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महिला आरक्षण और डिलिमिटेशन पर सरकार का बड़ा कदम, लोकसभा में पेश हुए तीन अहम बिल

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लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव, केंद्र शासित प्रदेशों में भी लागू होगा महिला आरक्षण

Last Updated- April 16, 2026 | 1:43 PM IST
lok sabha
File Image

सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में महिला आरक्षण और अगले परिसीमन (डिलिमिटेशन) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए तीन अहम बिल पेश किए। इसके तहत संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 पेश किए गए। संसद के विशेष सत्र (16 से 18 अप्रैल) के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 भी पेश किया। इस विधेयक का मकसद दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर सहित केंद्र शासित प्रदेशों में महिला आरक्षण व्यवस्था को लागू करना है।

इस सप्ताह की शुरुआत में केंद्र सरकार ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 का ड्रॉफ्ट सांसदों के साथ साझा किया था। इस प्रस्ताव में महिला आरक्षण कानून में बदलाव और लोकसभा की कुल संख्या बढ़ाकर 850 करने की योजना शामिल है, जिसमें राज्य और केंद्र शासित प्रदेश दोनों शामिल होंगे।

2026 के अनुसार, अधिकतम 815 सदस्य राज्यों के निर्वाचन क्षेत्रों से सीधे चुने जाएंगे। केंद्र शासित प्रदेशों के लिए विधेयक में कहा गया है कि “अधिकतम 35 सदस्य केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करेंगे, जिन्हें संसद द्वारा निर्धारित तरीके से चुना जाएगा।”

परिसीमन इस मुद्दे का प्रमुख विवाद बना हुआ है। विपक्षी दलों का कहना है कि इस प्रक्रिया से दक्षिणी राज्यों की सीटों में कमी आ सकती है, जबकि उत्तरी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व बढ़ सकता है। प्रस्तावित संशोधन में संविधान के अनुच्छेद 81 और 82 में बदलाव शामिल हैं और पुनर्वितरण प्रक्रिया के तहत लोकसभा के आकार को बढ़ाने का प्रावधान किया गया है।

बता दें, लोकसभा में सत्तारूढ़ एनडीए की कुल संख्या 292 है, जबकि प्रमुख विपक्षी दलों के पास 233 सांसद हैं। संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए सदन में मतदान के समय उपस्थित सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है।

कांग्रेस, सपा ने किया विरोध

इन विधेयकों की पेश होने के बाद विपक्ष ने जोरदार विरोध किया। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने तीनों विधेयकों का विरोध करते हुए उन्हें “संविधान विरोधी” बताया।

समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी सदन में आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “हम संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 का विरोध करते हैं… महिला आरक्षण का सबसे बड़ा समर्थक कोई और दल नहीं है।”

आलोचना का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा, “अखिलेश यादव ने पूछा कि जनगणना क्यों नहीं हो रही है। मैं पूरे देश को बताना चाहता हूं कि जनगणना प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सरकार ने जाति जनगणना कराने का फैसला लिया है और गणना जाति के आंकड़ों के साथ की जा रही है। अगर यह समाजवादी पार्टी के हाथ में होता, तो वे घरों को भी जातियों में बांट देते।”

उन्होंने आगे कहा, “धर्मेंद्र यादव ने मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण देने की बात कही। यह असंवैधानिक है। धर्म के आधार पर आरक्षण असंवैधानिक है।”

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने कहा, “हम महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन परिसीमन विधेयक को लेकर हमारी आपत्तियां हैं। ऐसे अभ्यास कैसे किए जाते हैं, इसे लेकर चिंता है।”

डीएमके सांसद टी आर बालू ने कहा, “कल हमारे नेता एम के स्टालिन ने सलेम में एक जनसभा के दौरान इस विधेयक के मसौदे को जलाया, जो यह दिखाता है कि हमें इसका विरोध करना होगा।”

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First Published - April 16, 2026 | 1:43 PM IST

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