भारत से आईफोन का निर्यात वित्त वर्ष 2026 के दौरान 2 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह आंकड़ा बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के अंतिम वर्ष में हासिल किया है। यह जानकारी ऐपल के लिए ठेके पर आईफोन बनाने वाली कंपनियों द्वारा सरकार के साझा किए गए आंकड़ों से सामने आई है।
इसके साथ ही ऐपल इंक के स्वामित्व वाले स्मार्टफोन ब्रांड आईफोन हार्मनाइज्ड सिस्टम (एचएस) कोड ढांचे के तहत वर्गीकृत सभी प्रमुख निर्यात श्रेणियों में भारत का सबसे बड़ा ब्रांडेड निर्यातक बनकर उभरा है। यह ढांचा वैश्विक व्यापार में इस्तेमाल होने वाले 5,000 से अधिक उत्पाद समूहों को कवर करता है। यह आकलन वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी वित्त वर्ष 2026 (अप्रैल-फरवरी) के 11 महीनों के निर्यात के आंकड़ों पर आधारित है।
पूरे वित्त वर्ष 2026 में भारत का कुल स्मार्टफोन निर्यात लगभग 2.6 लाख करोड़ रुपये रहा। इसमें से अकेले आईफोन का योगदान 75 फीसदी से अधिक रहा। इस दौरान लगभग 2 लाख करोड़ रुपये मूल्य के आईफोन का निर्यात किया गया। एचएस कोड वर्गीकरण के तहत वित्त वर्ष 2026 के पहले 11 महीनों में भारत की दूसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी डीजल वाहन 14.53 अरब डॉलर के निर्यात के साथ काफी पीछे रही। हालांकि अभी एक महीने का आंकड़ा आना बाकी है।
हीरा 11.23 अरब डॉलर के साथ प्रमुख निर्यात श्रेणी में तीसरे स्थान पर रहा। इसके बाद 9.98 अरब डॉलर मूल्य के निर्यात के साथ दवाएं चौथे स्थान पर रहीं। पेट्रोल का निर्यात 8.5 अरब डॉलर के साथ पांचवें स्थान पर रहा। इस उपलब्धि से ऐपल भारत की विनिर्माण महत्त्वाकांक्षा का एक प्रमुख उदाहरण और सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल की उत्कृष्ट सफलता की कहानी बन गया है। ऐपल के लिए ठेके पर आईफोन एवं अन्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों ने आंतरिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से श्रमिकों को प्रशिक्षित किया।
आपूर्तिकर्ता पारिस्थितिकी तंत्र मुख्य रूप से 40 से अधिक घरेलू कंपनियों के साथ-साथ जापान की टीडीके कॉरपोरेशन और कई ताइवानी संयुक्त उद्यमों जैसे गैर-चीनी आपूर्तिकर्ताओं के इर्द-गिर्द बनाया गया था। ऐपल ने चीनी कंपनियों को अपनी भारत की आपूर्ति श्रृंखला पारिस्थितिकी तंत्र से लगातार बाहर रखा है।
पीएलआई योजना शुरू होने के बाद से भारत से ऐपल के आईफोन का निर्यात लगभग शून्य से बढ़कर 5 वर्षों के भीतर 2 लाख करोड़ रुपये सालाना तक पहुंच गया है। वित्त वर्ष 2021-22 में ऐपल ने लगभग 9,351.6 करोड़ रुपये के मूल्य के आईफोन का निर्यात किया था जो वित्त वर्ष 2022-23 में बढ़कर करीब 44,269.5 करोड़ रुपये हो गया। जैसे-जैसे पीएलआई योजना ने गति पकड़ी ऐपल के विनिर्माण भागीदार टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और फॉक्सकॉन ने मिलकर वित्त वर्ष 2023-24 में आईफोन का निर्यात लगभग 85,013.5 करोड़ रुपये तक बढ़ा दिया जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये हो गया।
पीएलआई के अंतिम वर्ष में पहले 11 महीनों तक भू-राजनीतिक तनावों और वैश्विक व्यापार में शुल्क संबंधी व्यवधानों के बावजूद आईफोन निर्यात में 33 फीसदी की तेजी देखी गई।
वित्त वर्ष 2026 तक टाटा और फॉक्सकॉन आईफोन निर्यात में लगभग समान रूप से योगदान कर रहे थे। दोनों कंपनियों ने विभिन्न क्षेत्रों में भारत के कुछ सबसे बड़े विनिर्माण कारखानों का संचालन किया, जिसमें छोटी फैक्टरी में 19,000 से अधिक कर्मचारी और सबसे बड़ी में 42,000 से अधिक कर्मचारी काम कर रहे हैं। कार्यबल में 70 फीसदी से अधिक महिलाएं शामिल थीं। 40 से अधिक कलपुर्जा आपूर्तिकर्ताओं सहित ऐपल के व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र में करीब 2.5 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है।