देश के रियल एस्टेट क्षेत्र में पूंजी की आवक साल 2026 की पहली तिमाही में सालाना आधार पर 72 प्रतिशत बढ़कर 5.1 अरब डॉलर हो गई, जबकि साल 2025 की पहली तिमाही में यह 2.9 अरब डॉलर रही थी। रियल एस्टेट और बुनियादी ढांचा क्षेत्र की परामर्श फर्म सीबीआरई साउथ एशिया ने यह जानकारी दी है।
अब तक किसी भी तिमाही के इस सर्वाधिक पूंजी निवेश में मुख्य रूप से डेवलपर आगे रहे। इनके ठीक बाद रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (रीट) का स्थान रहा। तिमाही आधार पर यह निवेश साल 2025 की चौथी तिमाही में दर्ज 3.3 अरब डॉलर की तुलना में 53 प्रतिशत बढ़ा, जो देश के रियल एस्टेट क्षेत्र के बुनियादी आधार में संस्थागत निवेशकों के लगातार बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।
अधिकारी (भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया और अफ्रीका) अंशुमान मैगजीन ने कहा, ‘वैश्विक स्तर पर व्यापक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद हमारा दमदार आर्थिक ढांचा लगातार भारी पूंजी आकर्षित कर रहा है। रीट की गतिविधियों में कई गुना वृद्धि विशेष रूप से उत्साहजनक है। यह ऐसे परिपक्व होते बाजार का संकेत है, जो तेजी से संस्थागत, प्रतिफल देने वाली परिसंपत्तियों की ओर बढ़ रहा है। हमें उम्मीद है कि आगे चलकर विदेशी पूंजी स्पष्ट निवेश रणनीतियों के कारण फिर से जोरदार ढंग से जुटेगी।’
साल 2026 की पहली तिमाही के दौरान निवेश की यह रफ्तार मुख्य रूप से निर्मित कार्यालय परिसंपत्तियों में भारी पूंजी प्रवाह और जमीन/विकास स्थलों के अधिग्रहण में जारी गतिविधियों से संचालित हुई। समूची इक्विटी निवेश प्रवाह में इनकी कुल मिलाकर 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रही।
मुख्य रूप से डेवलपरों की अगुआई में घरेलू निवेशकों ने इस समूचे पूंजी निवेश में 96 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ निवेश परिदृश्य में दबदबा बनाए रखा। कुल पूंजी प्रवाह में डेवलपरों का हिस्सा 42 प्रतिशत रहा। इसके ठीक बाद 40 प्रतिशत के साथ रीट का स्थान रहा। रीट का निवेश 2 अरब से ज्यादा को पार कर गया। यह पिछली तिमाही की तुलना में कई गुना वृद्धि दर्शाता है और कुल निवेश के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।
इस पूंजी का एक बड़ा हिस्सा जमीन अधिग्रहण में लगाया गया था। जगह खरीदने के लिए रखे गए पैसे का 73 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा मिलेजुले इस्तेमाल और आवासीय परियोजनाओं में लगाया गया, बाकी हिस्सा कार्यालय, वेयरहाउसिंग और आतिथ्य-सत्कार विकास में गया।
सीबीआरई के प्रबंधन निदेशक और सह-प्रमुख (कैपिटल मार्केट्स, इंडिया) गौरव कुमार ने कहा, ‘हम देख रहे हैं कि अधिक गुणवत्ता वाले ऑफिस स्पेस के लिए लगातार प्राथमिकता बनी हुई है। इसकी वजह घरेलू संस्थागत पूंजी के साथ-साथ विदेशी पूंजी का बड़ा निवेश है, खासकर रीट के जरिये। यह मांग मिलेजुले इस्तेमाल और आवासीय विकास के लिए जगह खरीदने में हुई बढ़ोतरी के साथ मिलकर बाजार का दमदार दृष्टिकोण बताती है। भविष्य के लिहाज से हमें उम्मीद है कि निवेश का अगला चरण, प्रतिफल पर केंद्रित आय वाली परिसंपत्तियों तथा अधिक वृद्धि वाले मौकों के बीच रणनीतिक संतुलन से परिभाषित होगा।