जिन इलाकों में पाइपलाइन से प्राकृतिक गैस (PNG) की आपूर्ति हो रही है, वहां के उपभोक्ता यदि पीएनजी कनेक्शन नहीं लेते हैं तो उन्हें एलपीजी सिलिंडर नहीं दिया जाएगा। यह कदम पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण एलपीजी संकट के बीच उठाया गया है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग पीएनजी नेटवर्क से जुड़ जाएं और आगे ईंधन आपूर्ति में आने वाली दिक्कतों को कम से कम किया जा सके। सरकार ने इस संबंध में मंगलवार को आदेश जारी कर दिया है।
इस आदेश में कहा गया है कि यदि कोई घर ऐसे क्षेत्र में स्थित है, जहां किसी अधिकृत एजेंसी ने पहले ही पाइपलाइन बिछा दी है या प्राकृतिक गैस की आपूर्ति करने की स्थिति में है और एजेंसी ने उस पते पर घरेलू पीएनजी उपभोक्ता बनने के लिए मैसेज भेजा है, इसके बाद भी घरेलू पीएनजी उपभोक्ता बनने के लिए आवेदन नहीं किया गया है, तो उस पते पर मैसेज भेजे जाने की तारीख से तीन महीने बाद एलपीजी आपूर्ति बंद कर दी जाएगी। यह ‘प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पाद वितरण (पाइपलाइन बिछाने, निर्माण, संचालन और विस्तार करने तथा अन्य सुविधाओं के जरिए) आदेश’ उन मामलों में लागू नहीं होगा जहां तकनीकी रूप से पाइप कनेक्शन प्रदान करना संभव नहीं है। इसके लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र देना होगा।
सरकार उपभोक्ताओं को पीएनजी पर लाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जो एक अधिक सुविधाजनक ईंधन विकल्प है और पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न आपूर्ति व्यवधान से कम प्रभावित होता है। अब तक, इसने देश भर में 307 भौगोलिक क्षेत्रों में सीजीडी नेटवर्क विस्तार के लिए सीजीडी संस्थाओं को अधिकृत किया है। आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के तहत जारी इस आदेश में देश भर में पाइपलाइन बिछाने और इनके विस्तार के लिए समयबद्ध रूपरेखा पेश की गई है, जिसमें मंजूरी और भूमि तक पहुंच में देरी जैसी अड़चनों को दूर किया गया है। सीजीडी संस्थाओं ने मंगलवार को कहा कि वे 110 भौगोलिक क्षेत्रों में 9,046 पीएनजी कनेक्शन जारी कर चुकी हैं।
तेल मंत्रालय ने पश्चिम एशिया संकट पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन के बाद एक बयान में कहा, ‘सरकार ने पहले ही उपभोक्ताओं को 20 प्रतिशत वाणिज्यिक एलपीजी आपूर्ति आंशिक रूप से बहाल कर दी है। इसके अतिरिक्त पीएनजी विस्तार सुधारों से जुड़ा अतिरिक्त 10 प्रतिशत आवंटन का प्रस्ताव दिया गया है। साथ ही पिछले सप्ताह राज्यों को अलग से वाणिज्यिक एलपीजी का 20 प्रतिशत आवंटन करने की अनुमति दी गई है। इस तरह अब कुल आवंटन 50 प्रतिशत हो जाएगा।’
संवाददाता सम्मेलन में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने यह भी कहा कि सभी रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं, कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार है। पेट्रोल और डीजल की भी कोई कमी नहीं है। पेट्रोल पंप भी देश भर में सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।
पश्चिम एशिया संकट के कारण फंसे कार्गो वाले निर्यातकों के लिए कई सरकारी बंदरगाहों ने राहत और रियायतों का ऐलान किया है। अदाणी पोर्ट्स ऐंड स्पेशल इकनॉमिक जोन के स्वामित्व वाले गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह ने भी मंगलवार से निर्यातकों को रियायतें देना शुरू कर दिया है। यह बात मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अंतर-मंत्रालयी समूह की बैठक के दौरान कही। यह बंदरगाह भारत का सबसे बड़ा कंटेनर कार्गो हैंडलर है। ईरान के साथ संघर्ष शुरू होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट को पार करने वाला एक एलपीजी जहाज यहां भी आया है।
नौवहन मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने कहा, ‘मुंद्रा बंदरगाह ने पश्चिम एशिया जाने वाले निर्यात कंटेनरों के लिए 15 दिनों तक मुफ्त भंडारण सुविधा प्रदान की है। रीफर प्लग-इन शुल्क पर 80 प्रतिशत की छूट दी है और लिफ्ट-ऑन/लिफ्ट-ऑफ और परिवहन शुल्क भी माफ कर दिए गए हैं। इसके अलावा, बंदरगाह ने ‘बैक-टू-टाउन’ कंटेनरों के लिए 15-दिन की मुफ्त भंडारण विंडो की पेशकश की है।’