प्राकृतिक गैस और एलपीजी आपूर्ति में रुकावट की चिंताओं ने कुछ उद्योगों के कामकाज पर असर डालना शुरू कर दिया है, हालांकि उद्योग के कई अधिकारियों का कहना है कि अभी तक इसका असर बेहद सीमित ही है।
दो बड़े इस्पात उत्पादकों ने बताया कि गैस की किल्लत ने कुछ डाउनस्ट्रीम प्रोसेस पर असर डालना शुरू कर दिया है, हालांकि समस्या अभी बहुत अधिक नहीं है। उद्योग के एक अधिकारी ने कहा कि प्राकृतिक गैस या प्रोपेन का इस्तेमाल आमतौर पर भट्ठियों में होता है, जिसका मतलब है कि आपूर्ति की दिक्कतों से उत्पादन पूरी तरह बचा नहीं रह सकता।
अधिकारी ने कहा, ‘भट्ठी में प्राकृतिक गैस या प्रोपेन का इस्तेमाल होता है, इसलिए असर पड़ता है। अभी तक, यह बहुत ज्यादा नहीं है।’ हालांकि, छोटी इस्पात मिलों ने चेतावनी दी है कि अगर किल्लत बनी रही तो हालात और खराब हो सकते हैं। स्टील री-रोलिंग मिल्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन विवेक अदुकिया ने कहा कि एलपीजी भले ही मुख्य कच्चा माल न हो, लेकिन यह कुछ परिचालन प्रक्रियाओं के लिए यह जरूरी है।
अदुकिया ने कहा, ‘इंडक्शन फर्नेस ऑपरेटर जो बिलेट बनाते हैं, उन्हें लैंसिंग के लिए एलपीजी की जरूरत होती है। इसके बिना, उत्पादन चक्र पूरा नहीं हो सकता।’ उनके मुताबिक, ज्यादातर मिलों के पास अभी अगले कुछ दिनों तक काम करने के लिए काफी माल है। उन्होंने कहा, ‘अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो कुछ मिलों को बंद करना पड़ सकता है।’
पैकेज्ड फूड कंपनियों पर भी दबाव दिखने लगा है। उद्योग के अधिकारियों ने इस सप्ताह की शुरुआत में बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि कुछ निर्माताओं को कुछ राज्यों में मौजूद संयंत्रों में उत्पादन कम करना पड़ा है क्योंकि गैस आपूर्ति अभी भी कम है। इसके विपरीत, वाहन क्षेत्र पर अब तक गैस आपूर्ति की चिंताओं का ज्यादा असर नहीं पड़ा है।
उद्योग के जानकारों ने कहा कि कार निर्माता कंपनियां सामान्य तरीके से काम कर रही हैं और बदलती स्थिति पर करीब से नजर रख रही हैं। सूत्रों ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी यात्री वाहन निर्माता कंपनियों में से एक टाटा मोटर्स के परिचालन में अब तक कोई रुकावट नहीं आई है।
उद्योग के विश्लेषकों का भी कहना है कि वाहन निर्माण पर तुरंत असर कम ही रहेगा। प्राइमस पार्टनर्स के सलाहकार अनुराग सिंह ने कहा कि प्राकृतिक गैस की उपलब्धता को लेकर चिंताओं के बावजूद उत्पादन बिना किसी रुकावट के जारी रहा है। सिंह ने कहा, ‘अभी तक, वाहनों के उत्पादन में कोई रुकावट नहीं आई है। निर्माण के लिए जरूरी मुख्य कच्चे माल जैसे मेटल और पॉलिमर पर कोई असर नहीं पड़ा है। पॉलिमर मुख्य रूप से तेल से मिलते हैं और रिफाइनरी का काम जारी है, इसलिए गाड़ी बनाने के लिए बेसिक सप्लाई चेन बनी हुई है।’
कंपनियों के दफ्तर रख रहे हालात पर नजर
एलपीजी की किल्लत से उन कैटरिंग सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है जो बड़े कॉरपोरेट परिसरों को मदद करती हैं, खासकर आईटी कंपनियों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को। बेंगलूरु के फूड टेक्नॉलजी प्लेटफॉर्म हंगरबॉक्स ने कहा कि अभी परिचालन सामान्य बना हुआ है। कंपनी 243 ग्राहकों को सेवा मुहैया कराती है, 891 कैफेटेरिया का प्रबंधन करती है और 38 शहरों में 886 फूड पार्टनर्स के साथ काम करती है।
(साथ में अंजलि सिंह, ईशिता आयान दत्त, शिवानी शिंदे और शार्लीन डिसूजा)