बैंकिंग व्यवस्था में नकदी 4 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। बाजार सहभागियों ने कहा कि सरकारी बॉन्डों की मैच्योरिटी के कारण ऐसा हुआ है। भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के के मुताबिक बुधवार को शुद्ध नकदी 4.57 लाख करोड़ रुपये के अधिशेष में थी, जो 19 मई, 2022 के बाद सबसे अधिक है। ये आंकड़े एक दिन की देरी से प्रकाशित होते हैं।
बुधवार को 31,329 करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड मेच्योर हुए। इसके अलावा 12 अप्रैल और 17 अप्रैल को क्रमशः 86,403 करोड़ रुपये और 34,791 करोड़ रुपये के बॉन्ड मैच्योर होने वाले हैं। इससे नकदी अधिशेष करीब 5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है। इसकी वजह से भारित औसत कॉल दर (डब्ल्यूएसीआर) कुछ समय के लिए स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (एसडीएफ) दर से नीचे गिर सकती है, जो अभी इसके आसपास है।
भारित औसत कॉल दर 5.10 प्रतिशत थी, जो इसके पहले दिन 5.08 प्रतिशत थी। इसके पहले सप्ताह में 2 मौकों पर यह एसडीएफ से नीचे आई। बहरहाल रिजर्व बैंक ने वैरिएबल रेट रिवर्स रीपो (वीआरआरआर) नीलामी से दूरी बनाए रखी। एसडीएफ दर अभी 5 प्रतिशत है, जो नीतिगत रीपो दर से 25 आधार अंक नीचे है। एसडीएफ दर वह ब्याज दर है जिस पर बैंक अपनी अतिरिक्त धनराशि रिजर्व बैंक के पास रखते हैं। यह रिजर्व बैंक के पॉलिसी कॉरिडोर की निचली सीमा बनाती है, जिसमें बीच में रीपो रेट और ऊपरी छोर पर मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) दर होती है।
विशेषज्ञों ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रही अनिश्चितता और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को देखते हुए केंद्रीय बैंक नकदी अपने पास खींचने से बच सकता है क्योंकि इससे बॉन्ड यील्ड और मुद्रा बाजार दरों में तेजी आ सकती है।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता ने कहा, ‘रिजर्व बैंक ने एक मार्गदर्शन दिया है कि जब तक भारित औसत कॉल दर, एसडीएफ और रीपो रेट के बीच रहेगी, तब तक वह वीआरआरआर नीलामी नहीं करेगा।’