पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध के ऊर्जा और आर्थिक मोर्चे पर पड़ने वाले प्रभावों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए), अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक के प्रमुखों ने समन्वय समूह बनाने और मिलकर काम करने का फैसला लिया है।
आईएमएफ ने एक बयान में कहा कि पश्चिम एशिया युद्ध ने क्षेत्र में आम जनजीवन और आजीविका को बुरी तरह प्रभावित किया है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अब तक का सबसे बड़ा आपूर्ति संकट पैदा हो गया है। आईएमएफ ने कहा कि इसका प्रभाव व्यापक है और यह अलग-अलग तरह से चोट पहुंचा रहा है, जो ऊर्जा आयातकों, विशेष रूप से निम्न-आय वाले देशों को बहुत प्रभावित कर रहा है।
इस संकट की वजह से पहले ही तेल, गैस और उर्वरकों की कीमतें बेतहाशा बढ़ चुकी हैं। खाद्य कीमतों के बारे में भी चिंताएं उभर रही हैं। हीलियम, फॉस्फेट, एल्यूमीनियम और अन्य वस्तुओं सहित वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर इसका सीधा असर दिखाई दे रहा है। साथ ही खाड़ी क्षेत्रों में हवाई यात्रा में व्यवधान आने से पर्यटन को भी तगड़ा झटका लगा है।
आईएमएफ ने कहा, ‘बाजार में अस्थिरता, उभरती अर्थव्यवस्थाओं में मुद्रा का कमजोर होना और मुद्रास्फीति को लेकर चिंताओं से सख्त मौद्रिक नीति और सुस्त वृद्धि की आशंका बढ़ गई है। व्यापक अनिश्चितता वाले इस दौर में जरूरी है कि हमारे संस्थान हालात पर नजर रखें और संकट से निपटने के लिए मिलकर काम करें।’
विभिन्न देशों और क्षेत्रों में ऊर्जा बाजारों और कीमतों, राजकोषीय एवं भुगतान संतुलन, मुद्रास्फीति, प्रमुख वस्तुओं के निर्यात पर प्रतिबंध और आपूर्ति श्रृंखला पर व्यवधान जैसी युद्ध से उपजी चुनौतियों का आकलन करने के लिए समूह समन्वित रूप से आंकड़े साझा करेगा, ताकि इसके प्रभावों की गंभीरता का आकलन किया जा सके।
यही नहीं, नीतिगत मोर्चे पर सलाह, संभावित वित्तीय जरूरतों का आकलन और वित्तीय सहायता के संबंधित प्रावधानों, जिसमें रियायतें और जोखिम शमन उपाय भी शामिल हैं, का उपयोग कर एक प्रतिक्रिया तंत्र बनाएगा। समूह जरूरतमंद देशों की मदद के लिए अन्य बहुपक्षीय, क्षेत्रीय और द्विपक्षीय भागीदारों सहित तमाम उचित हितधारकों को भी अपने साथ जोड़ेगा। तीनों संस्थानों ने कहा कि वे वैश्विक आर्थिक और वित्तीय स्थिरता की रक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और प्रभावित देशों एवं लोगों को मदद देने के लिए मिलकर काम करेंगे।