जीएसटी दर में सितंबर में हुई कटौती के बाद टाटा मोटर्स यात्री वाहन बाजार में सबसे ज्यादा लाभ पाने वाली कंपनी बनकर उभरी है। वित्त वर्ष 26 की दूसरी छमाही में कंपनी ने प्रमुख मूल उपकरण विनिर्माताओं (ओईएम) के बीच सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की है और वॉल्यूम के लिहाज से इस दौरान महिंद्रा ऐंड महिंद्रा (एमऐंडएम) को पीछे छोड़ दिया है।
अप्रैल-अगस्त (वित्त वर्ष 26 की पहली छमाही) और सितंबर-मार्च (वित्त वर्ष 26 की दूसरी छमाही) के बीच उद्योग के तुलनात्मक आंकड़ों के अनुसार टाटा मोटर्स की थोक बिक्री 108.96 प्रतिशत बढ़कर 4,27,026 हो गई, जो पहली छमाही के 2,04,361 वाहनों से काफी ज्यादा है। खुदरा बिक्री के प्रदर्शन में भी यही रुझान देखा गया और वाहन पंजीकरण 109.63 प्रतिशत बढ़कर 4,14,151 हो गया।
शीर्ष छह यात्री वाहन विनिर्माताओं के बीच यह सबसे जोरदार वृद्धि थी, जो मारुति सुजूकी और एमऐंडएम जैसी प्रतिस्पर्धियों से खासी ज्यादा रही। मारुति सुजूकी ने थोक बिक्री में 75.14 प्रतिशत और खुदरा बिक्री में 91.77 प्रतिशत की तेज बढ़त दर्ज की। एमऐंडएम ने क्रमशः 73.59 प्रतिशत और 74.13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।
ह्युंडै, टोयोटा और किआ में अपेक्षाकृत मामूली सुधार देखा गया। इनकी थोक बिक्री में 64 से 67 प्रतिशत के बीच वृद्धि हुई। यह बात जीएसटी दरों में संशोधन के बल पर आई मांग प्रोत्साहन के संबंध में ज्यादा संतुलित प्रतिक्रिया बताती है। कर कटौती के बाद मूल्य सुधार, खर्च उठाने की बढ़ी क्षमता और रुकी हुई मांग की बदौलत यात्री वाहन उद्योग ने दूसरी छमाही में जोरदार वापसी की।
कंपनी की इस तेजी का असर उसकी प्रतिस्पर्धी स्थिति में आए बदलाव पर भी पड़ा। वित्त वर्ष 26 की दूसरी छमाही में 4,27,026 वाहनों की बिक्री के साथ टाटा मोटर्स एमऐंडएम की 4,18,939 वाहन बिक्री से आगे निकल गई और मारुति सुजूकी के बाद इस अवधि में दूसरी सबसे बड़ी यात्री वाहन कंपनी बन गई। टाटा मोटर्स इस बेहतर प्रदर्शन का श्रेय केंद्रित मॉडल और इंजन संबंधी रणनीति को देती है।
टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्य अधिकारी शैलेश चंद्र ने कहा, ‘हमारी जोदार वृद्धि स्पष्ट रणनीतिक उपायों पर सोच-समझकर काम करने का नतीजा है। जैसे कि श्रेणी में सबसे आगे रहने वाले मॉडलों के साथ तेजी से बढ़ने वाली श्रेणियों में कामयाबी हासिल करना, स्मार्ट संस्करणों और कई तरह के इंजनों के जरिये लोगों को चुनने के ज्यादा विकल्प देना और नए मॉडल शामिल करके अपने पोर्टफोलियो में नई जान डालना।’
उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) में कंपनी की अग्रणी स्थिति, सीएनजी में जोरदार प्रदर्शन और हैचबैक में स्थिर वृद्धि के साथ-साथ प्रमुख नामों की बढ़ती लोकप्रियता ने इस रफ्तार को बनाए रखा। मुंबई के एक विश्लेषक ने कहा कि ऐसा लगता है कि कंपनी की बहु-इंजन वाली रणनीति, जिसमें तेल-गैस इंजन, सीएनजी और ईवी शामिल हैं, ने जीएसटी कटौती के बाद मूल्य के प्रति संवेदनशील बाजार में बढ़ती मांग को पूरा करने में योगदान दिया।