ग्लोबल क्रिप्टो एक्सचेंज कॉइनबेस भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। करीब 2 साल तक भारत से अनुपस्थिति के बाद कॉइनबेस घरेलू क्रिप्टो प्लेटफॉर्म कॉइनडीसीएक्स और कॉइनस्विच में निवेश के माध्यम से भारत में अपना परिचालन फिर से शुरू कर रहा है।
कंपनी ने कहा कि भारत में ग्राहक अब इमीडिएट पेमेंट्स सर्विस (आईएमपीएस) के माध्यम से सीधे अपने बैंक खातों से भारतीय रुपये में जमा और निकासी कर सकते हैं। इसमें पी2पी रेल्स या बिचौलियों पर निर्भरता नहीं रहेगी।’ यह भारत की फाइनैंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (एफआईयू-आईएनडी) के साथ कंपनी के पंजीकरण के एक साल से अधिक समय बाद हुआ है।
भारत पर ध्यान केंद्रित करने का कारण यह है कि कंपनी इस क्षेत्र में भारत में उच्च स्तर की गतिविधियां देख रही है, कॉइनबेस में एपीएसी के प्रमुख जॉन ओ लॉघलेन ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘यहां बाजार में गतिविधियां धीमी नहीं हुई है, हालांकि नियम नहीं बने हैं। हमें कई ऐसे अधिकार क्षेत्रों में काम करने का अनुभव है, जहां हमने नियमों को विकसित और परिपक्व होते देखा है। हमें भारत में नियम बनने को लेकर भरोसा है।’
हालांकि उन्होंने भारत में अपने उपभोक्ताओं की संख्या नहीं बताई, लेकिन उन्होंने कहा कि भारत में प्रति उपभोक्ता औसत राजस्व अन्य देशों की तुलना में मामूली रहेगा, जहां अमेरिका की यह कंपनी की मौजूदगी है। भारत में कॉइनबेस ने निवेश भी किया है। अब तक उसने10 निवेश किए हैं।
उन्होंने कहा, ‘हम प्रभावी रूप से यहां (भारत में) कॉइनडीसीएक्स में महत्त्वपूर्ण निवेश और कॉइनबेस के अपने खुदरा लॉन्च के साथ अपने स्वाभाविक विकास के साथ दो तरह की दौड़ में शामिल हो रहे हैं।’