी।