विपक्ष के साथ सरकार के संवाद की तमाम कोशिशों के बावजूद वर्ष 2029 तक विधायिका में महिला आरक्षण लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार शाम लोक सभा में पारित नहीं हो सका।
इसके लिए अंतिम समय तक प्रयास किया गया लेकिन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और कांग्रेस, समाजवादी पार्टी तथा अन्य दलों के नेताओं के बीच इसे लेकर किसी समझौते पर सहमति नहीं बन सकी।
शुक्रवार को विधेयक पर मतदान करने वाले लोक सभा के 528 सदस्यों में से 298 सदस्यों ने इसका समर्थन किया जबकि 230 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया। इसे पारित कराने के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोटों की आवश्यकता थी।
इस 131वें संविधान संशोधन विधेयक के पराजित होने के बाद, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने दो संबंधित साधारण विधेयकों परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक को वापस ले लिया।
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इनका उद्देश्य दिल्ली, पुदुच्चेरी और जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेशों में प्रस्तावित संशोधित महिला आरक्षण कानून को लागू करना था। ये तीनों विधेयक गुरुवार सुबह लोक सभा में पेश किए गए थे, जो संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र का पहला दिन था, और यह विस्तारित बजट सत्र का हिस्सा था। संविधान संशोधन विधेयक के पराजित होने के बाद शनिवार को संसद के स्थगित होने की उम्मीद है।
सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने शुक्रवार शाम विधेयक के विफल होने के बाद हुई बैठक में यह घोषणा की कि वह एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करेगा ताकि महिलाओं को यह बताया जा सके कि विपक्षी दलों ने उन्हें प्रतिनिधित्व देने के प्रधानमंत्री के प्रयास को रोककर ‘पाप’ किया है। बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री मोदी ने की।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाला राजग इसे अपने आगामी विधान सभा चुनाव अभियान का केंद्रीय मुद्दा बनाएगा। पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को तथा तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान होना है।