वहां सुरक्षा अवरोध (बैरिकेड) बड़ी सख्ती से लगाए गए थे। पुलिस की तैनाती कई किलोमीटर पहले से शुरू हो गई थी। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति भी आसानी से मिल गई और वहां लगभग 2,000 समर्थक पहुंचे। 6 जून को दिल्ली में हुए इस आयोजन से साफ दिखा कि ऑनलाइन शुरू हुई जेन-ज़ी पार्टी, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
प्रदर्शन वाली जगह पर विरोध प्रदर्शन में भी कई रंग दिखे। प्रदर्शन से जुड़े पोस्टर में मीम की अधिकता थी लेकिन साथ ही जवाबदेही की मांग वाले नारे भी गूंज रहे थे। लोगों ने तिलचट्टे वाले मुखौटे और टी-शर्ट पहन रखी थी। बैनर पर डॉ. बी.आर. आंबेडकर, ज्योतिराव फुले और भगत सिंह की तस्वीरें भी थीं। प्रदर्शन के दौरान सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके बार-बार कहते रहे, ‘छात्र सामने रहें, बाकी लोग पीछे खड़े हों।’
प्रदर्शन की तैयारी के दौरान इसे देश का पहला जेन-ज़ी युवाओं के नेतृत्व वाला आंदोलन बताने की कोशिश भी की गई। सीजेपी ने समर्थकों से फूल और किताबें लाने, सनस्क्रीन लगाने, पर्याप्त पानी पीने, अच्छा भोजन करने और संभव हो तो संविधान की एक प्रति साथ लाने की अपील की। खुद दीपके भी हवाईअड्डे से डॉ. आंबेडकर की जीवनी की एक प्रति हाथ में लेकर निकले। इस आंदोलन का उद्देश्य था कि जेन-जी युवाओं को लगे कि वे इस आंदोलन के बराबर के भागीदार हैं।
सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास से इस आंदोलन के भविष्य को लेकर सवाल किए गए तब उन्होंने कहा, ‘यह आंदोलन किसी एक नेतृत्वकर्ता के नेतृत्व में चलने वाला आंदोलन नहीं है और हजारों प्रभावित छात्र ही मिलकर यह तय करेंगे कि अगला कदम क्या होगा।’ हालांकि दीपके ने यह घोषणा की कि यह प्रदर्शन देश भर में किया जाएगा और अगले शनिवार वे जंतर-मंतर पर एकत्रित होंगे। जब सीजेपी जेन जी युवाओं की आवाज बनने की कोशिश कर रही थी, उसी दौरान शिक्षा से जुड़े मुद्दे सामने आए, जिससे उसे युवाओं की समस्याओं को उठाने और उनके प्रतिनिधि के रूप में उभरने का अवसर मिला।
राजनीतिक रणनीतिकार और आम आदमी पार्टी के पूर्व सोशल मीडिया प्रमुख अंकित लाल का कहना है कि परीक्षा पेपर लीक की घटनाएं पहले भी होती रही हैं। उन्होंने कहा, ‘इस बार छात्रों को अपनी बात रखने के लिए एक ऐसा मंच मिला, जहां उन्हें किसी राजनीतिक पहचान से नहीं जोड़ा गया।
दूसरी तरफ, सीजेपी को भी इससे अपना समर्थन आधार मजबूत करने का मौका मिला।’ शिक्षा सुधार की मांग को और मजबूती तब मिली जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी जंतर-मंतर पहुंचे। कई छात्रों ने कहा कि वे ‘अपने वांगचुक सर’ के लिए आए हैं। वांगचुक ने कहा, ‘मुझे प्रदर्शन करना पसंद नहीं है, लेकिन न्याय के लिए यह जरूरी है।’ इस पर लोगों ने जोरदार तालियां बजाईं। दीपके बोस्टन से दिल्ली आए थे। उन्होंने हाल ही में हुए नीट पेपर लीक और शिक्षा विभाग से जुड़े अन्य विवादों के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए प्रदर्शन का आह्वान किया था।
बड़ी संख्या में, खासकर जेन-जी युवा इसमें शामिल हुए। हालांकि अधिकांश लोगों के लिए सीजेपी फिलहाल केवल एक ऐसा मंच था जिसके जरिये वे अपने भविष्य से जुड़े मुद्दों को उठा सकते थे। इस प्रदर्शन में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले छात्र, कॉलेज के विद्यार्थी और स्कूल के छात्र भी शामिल थे। वे सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहे थे।