यह वाकया वर्ष 1990 का है जब पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा सत्ता में था और कोलकाता में पुलिस की गोलीबारी में तीन लोगों की मौत के बाद तनाव का माहौल था। इस घटना के बाद बंद का आह्वान किया गया था। ममता बनर्जी दक्षिण कोलकाता के हाजरा इलाके में कांग्रेस पार्टी के एक मार्च का नेतृत्व कर रही थीं। तभी सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के समर्थकों से उनका सामना हो गया और देखते ही देखते उन पर लाठियों, लोहे की छड़ों और जंजीरों से हमले शुरू हो गए।
ममता ने वर्ष 2012 में प्रकाशित अपने संस्मरण ‘परिवर्तन’ में लिखा,‘मैं इसके लिए तैयार थी, इसलिए जब वे मुझ पर हमला करने आए तो मैं घबराई नहीं। मैंने बस उन्हें घूर कर देखा।’ बनर्जी के सिर पर कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ता लालू आलम ने लोहे की छड़ से वार किया। फिर उनके सिर पर और फिर कोहनी पर वार किया गया। उन्होंने लिखा, ‘मेरे सिर से बहुत खून बह रहा था, मेरी साड़ी लाल हो गई थी मगर मुझे कोई दर्द महसूस नहीं हुआ। उस समय तो बिल्कुल नहीं।’ इसके तुरंत बाद वह कांग्रेस की पश्चिम बंगाल इकाई की प्रमुख बना दी गईं।
यह सच है कि यह घटना चार दशक पहले हुई थी। अब वह 71 वर्ष की हैं। मगर एक बात तो तय है। विपक्ष में रहते हुए हमेशा अपनी धाक बनाए रखने वाली ममता यह सुनिश्चित करेंगी कि पश्चिम बंगाल में सत्ता संभालने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को चैन न मिले बशर्तें वह ऐसा करने में सक्षम रहीं तो। यही उनकी और पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की भविष्य की राजनीति होगी। मगर इसके लिए जरूरी है कि वे अपनी पार्टी को एकजुट रखें। संभवतः पश्चिम बंगाल में आंदोलनकारी राजनीति फिर से लौटेगी जिससे निवेशकों के लिए कई तरह की समस्याएं उत्पन्न होंगी।
हार के कगार पर खड़ी टीएमसी के मतदाताओं को ममता का संदेश था, ‘हिम्मत मत हारो, हम सूर्यास्त के बाद जीतेंगे।’
दूसरी तरफ, केरल में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की तलाश शुरू कर दी है। संगठन के महासचिव के सी वेणुगोपाल को कांग्रेस नेता राहुल गांधी को वर्ष 2019 में केरल के वायनाड से लोकसभा चुनाव लड़ने का सुझाव देने का श्रेय दिया जाता है। राहुल को वायनाड से चुनाव लड़ाने का फायदा यह हुआ कि वह अमेठी में स्मृति ईरानी से हारने के बाद भी सांसद बनकर लोक सभा पहुंच गए।
चुनाव हालांकि, संगठन में प्रभावशाली होने के बावजूद वेणुगोपाल ने विधान सभा चुनाव नहीं लड़ा और अगर वह मुख्यमंत्री बनाए जाते हैं तो उनके लिए एक विधायक को इस्तीफा देना होगा। इस चुनाव को वाम मोर्चा और भाजपा दोनों के खिलाफ जनादेश के रूप में कांग्रेस के लिए मुस्लिम और ईसाई समर्थन की बाढ़ लाने वाले शख्स वी डी सतीशन रहे हैं। सतीशन पिछले पांच वर्षों से विपक्ष के नेता रहे हैं। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच युद्ध शुरू होने के बाद खाड़ी देशों से आने वाले धन में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट से प्रभावित केरल की अर्थव्यवस्था को कुशल प्रबंधन की आवश्यकता होगी। यही राज्य के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।
तमिलनाडु की बात करें तो राज्य को एक नया मुख्यमंत्री मिलेगा। अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम (टीवीके) बहुमत के करीब तो पहुंच गई है मगर अभी तक बहुमत हासिल नहीं कर पाई है। मध्य प्रदेश के सांसद डी रविकुमार ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया,‘टीवीके जैसी राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभवहीन पार्टी के सत्ता में आने के साथ भाजपा अफसरशाही के जरिये पर्दे के पीछे से सरकार चलाने का प्रयास कर सकती है। यह देखना होगा कि टीवीके इस चुनौती का सामना कैसे करती है और इससे कैसे निपटती है।’ उन्होंने बताया कि बहुमत हासिल करने के लिए विजय के विकल्प सीमित और जटिल हैं।
जिन राज्यों के सोमवार को परिणाम आए उनमें दो राज्यों में जाने-पहचाने चेहरे वापस लौटे हैं। असम में हिमंत विश्व शर्मा ने भाजपा को एक और बड़ी जीत दिलाई है। केंद्र शासित प्रदेश पुदुच्चेरी में एन रंगासामी के नेतृत्व वाली अखिल भारतीय एन रंगासामी कांग्रेस (एएनआरसी) अपने गठबंधन सहयोगी भाजपा और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम के साथ सत्ता में वापस लौटी है। पुदुच्चेरी में टीवीके ने दो सीटें जीती हैं, इसलिए आने वाले दिनों में वह तय करेगी कि सरकार को समर्थन देना है या विपक्ष में बैठना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर संदेश पोस्ट कर पुदुच्चेरी में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के प्रदर्शन के लिए उसे बधाई दी। इस बार के विधान सभा चुनाव की खास बात यह है कि पांचों राज्यों में कई नए चेहरे उभरे हैं।