Tamil Nadu Assembly Election Results 2026: तमिलनाडु की सियासत में सोमवार को एक ऐसा भूचाल आया जिसने दशकों पुराने द्रविड़ किलों की नीवें हिला दीं। सुपरस्टार विजय, जिन्हें उनके प्रशंसक प्यार से ‘थलपति’ कहते हैं, ने अपनी नई नवेली पार्टी ‘तमिझगा वेत्री कझगम’ (TVK) के साथ वह कर दिखाया जिसे राजनीति के दिग्गज नामुमकिन मान रहे थे। शुरुआती रुझानों में विजय की पार्टी 100 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। महज दो साल पहले बनी एक पार्टी का इस तरह उभरना राज्य की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है।
हालांकि, जीत की इस चमक के बीच एक पेंच फंसा है। 234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा 118 है। रुझानों के मुताबिक, विजय इस नंबर से थोड़ा दूर रह सकते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या विजय ‘बिना किसी समर्थन’ के सरकार बनाने के अपने दावे पर टिके रहेंगे या उन्हें सहयोगियों की तलाश करनी पड़ेगी?
तमिलनाडु का सिनेमा और राजनीति से पुराना नाता रहा है। MGR से लेकर जयललिता तक, पर्दे के नायकों ने यहां सत्ता के शिखर को छुआ है। लेकिन हाल के सालों में रजनीकांत और कमल हासन जैसे दिग्गज भी उस करिश्मे को वोटों में नहीं बदल पाए थे, जो विजय ने कर दिखाया। विजय की रैलियों में उमड़ने वाली युवाओं और शहरी वोटरों की भारी भीड़ ने साफ कर दिया था कि राज्य बदलाव चाह रहा है।
सियासी जानकारों का मानना है कि विजय ने सीधे तौर पर DMK के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाई है। उन्हें दलित और ईसाई अल्पसंख्यक समुदाय का बड़ा साथ मिला है। साथ ही, विजय जिस वेल्लार समुदाय से आते हैं, वहां से भी उन्हें जबरदस्त समर्थन मिला। सत्ता विरोधी लहर (एंटी-इनकंबेंसी) का जो फायदा अन्नाद्रमुक (AIADMK) को मिलना चाहिए था, वह भी विजय की झोली में जाता दिख रहा है।
विजय ने चुनाव प्रचार के दौरान अपनी लकीर बिल्कुल साफ रखी थी। उन्होंने DMK को अपना ‘सियासी दुश्मन’ और BJP को ‘वैचारिक दुश्मन’ घोषित किया था। उन्होंने यहां तक आरोप लगाया था कि BJP और DMK के बीच ‘अंडरग्राउंड डीलिंग’ चल रही है। विजय के मुताबिक, भ्रष्टाचार के मामलों से बचने के लिए स्टालिन और मोदी की जुगलबंदी है।
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इसके अलावा, केंद्र सरकार और BJP के साथ विजय के रिश्ते काफी तल्ख रहे हैं। पिछले साल करूर भगदड़ की घटना के बाद BJP ने उन पर तीखे हमले किए थे। इतना ही नहीं, उनकी फिल्म ‘जन नायक’ को सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट दिलाने में आई मुश्किलें और फिल्म के लीक होने से हुए 70 करोड़ के नुकसान ने इस कड़वाहट को और बढ़ा दिया। ऐसे में विजय के लिए BJP के करीब जाना फिलहाल नामुमकिन नजर आता है।
अगर TVK बहुमत के आंकड़े से पीछे रह जाती है, तो विजय के पास चार मुख्य रास्ते बचते हैं:
विजय की जीत ने यह साबित कर दिया है कि तमिलनाडु की जनता अब DMK और अन्नाद्रमुक के दशकों पुराने चक्रव्यूह से बाहर निकलना चाहती है। विजय ने शुरू से खुद को एक ‘साफ-सुथरे विकल्प’ के तौर पर पेश किया है। उन्होंने अपनी फिल्म ‘जन नायक’ के जरिए जो छवि बनाई, उसे चुनावी मैदान में बखूबी भुनाया।
अब पूरी नजर इस बात पर है कि विजय सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने के लिए किन समझौतों को मानते हैं। क्या वह अपने ‘अकेले चलने’ के वादे पर कायम रहेंगे या फिर गठबंधन की मजबूरियां उन्हें उन्हीं द्रविड़ दलों के दरवाजे पर ले जाएंगी, जिनके खिलाफ उन्होंने बिगुल फूंका था? तमिलनाडु की राजनीति का यह सस्पेंस अब अपने क्लाइमेक्स पर है।