अमेरिकी सरकार द्वारा सभी विदेशी नागरिकों के लिए एंथ्रोपिक के नवीनतम आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) मॉडल फेबल 5 और मिथोस 5 तक पहुंच रोकने के फैसले ने भारत में एआई संप्रभुता की चिंता फिर से बढ़ा दी है। यह निर्णय उन डेवलपरों, साइबर सुरक्षा फर्मों और उद्यमों के लिए चुनौती पैदा कर रहा है जिन्होंने इन मॉडलों के इर्द-गिर्द उत्पाद और सेवाएं बनानी शुरू कर दी थी।
अमेरिकी प्रशासन ने पिछले सप्ताहांत यह आदेश जारी किया था। यह आदेश तब आया है जब कुछ हफ्ते पहले ही भारत को एंथ्रोपिक के साइबर सुरक्षा पहल ‘प्रोजेक्ट ग्लासविंग’ में शामिल किया गया था और सरकार तथा उद्योग के प्रतिनिधियों ने कंपनी के साथ बातचीत करके उसके उन्नत एआई मॉडल तक ज्यादा पहुंच हासिल करने की कोशिश की थी।
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत और भारतीयों के लिए नवीनतम एंथ्रोपिक सेवाओं और उपकरणों तक पहुंच बहाल करने के प्रयास कूटनीतिक स्तर पर भी किए जाएंगे लेकिन यह निर्णय उन कंपनियों को लेना होगा जो एंथ्रोपिक की सेवाओं का उपयोग करती हैं। उन्होंने कहा, ‘उपयोगकर्ताओं के लिए पहुंच सीमित करने का कदम संबंधित उद्यमों और एंथ्रोपिक के ग्राहकों के काम को अस्थायी रूप से प्रभावित कर सकता है और लंबे समय में कंपनी की आय पर भी असर पड़ेगा। इसलिए यह कंपनी पर निर्भर है कि वह इसका हल कैसे निकालती है।’
यह प्रतिबंध ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार इंडिया एआई मिशन 2.0 के तहत प्रस्तावित बजट को काफी बढ़ाने की सोच रही है। इस मिशन का उद्देश्य ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियों के मॉडलों पर निर्भर रहने के बजाय अधिक से अधिक स्टार्टअप को फाउंडेशन मॉडल और स्मॉल लैंग्वेज मॉडल पर काम करने के लिए प्रेरित करना है। इसके एक हिस्से के रूप में, इस साल की शुरुआत में इंडिया एआई समिट के दौरान चार फाउंडेशन मॉडल पेश किए गए थे। उद्योग जगत के भागीदार भी अनिश्चितता की स्थिति में हैं और कई कंपनियां अब एंथ्रोपिक के नवीनतम मॉडलों के इर्द-गिर्द बने उत्पाद और प्रौद्योगिकी रणनीतियों पर फिर से बदलाव करने पर विचार कर रही हैं।
63 मून्स टेक्नॉलजीज की साइबर सुरक्षा शाखा 63 सैट्स साइबरटेक के प्रबंध निदेशक, सीईओ और सीआईओ नीहार पठारे ने कहा, ‘क्लॉड फैबल 5 और मिथोस 5 की वैश्विक पहुंच पर रोक लगाने वाला अमेरिकी निर्यात नियंत्रण निर्देश महत्त्वपूर्ण है। ऐसे में उन्नत एल्गोरिदम इंटेलिजेंस को वाणिज्यिक सॉफ्टवेयर उत्पाद के रूप में देखा जाना बंद कर दिया और इसे राज्य की संप्रभुता के हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जाने लगा।’
63 सैट्स साइबरटेक के प्रबंध निदेशक, सीईओ और सीआईओ नीहार पठारे के अनुसार, ‘मिथोस श्रेणी वाले मॉडल को अचानक हटाने से भारतीय उद्यम सुरक्षा पर तत्काल काम में देरी की लागत का बोझ भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि भारत की अत्यधिक डिजिटलीकृत बैंकिंग और फिनटेक कंपनियां इन मॉडलों के आधार पर स्वचालित कार्यप्रणाली के परीक्षण की तैयारी कर रही थीं। लेकिन इन मॉडलों तक पहुंच बंद होने से भारतीय कंपनियां पुराने स्थिर परीक्षण टूल और मैनुअल कोड समीक्षा के इस्तेमाल पर लौटने को मजबूर हो गई हैं जिससे कमियों को ठीक करने में लगने वाला समय घंटों से बढ़कर हफ्तों का हो गया है।
पिछले हफ्ते ही देश के सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने एंथ्रोपिक के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की थी। इस साझेदारी के तहत 50,000 टीसीएस कर्मियों के लिए लाइसेंस शामिल थे और कंपनी के लोकप्रिय उत्पादों और प्लेटफार्मों पर क्लॉड को तैनात करना भी शामिल था। साइबर सुरक्षा कंपनी सिक्योरटेक के सह-संस्थापक और सीईओ पंकित देसाई ने कहा कि फेबल 5 का शायद ज्यादा प्रभाव न पड़े मगर मिथोस 5 की पहुंच रोक एक झटका है क्योंकि कंपनियों को अपनी रणनीति में नए सिरे से बदलाव करना पड़ेगा।
उन्होंने कहा, ‘हमारे लिए सबसे बड़ी समस्या इन मॉडलों के लिए अन्य देशों पर निर्भर रहना है। किसी भी समय वे पहुंच रोक सकते हैं। यह प्रौद्योगिकी को हथियार की तरह इस्तेमाल करना है और चेतावनी की घंटी है जो हमें बताता है कि अत्याधुनिक तकनीक के लिए हम इन मॉडलों पर पूरी तरह से निर्भर नहीं रह सकते।’
ओपन-सोर्स कोडिंग एजेंट प्लेटफॉर्म क्लाइन में डेवलपर मार्केटिंग करने वाली एतिशा गर्ग ने कहा कि राष्ट्रीयता के आधार पर पहुंच प्रतिबंधित करने से उन डेवलपरों के लिए अनिश्चितता पैदा होती है जो उत्पादों को बनाने के लिए इन मॉडलों पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा, ‘डेवलपरों को स्थिर और अनुमानित पहुंच की आवश्यकता होती है क्योंकि अचानक प्रतिबंध वर्षों के काम को बाधित कर सकते हैं। ऐसे कदमों का एक परिणाम यह होगा कि भविष्य में अधिक डेवलपर ओपन-सोर्स मॉडलों की ओर रुख कर सकते हैं क्योंकि वे अधिक पारदर्शिता, नियंत्रण और कुछ कंपनियों के निर्णयों से स्वतंत्रता प्रदान करते हैं।’