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चेतावनी प्रणाली के उपकरणों पर हट सकती ड्यूटी! सिक्किम बाढ़ को देख GST काउंसिल कर सकती है फैसला

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गृह एवं आपदा प्रबंधन मंत्रालय की ओर से इस प्रणाली को तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों पर कर हटाने का अनुरोध किया गया है।

Last Updated- October 06, 2023 | 10:59 PM IST
flood in SIkkim

Sikkim Floods: सिक्किम में अचानक आई बाढ़ के बीच वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद शनिवार को होने जा रही बैठक में हाईटेक उपकरणों के आयात पर सीमा शुल्क और एकीकृत जीएसटी खत्म करने का फैसला कर सकती है, जिनका इस्तेमाल शुरुआती चेतावनी प्रणाली विकसित करने के लिए होता है। इसका मकसद भविष्य में इस तरह की किसी आपदा का जोखिम कम करना है।

इस मामले से जुड़े एक सूत्र ने कहा कि यह छूट फरवरी 2024 के अंत तक किए गए आयात पर लागू होगी। गृह एवं आपदा प्रबंधन मंत्रालय की ओर से इस प्रणाली को तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों पर कर हटाने का अनुरोध किया गया है। इसमें सिक्किम में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) से जुड़े जोखिम पर चल रही प्रायोगिक परियोजना के लिए विदेश से उपकरण आयात पर अस्थाई रूप से कर छूट की मांग की गई है।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण स्विस सरकार के साथ मिलकर जीएलओएफ जोखिम पर प्रायोगिक परियोजना पर काम कर रहा है, जिसमें उसे स्विस आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से अनुदान के रूप में वस्तुएं मिली हैं। सिक्किम में दो जगहों पर यह दल शुरुआती चेतावनी प्रणाली के उपकरण स्थापित कर रहा है। इसका प्राथमिक मकसद संभावित राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में इस तरह के जोखिम को कम करने की क्षमता विकसित करना है, जो देश में आपदा के मोर्चे पर चुनौती बनकर उभरा है।

बहरहाल अभी यह आकलन नहीं हो सकता है कि इस व्यवस्था में इस्तेमाल होने वाले आयातित उपकरण का मूल्य और उस पर लगने वाला शुल्क कितना है।

उत्तरी सिक्किम में 4 अक्टूबर को बादल फटने के कारण अचानक बाढ़ आ गई। इसमें कम से कम 14 लोगों की जान चली गई और 100 अन्य लोग लापता हो गए। एक हिमानी झील के फटने या जीएलओएफ के कारण अचानक बाढ़ आ गई, जिससे सामान्यतया बारिश के कारण आने वाली बाढ़ की तुलना में ज्यादा विध्वंस और नुकसान होता है।

अगर शुरुआती चेतावनी प्रणाली विकसित हो जाती है तो इससे लोगों को जगह खाली करने के लिए कुछ वक्त मिल सकता है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस व्यवस्था को विकसित करने के पहले हिस्से पर पिछले महीने काम हो चुका था, जिसमें ल्होनक झील के स्तर की निगरानी के लिए कैमरा और मौसम संबंधी उपकरण लगाए गए थे। परियोजना से जुड़े अधिकारियों के हवाले से खबर में यह भी कहा गया है कि भारत सरकार इसे इस साल पूरा करने को तैयार नहीं थी, ऐसे में इसे दो चरणों में किया जा रहा था।

ल्होनक झील पर एक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली से जुड़े वैज्ञानिकों के अनुसार अधिकारियों और निवासियों को 90 मिनट की चेतावनी का समय मिला होगा। इसमें पहले गेट खोलने के लिए हाइड्रोपावर स्टेशन को अनुमति भी मिली होगी। रॉयटर्स ने स्विस दूतावास के सूत्रों के हवाले से कहा है कि लगाए गए निगरानी उपकरणों से प्राधिकारियों को आंकड़े भेजे जाने की संभावना थी, लेकिन अज्ञात वजहों से सितंबर के आखिर से कैमरा काम नहीं कर रहा था।

स्विटजरलैंड इस परियोजना को समर्थन दे रहा है। हर मामले में तदर्थ छूट के लिए विशेष आदेश दिया जाता है। ऐसे आदेश में असाधारण प्रकृति के मामलों में शुल्क भुगतान की छूट दी जाती है, जिसमें उस वस्तु का इस्तेमाल होना होता है। यह आयातित वस्तुओं के अंतिम उपयोग और सीमा शुल्क अधिनियम के प्रावधानों के अनुपालन के अधीन है। छूट के लिए शर्तों का अनुपालन करने से संबंधित सूचना आयात वाले बंदरगाह के प्रभारी आयुक्त को देनी होगी। सूत्र ने कहा कि परिषद द्वारा मंजूरी मिलने के बाद इस संबंध में परिपत्र जारी किया जाएगा।

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First Published - October 6, 2023 | 10:59 PM IST

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