देश भर में लू के बढ़ते प्रकोप के साथ केंद्र सरकार ने इससे बचाव के उपाय लागू करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य और श्रम मंत्रालयों ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस संबंध में अपनी पूरी तैयारी करने के लिए कहा है।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने मंगलवार को राष्ट्रव्यापी परामर्श जारी कर बढ़ते तापमान और लू की स्थिति से श्रमिकों को बचाने के लिए तत्काल उचित उपाय करने का आग्रह किया। मुख्य सचिवों और प्रशासकों को भेजे संदेश में मंत्रालय ने राज्यों से नियोक्ताओं, उद्योगों और निर्माण फर्मों को श्रमिकों, विशेष रूप से बाहरी एवं श्रम आधारित कार्यक्षेत्रों में लगे लोगों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम करने का निर्देश देने को कहा।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को श्रमिकों की सुरक्षा के लिए नियोक्ताओं, उद्योगों और निर्माण कंपनियों को आवश्यक निर्देश जारी करने की सलाह दी गई है।’
यह दिशानिर्देश केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुनिया सलीला श्रीवास्तव द्वारा राज्यों से सभी स्वास्थ्य सुविधाओं पर लू प्रबंधन इकाइयों को चालू करने, एम्बुलेंस सेवाओं की पर्याप्त तैयारी रखने और समय पर कार्रवाई के लिए प्रारंभिक चेतावनी और परामर्श के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए कहे जाने के कुछ दिन बाद आई है। पत्र में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच पोर्टल पर हीट स्ट्रोक के मामलों की ताजा जानकारी दर्ज करने के लिए भी कहा गया है।
गर्मी से बचाव की सरकारी तैयारी ऐसे समय में हो रही है जब दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों के अस्पतालों की ओपीडी में हीट स्ट्रोक, थकावट और गर्मी से संबंधित अन्य बीमारियों जैसे निर्जलीकरण, चक्कर आना और पुरानी बीमारियों के उभरने जैसे रोगियों में 10-15 फीसदी की वृद्धि देखी जा रही है। मुंबई के सैफी अस्पताल में आंतरिक चिकित्सा के परामर्शदाता रितेश शाह ने कहा कि उनके पास आने वाले अधिकांश (लगभग 60 से 70 फीसदी) मामले गर्मी से थकावट और निर्जलीकरण यानी पानी की कमी के हैं।
उन्होंने कहा, ‘गर्मी से ऐंठन और बेहोशी के दौरे जैसे मध्यम श्रेणी के मामले लगभग 20 से 30 फीसदी हैं। फिलहाल हीट स्ट्रोक के गंभीर मामले कम आ रहे हैं, लेकिन उनसे बेहद सक्रियता और सावधानी के साथ निपटने की आवश्यकता है।’
अस्पतालों के डॉक्टर अपने-अपने यहां ओपीडी में मरीजों को पर्याप्त पानी पीने, ओआरएस का उपयोग करने और अत्यधिक धूप से बचने जैसे उपाय अपनाने की सलाह दे रहे हैं। गुरुग्राम के सीके बिरला अस्पताल में आंतरिक चिकित्सा के एसोसिएट डायरेक्टर तुषार तायल ने कहा, ‘शुरुआती देखभाल क्षेत्र और आपातकालीन विभागों में गर्मी से बचाव के इंतजाम किए जा रहे हैं।’
उन्होंने कहा कि गहन चिकित्सा इकाइयों (आईसीयू) को हीट स्ट्रोक जैसे गंभीर मामलों के प्रबंधन के लिए अलर्ट पर रखा गया है। उनसे तापमान नियंत्रण, इलेक्ट्रोलाइट सुधार और आवश्यकतानुसार प्रोटोकॉल अपनाने को कहा गया है। मुंबई के एक अन्य डॉक्टर ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि गर्मी से संबंधित बीमारियों वाले अधिकांश रोगी वे आ रहे हैं, जिन्हें घर से बाहर जाकर या अधिकांश खुले में काम करना पड़ता है, क्योंकि वे गर्मी के संपर्क में अधिक आते हैं।
बढ़ती गर्मी को ध्यान में रखते हुए श्रम मंत्रालय ने फैक्ट्री और खदान प्रबंधन के काम में कर्मचारियों को थोड़ी ढील देने की सलाह दी है, जिसमें अत्यधिक गर्मी के घंटों के दौरान काम कम करना और जहां निरंतर संचालन अनिवार्य है, वहां अतिरिक्त श्रमिकों को तैनात करना जैसे उपाय शामिल हैं। परामर्श में निर्माण श्रमिकों, ईंट भट्ठा कर्मचारियों, दैनिक वेतन भोगियों और मजदूरों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।