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बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव ने भारत से मांगा तेल, सरकार मांगों की कर रही है समीक्षा

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ईरान के मामले में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के नेतृत्व वाले प्रस्ताव का सह-प्रायोजन किया है।

Last Updated- March 13, 2026 | 8:57 AM IST
Strait of Hormuz Crisis

पश्चिम एशिया संकट के बीच बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव सहित कई पड़ोसी देशों ने भारत से तेल की आपूर्ति के लिए अनुरोध किया है। सरकार इन देशों की मांग संबंधी अनुरोध की समीक्षा कर रही है। भारत अपने पड़ोसी देशों को परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का प्रमुख निर्यातक है।

अपनी साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत को बांग्लादेश सरकार से डीजल की आपूर्ति के लिए अनुरोध प्राप्त हुआ है। केंद्र सरकार इस अनुरोध पर वर्तमान में विचार कर रही है। उन्होंने कहा, ‘उसके प्रस्ताव पर निर्णय लेते समय सरकार अपनी शोधन क्षमता, घरेलू जरूरत एवं डीजल की उपलब्धता जैसे पहलुओं को देखेगी। वर्ष 2017 से बांग्लादेश को डीजल निर्यात किया जा रहा है।’

जायसवाल ने कहा कि बांग्लादेश के साथ संबंधों के प्रति भारत के जन-केंद्रित और विकास-उन्मुख दृष्टिकोण को देखते हुए हम सन 2007 से नुमालीगढ़ रिफाइनरी से हम जलमार्ग, रेल और बाद में भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन जैसे माध्यमों से उसे डीजल की आपूर्ति कर रहे हैं। आपसी सहमति की शर्तों पर हाई-स्पीड डीजल की आपूर्ति के लिए अक्टूबर 2017 में नुमालीगढ़ रिफाइनरी और बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के बीच बिक्री-खरीद समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।

जायसवाल ने कहा कि बांग्लादेश के अलावा श्रीलंका और मालदीव सहित कई अन्य पड़ोसी देशों ने भी भारत से तेल मांगा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इन देशों के अनुरोध पर कोई भी निर्णय लेने से पहले अपनी घरेलू ऊर्जा आवश्यकताओं तथा इन पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता की समीक्षा करेगी।

ईरान के मामले में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के नेतृत्व वाले प्रस्ताव का सह-प्रायोजन किया है। उन्होंने कहा कि 135 देशों ने इस विशेष प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं और यह इस मुद्दे पर भारत की बहुकोणीय स्थिति को दर्शाता है।

उन्होंने कहा, ‘खाड़ी के देशों में बड़ी संख्या में भारतीय लोग रहते और काम करते है। उनकी सुरक्षा एवं भलाई बेहद महत्त्वपूर्ण मामला है। यही नहीं, खाड़ी क्षेत्र भारत की ऊर्जा सुरक्षा आवश्यकताओं के लिए भी बहुत अहम है।’

ईरान पर अमेरिका-इजरायली हमलों और छात्राओं के स्कूल को बमों से उड़ाने के संबंध में पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘हमें लोगों की मौत पर अफसोस है। हम इस संबंध में अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं।’ उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने संघर्ष पर कई बयान जारी किए हैं और हमारा स्पष्ट मानना है कि सभी नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।’

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या पर कथित तौर पर संवेदना व्यक्त करने में सरकार की देरी के लिए आलोचना झेलने संबंधी सवालों के जवाब में जायसवाल ने कहा कि भारत के विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने 5 मार्च को ईरानी दूतावास में भारत सरकार की ओर से संवेदना पुस्तक पर हस्ताक्षर किए थे। यह उसी दिन हुआ, जब वहां पुस्तक रखी गई। उन्होंने कहा, ‘इस मसले पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने वाले लोग पहले तथ्यों के बारे में अच्छी तरह जान लें। यदि जानकारी नहीं है, तो तथ्यहीन टिप्पणियां करने से बचना ही बेहतर है।’

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि वर्तमान में ईरान में 9,000 भारतीय हैं। इनमें ज्यादातर छात्र हैं और इनके अलावा नाविक, व्यापारी, पेशेवर और तीर्थयात्री भी हैं। जब विदेश मंत्रालय ने इसी साल 14 जनवरी और फिर 23 फरवरी को सलाह जारी की तो उसके बाद बड़ी संख्या में छात्र और अन्य भारतीय नागरिक देश लौट आए हैं। जो लोग फिलहाल वहां रह गए हैं, उन्हें तेहरान में स्थित भारत के मिशन ने तेहरान सहित खतरे वाले स्थानों से निकाल कर देश के अन्य सुरक्षित ठिकानों और शहरों में स्थानांतरित कर दिया है। भारतीय मिशन उन भारतीयों को वीजा एवं भूमि सीमा पार करने में मदद कर रहे हैं जो अजरबैजान और आर्मेनिया के रास्ते अपने घर भारत वापस आना चाहते हैं।

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First Published - March 13, 2026 | 8:57 AM IST

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