वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को संसद में बताया कि अब लेनदारों की समिति दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता (आईबीसी) संहिता के तहत नियामकों और जमीन के विकास से जुड़े मामलों पर सुझाव और दृष्टिकोण जानने के लिए भूमि से जुड़े प्राधिकारियों को अपनी बैठकों में आमंत्रित कर सकती है।
राज्य सभा में पारित आईबीसी विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए सीतारमण ने कहा, ‘ऐसे प्राधिकरण आकर इन जमीनों और संपत्तियों की वैधता को मंज़ूरी दे सकते हैं या उस पर टिप्पणी कर सकते हैं, बैठकों में इसके बारे में जानकारी दे सकते हैं। सीओसी उन्हें नियामक और भूमि विकास से जुड़े मामलों पर इनपुट और दृष्टिकोण जानने के लिए अपनी बैठकों में आमंत्रित कर सकता है।’
मंत्री ने कहा कि आईबीसी में रियल एस्टेट के 565 मामले दाखिल किए गए, मकानों के 1,62,320 खरीदारों के 111 मामलों का समाधान किया गया और 210 अन्य मामले अभी चल रहे हैं। सीतारमण ने कहा, ‘210 मामलों में 87 मामले ऐसे हैं, जो एनसीएलटी के समक्ष समाधान योजना की मंजूरी के लिए लंबित हैं। अगले कुछ महीनों में इन पर फैसला हो सकता है। घरों के करीब 50,000 खरीदारों को लाभ होगा।’
रियल एस्टेट से जुड़े 44 मामलों को परिसमापन में खत्म किया गया और 200 या तो वापस ले लिए गए, या बंद कर दिए गए।