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तमिलनाडु में विजय की ‘विक्ट्री’: 2 साल पुरानी पार्टी और 100+ सीटें, कैसे ‘थलपति’ ने पलटा पूरा गेम?

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तमिलनाडु चुनाव में सुपरस्टार विजय की पार्टी TVK ने 100 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाकर सबको चौंका दिया है। हालांकि, बहुमत के लिए अभी भी विजय को नए साथी तलाशने होंगे

Last Updated- May 04, 2026 | 3:45 PM IST
Thalapathy Vijay
'थलपति' विजय के पोस्टर के साथ उनका प्रशंसक | फोटो: PTI

Tamil Nadu Assembly Election Results 2026: तमिलनाडु की सियासत में सोमवार को एक ऐसा भूचाल आया जिसने दशकों पुराने द्रविड़ किलों की नीवें हिला दीं। सुपरस्टार विजय, जिन्हें उनके प्रशंसक प्यार से ‘थलपति’ कहते हैं, ने अपनी नई नवेली पार्टी ‘तमिझगा वेत्री कझगम’ (TVK) के साथ वह कर दिखाया जिसे राजनीति के दिग्गज नामुमकिन मान रहे थे। शुरुआती रुझानों में विजय की पार्टी 100 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। महज दो साल पहले बनी एक पार्टी का इस तरह उभरना राज्य की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है।

हालांकि, जीत की इस चमक के बीच एक पेंच फंसा है। 234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा 118 है। रुझानों के मुताबिक, विजय इस नंबर से थोड़ा दूर रह सकते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या विजय ‘बिना किसी समर्थन’ के सरकार बनाने के अपने दावे पर टिके रहेंगे या उन्हें सहयोगियों की तलाश करनी पड़ेगी?

सितारों की भीड़ में विजय ने कैसे मारी बाजी?

तमिलनाडु का सिनेमा और राजनीति से पुराना नाता रहा है। MGR से लेकर जयललिता तक, पर्दे के नायकों ने यहां सत्ता के शिखर को छुआ है। लेकिन हाल के सालों में रजनीकांत और कमल हासन जैसे दिग्गज भी उस करिश्मे को वोटों में नहीं बदल पाए थे, जो विजय ने कर दिखाया। विजय की रैलियों में उमड़ने वाली युवाओं और शहरी वोटरों की भारी भीड़ ने साफ कर दिया था कि राज्य बदलाव चाह रहा है।

सियासी जानकारों का मानना है कि विजय ने सीधे तौर पर DMK के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाई है। उन्हें दलित और ईसाई अल्पसंख्यक समुदाय का बड़ा साथ मिला है। साथ ही, विजय जिस वेल्लार समुदाय से आते हैं, वहां से भी उन्हें जबरदस्त समर्थन मिला। सत्ता विरोधी लहर (एंटी-इनकंबेंसी) का जो फायदा अन्नाद्रमुक (AIADMK) को मिलना चाहिए था, वह भी विजय की झोली में जाता दिख रहा है।

विचारधारा की जंग और ‘दुश्मनों’ की लिस्ट

विजय ने चुनाव प्रचार के दौरान अपनी लकीर बिल्कुल साफ रखी थी। उन्होंने DMK को अपना ‘सियासी दुश्मन’ और BJP को ‘वैचारिक दुश्मन’ घोषित किया था। उन्होंने यहां तक आरोप लगाया था कि BJP और DMK के बीच ‘अंडरग्राउंड डीलिंग’ चल रही है। विजय के मुताबिक, भ्रष्टाचार के मामलों से बचने के लिए स्टालिन और मोदी की जुगलबंदी है।

Also Read: West Bengal Election Results 2026 Live: रुझानों में BJP को प्रचंड बहुमत, TMC को बड़ा झटका

इसके अलावा, केंद्र सरकार और BJP के साथ विजय के रिश्ते काफी तल्ख रहे हैं। पिछले साल करूर भगदड़ की घटना के बाद BJP ने उन पर तीखे हमले किए थे। इतना ही नहीं, उनकी फिल्म ‘जन नायक’ को सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट दिलाने में आई मुश्किलें और फिल्म के लीक होने से हुए 70 करोड़ के नुकसान ने इस कड़वाहट को और बढ़ा दिया। ऐसे में विजय के लिए BJP के करीब जाना फिलहाल नामुमकिन नजर आता है।

गठबंधन के गणित: किसके साथ जाएंगे थलपति?

अगर TVK बहुमत के आंकड़े से पीछे रह जाती है, तो विजय के पास चार मुख्य रास्ते बचते हैं:

  • अन्नाद्रमुक (AIADMK) से हाथ मिलाना: पहले दोनों के बीच गठबंधन की बात हुई थी, लेकिन विजय की 50% से ज्यादा सीटों और CM पद की मांग पर बात बिगड़ गई थी। अब जबकि पासा पलट चुका है और पूरा मामला विजय के हाथ में चला गया है।
  • कांग्रेस का साथ: कांग्रेस ने विजय की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। विजय के पिता ने भी संकेत दिए हैं कि पार्टी सत्ता साझा करने को तैयार है। अगर विजय द्रविड़ पार्टियों से दूर रहना चाहते हैं, तो कांग्रेस का बाहरी समर्थन उनके लिए सबसे सुरक्षित रास्ता हो सकता है।
  • छोटे दलों का मोर्चा: विजय के पास PMK, DMDK और VCK जैसे छोटे दलों के साथ मिलकर सरकार चलाने का विकल्प भी है। इससे उन्हें किसी बड़े ‘सीनियर पार्टनर’ के दबाव में नहीं रहना पड़ेगा और वह अपनी अलग पहचान बनाए रख पाएंगे।

द्रविड़ राजनीति के दौर में नया प्रयोग

विजय की जीत ने यह साबित कर दिया है कि तमिलनाडु की जनता अब DMK और अन्नाद्रमुक के दशकों पुराने चक्रव्यूह से बाहर निकलना चाहती है। विजय ने शुरू से खुद को एक ‘साफ-सुथरे विकल्प’ के तौर पर पेश किया है। उन्होंने अपनी फिल्म ‘जन नायक’ के जरिए जो छवि बनाई, उसे चुनावी मैदान में बखूबी भुनाया।

अब पूरी नजर इस बात पर है कि विजय सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने के लिए किन समझौतों को मानते हैं। क्या वह अपने ‘अकेले चलने’ के वादे पर कायम रहेंगे या फिर गठबंधन की मजबूरियां उन्हें उन्हीं द्रविड़ दलों के दरवाजे पर ले जाएंगी, जिनके खिलाफ उन्होंने बिगुल फूंका था? तमिलनाडु की राजनीति का यह सस्पेंस अब अपने क्लाइमेक्स पर है।

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First Published - May 4, 2026 | 3:31 PM IST

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