ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) आगामी कॉरपोरेट औसत ईंधन दक्षता-3 (कैफे-3) मानदंडों के तहत स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड और फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के लिए वॉल्यूम डेरोगेशन फैक्टर (वीडीएफ) में भारी कटौती करने की योजना बना रहा है। बिज़नेस स्टैंडर्ड को ऐसी जानकारी मिली है। यह कदम पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने की दिशा में एक दमदार नीतिगत पहल को दर्शाता है।
फिलहाल देश में कैफे-2 मानदंड लागू हैं जबकि कैफे-3 मानदंडों का मसौदा चर्चा में है जिसे अप्रैल 2027 से अगले 5 साल की अवधि के लिए लागू किया जाएगा। कैफे मानदंडों के तहत हर वाहन विनिर्माता को एक साल के दौरान बेचे गए अपने सभी वाहनों के औसत कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को बीईई द्वारा निर्धारित सीमा के दायरे में रखना आवश्यक है। पूरे बेड़े के लिए औसत उत्सर्जन की गणना भारित औसत के रूप में की जाती है जहां अधिक बिकने वाले मॉडलों का अंतिम आंकड़े पर काफी प्रभाव पड़ता है।
वीडीएफ को सुपर क्रेडिट के रूप में भी जाना जाता है। यह स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड जैसे अपेक्षाकृत स्वच्छ वाहनों को एक से अधिक इकाई के रूप में गिनने की अनुमति देता है। इससे कार विनिर्माता का समग्र औसत उत्सर्जन कम हो जाता है और उसे बीईई द्वारा निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलती है। बीईई ने इस सप्ताह के आरंभ में वाहन विनिर्माताओं के संगठन सायम और वाहन विनिर्माताओं के साथ कैफे-3 का नया मसौदा साझा किया था। इसके साथ ही मौजूदा कैफे-2 व्यवस्था और सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किए जा चुके कैफे-3 मानदंडों का सितंबर 2025 का मसौदा खत्म हो जाएंगे।
कैफे-2 के तहत स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहनों के लिए वीडीएफ 2.0 का था जिसे सितंबर 2025 के मसौदे में भी बरकरार रखा गया था। मगर अप्रैल 2026 के मसौदे में इसे घटाकर 1.6 कर दिया गया है। जहां तक फ्लेक्स फ्यूल वाहनों की बात है तो सितंबर 2025 के मसौदे में वीडीएफ 1.5 प्रस्तावित था लेकिन अप्रैल 2026 के मसौदे में इसे घटाकर 1.1 कर दिया गया है। इससे उनका फायदा काफी कम हो गया है। नवीनतम मसौदे के अनुसार ईवी को 3.0 का गुणक मिलता रहेगा।
इस प्रकार वीडीएफ वास्तविक अंतर पैदा कर सकता है। मान लीजिए कि कार बनाने वाली कोई कंपनी एक साल के दौरान 1,000 पेट्रोल एसयूवी बेचती है जो 150 ग्राम प्रति किलोमीटर उत्सर्जन करती है। साथ ही वह 1,000 छोटी कारें बेचती है जो 100 ग्राम प्रति किलोमीटर उत्सर्जन करती हैं। ऐसे में उसका औसत उत्सर्जन 125 ग्राम प्रति किलोमीटर होगा।
मगर अब यदि कंपनी इलेक्ट्रिक वाहन लाती है और सालाना 200 ईवी बेचती है तो उत्सर्जन का गणित तेजी से बदल जाता है। 3.0 वीडीएफ के साथ उन 200 ईवी को 600 इकाई के रूप में गिना जाएगा। ऐसे में कार विनिर्माता के लिए पूरे बेड़े का औसत उत्सर्जन भारी गिरावट के साथ 93.75 ग्राम प्रति किलोमीटर रह जाएगा। अगर निर्धारित लक्ष्य 100 ग्राम प्रति किलोमीटर है तो महज 200 ईवी को जोड़ने से राहत मिल जाएगी।
बीईई द्वारा इस सप्ताह के आरंभ में सायम को भेजा गया प्रस्ताव शून्य उत्सर्जन वाली प्रौद्योगिकी को प्राथमिकता देने संबंधी सरकार के व्यापक नीतिगत रुख के अनुरूप है। दरअसल 28 फरवरी को शुरू हुए पश्चिम एशिया संघर्ष ने ईंधन आपूर्ति को बाधित कर दिया है।
पश्चिम एशिया से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का आयात भारत के लिए काफी महत्त्वपूर्ण है। बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा सायम और बीईई को भेजे गए सवालों का खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं आया।