facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

निवेशकों की नब्ज टटोलने लंदन पहुंची सरकारी टीम

Advertisement

न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता नियम पूरे करने के लिए 10% हिस्सेदारी बिक्री की योजना

Last Updated- December 16, 2025 | 8:32 AM IST
GIC Re

केंद्र ने सरकारी स्वामित्व वाली भारतीय साधारण बीमा निगम (जीआईसी) में अल्पांश हिस्सेदारी बेचने के लिए लंदन में रोड शो आयोजित किया है। यह रोड शो निवेशकों की दिलचस्पी जानने के लिए किया गया। मामले के जानकार दो सूत्रों ने यह जानकारी दी।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने पिछले साल बताया था कि बाजार नियामक के न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता मानदंड को पूरा करने के लिए सरकार बीमा कंपनी में 10 फीसदी हिस्सेदारी किस्तों में बेचने की योजना बना रही है। इसमें से सरकार ने सितंबर 2024 में बीमा कंपनी में अपनी 3.4 फीसदी हिस्सेदारी बेची थी।

एक सूत्र ने बताया कि निवेश और सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के अधिकारी निवेशकों से मिलने और उनकी प्रतिक्रिया जानने के लिए लंदन गए थे। हालांकि, वित्त मंत्रालय ने रॉयटर्स के टिप्पणी के अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया है।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक जीआईसी में सरकार की फिलहाल 82.4 फीसदी हिस्सेदारी है जबकि बीमा कंपनी के शेयर पिछले वर्ष की सरकारी शेयर बिक्री में निर्धारित पेशकश मूल्य से लगभग 3.5 फीसदी नीचे कारोबार कर रहे थे। बाजार नियामक के नियमों के अनुसार सभी सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों के लिए न्यूनतम 25 फीसदी सार्वजनिक हिस्सेदारी बनाए रखना अनिवार्य है।

सरकार निजीकरण और अल्पांश हिस्सेदारी बिक्री की अपनी योजनाओं के प्रति प्रतिबद्ध है। लेकिन पिछले दो वर्षों में इसकी गति धीमी हो गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2024-25 में और चालू वित्त वर्ष में अब तक विनिवेश से सरकार को 175 अरब रुपये मिले हैं।

Advertisement
First Published - December 16, 2025 | 8:32 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement