चेन्नई की जीवन रेखा समझे जाने और अक्सर व्यस्त रहने वाले अन्ना सलाई मार्ग पर स्थित कॉस्मोपॉलिटन क्लब की अपनी अलग ही दुनिया रही है। यहां आने के बाद लगता है मानो वक्त थम सा गया है। कोरिंथियन स्तंभों से सजे इसके भव्य हॉल और बरामदे औपनिवेशिक काल की शान-शौकत की मिसाल पेश करते हैं। वास्तुकला की भव्यता के अलावा इस 153 साल पुराने क्लब ने द्रविड़ राजनीतिक आंदोलन की शुरुआत में भी अहम भूमिका निभाई थी।
मगर मौजूदा समय यानी 2026 में हालात कुछ बदले नजर आ रहे हैं। शहर का यह सबसे पुराना क्लब कोविड महामारी के बाद अपने समक्ष आए सबसे बड़े संकट से जूझ रहा है। तकरीबन 5,900 सदस्यों वाले इस क्लब के रेस्तरां में पश्चिम एशिया युद्ध के कारण खाना पकाने की गैस की भारी किल्लत हो गई है।
हालांकि, समय की कसौटी पर खरा उतरा यह क्लब अब इस संकट से निपटने के लिए तीन-सूत्री रणनीति अपना रहा है। इसके तहत यह कुछ चुनिंदा व्यंजनों के लिए लकड़ी की आग का इस्तेमाल, आंशिक रूप से बिजली की खपत और मेन्यू में बदलाव जैसे उपाय कर रहा है।
क्लब में पांच रेस्तरां और बैंक्वेट हॉल हैं जहां प्रतिदिन लगभग 400 लोग आते हैं। कॉस्मोपॉलिटन क्लब के अध्यक्ष संजय रामास्वामी ने कहा,‘एक अहम कदम यह था कि हमने खाना पकाने का काम कुछ हद तक पारंपरिक लकड़ी के चूल्हे पर करना शुरू कर दिया क्योंकि हमारे पास पर्याप्त खुली जगह उपलब्ध है। दरअसल क्लब के सदस्य इस बदलाव का आनंद ले रहे हैं और उनका कहना है कि लकड़ी के चूल्हे पर पका खाना ज़्यादा स्वादिष्ट होता है।’
स्टाफ कैंटीन अब पूरी तरह से लकड़ी के चूल्हे पर निर्भर है। रामास्वामी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया,‘साथ ही, हमने ऐसे व्यंजन भी आजमा रहे हैं जिन्हें डीप फ्रायर में पकाया जा सकता है। हमने ये खरीद भी लिए हैं। हमने इलेक्ट्रिक बर्नर का जखीरा भी बढ़ा दिया है। अन्य क्लबों की तरह हमने भी मेन्यू में उन व्यंजनों को कम कर दिया है जिनमें ज्यादा गैस की खपत होती है।’
कमी और जरूरत के बीच फंसे क्लब (चाहे पारंपरिक हों या लोकप्रिय) ईंधन की आपूर्ति में कमी से जूझ रहे हैं। मद्रास जिमखाना क्लब भी अपना रेस्तरां चालू रखने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है। मद्रास जिमखाना क्लब के अध्यक्ष एस शेषाद्रि ने कहा,’हमारे सामने कोई आपात स्थिति की नौबत नहीं आई है। हमारे पास पहले से ही कुछ इंडक्शन स्टोव मौजूद थे।’
हालांकि, इस क्लब ने कुछ पारंपरिक, तेल-प्रधान व्यंजन जैसे लाइव डोसा काउंटर और पूरियां परोसना बंद कर दिए हैं और पार्टी आदि का आयोजन भी काफी कम कर दिया है। शेषाद्रि ने आगे कहा,‘हमने रविवार की बिरयानी को लकड़ी की आग पर पकाना शुरू कर दिया है। हम निकट भविष्य में गैस से चलने वाले व्यंजनों को छोड़कर बाकी सभी व्यंजनों के लिए बिजली का उपयोग करने की योजना बना रहे हैं।’
भारत के दूसरे सबसे पुराने सामाजिक क्लब मद्रास क्लब ने संकट शुरू होते ही अपनी रसोई में तैयारी चाक-चौबंद कर ली थी। मद्रास क्लब के महाप्रबंधक सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर सुरेश कुमार वीएसएम ने कहा,‘हमने रसोई में वैकल्पिक व्यवस्था कर ली थी ताकि तरल पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) स्टोव के बजाय बिजली के चूल्हे का अधिक उपयोग हो सके। हमने मेन्यू में कटौती की है और लकड़ी जलाने और पकाने जैसे वैकल्पिक स्रोतों का उपयोग कर रहे हैं’।
डोसा और तले हुए व्यंजनों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। बेंगलूरु के बोरिंग इंस्टीट्यूट में डोसा परोसे जाने का काम पिछले सप्ताह रोक दिया गया था मगर कुछ दिनों बाद फिर से शुरू हो गया।
क्लब की रसोई को आम तौर पर भोजन और पेय पदार्थ परोसने के लिए प्रतिदिन लगभग नौ सिलिंडरों की आवश्यकता होती है मगर एलपीजी की कमी के कारण फिलहाल चार से छह सिलिंडरों से काम चल रहा है। क्लब के मानद सचिव श्रीकांत एच एस ने कहा,‘लगभग 1,800 रुपये में मिलने वाला सिलिंडर अब लगभग 4,000-5,000 रुपये में मिल रहा है।’
पिछले हफ्ते क्लब ने सदस्यों को एक नोटिस भेजा जिसमें कहा गया कि बैठकर खाने की सुविधा जारी रहेगी मगर खाने का मेन्यू सीमित कर दिया जाएगा। बिज़नेस स्टैंडर्ड ने यह नोटिस देखा जिसमें भोजन पैक करा कर ले जाने पर भी रोक लगा दी गई। थोक में खाना बनाने, पार्टी और भोज की बुकिंग निलंबित कर दी गई और सदस्यों से अनुरोध किया गया कि वे फिलहाल अपने साथ मेहमानों को न लाएं। श्रीकांत ने आगे कहा,‘हमने एहतियात के तौर पर एक पत्र भेजा था मगर लेकिन हम इसमें फिर ढील दे सकते हैं।
कोलकाता में ‘टॉली’ के नाम से मशहूर टॉलीगंज क्लब गैस की कमी से निपटने के लिए बिजली के उपकरणों पर अधिक निर्भर है। क्लब के मुख्य कार्याधिकारी ब्रिगेडियर वी गणपति (सेवानिवृत्त) ने कहा,‘हमारे पास पहले से ही बहुत उपकरण थे। हम बस उनका अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं।’
ये बदलाव मेन्यू तक भी विस्तारित हुए हैं जिसमें फिलहाल कुछ आइटम हटा दिए गए हैं। गणपति ने कहा, ‘हमने मेन्यू छोटा कर दिया है।’ उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि क्लबों के लिए कारोबार के लिहाज से यह समय भी सुस्त है।
कलकत्ता क्लब की अध्यक्ष कस्तूरी राहा ने कहा,‘यह मुश्किल है तो है मगर हम मौजूदा स्थिति से यथासंभव निपटने की कोशिश कर रहे हैं। हमने डाइनिंग हॉल में व्यंजन कम कर दिए हैं और अन्य आउटलेट ने भी ऐसा ही किया है।’
दक्षिण मुंबई के एक प्रमुख क्लब में भी यही कहानी दोहराई गई है जहां तीनों रेस्तरां खुले हैं मगर मेन्यू का आकार छोटा कर दिया गया है। लगभग सात दशक पुराना यह क्लब (जो खेल सुविधाओं और भोज सेवाओं की एक विस्तृत विकल्प प्रदान करता है) आंशिक रूप से प्रभावित हुआ है क्योंकि यह अभी भी पाइप गैस कनेक्शन के बजाय गैस सिलिंडरों पर निर्भर है।
प्रमुख खेल और मनोरंजन केंद्र मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन क्लब के एक सदस्य ने बताया कि चीनी रेस्तरां अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। सदस्य ने कहा,‘हमने पता करने की कोशिश की कि क्या सेवाओं पर कोई असर पड़ा है। चीनी रेस्तरां जरूर बंद है मगर सदस्य अन्य रेस्तरां में इसी तरह के व्यंजन प्राप्त कर सकते हैं।’
मुंबई के खार और बांद्रा में पाइप गैस कई प्रसिद्ध क्लबों के लिए जीवन रेखा बनकर उभरी है। सदस्यों में क्रिकेट, टेनिस, बिलियर्ड्स और तैराकी के खेल जगत की हस्तियां साथ ही फिल्म सितारे भी शामिल हैं।
90-95 साल पुराने क्लबों के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें बड़ी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ रहा है क्योंकि वे पाइप गैस कनेक्शन पर निर्भर हैं। दिल्ली गोल्फ क्लब के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उनके दो रेस्तरां पाइप प्राकृतिक गैस (पीएनजी) पर चलते हैं और इसलिए एलपीजी की कमी से प्रभावित नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा,‘हम परिचालन के लिए पूरी तरह तैयार हैं और किसी भी प्रकार की एलपीजी आपूर्ति में कमी आने की स्थिति में हमारे पास आकस्मिक योजनाएं हैं। मगर अब तक सब कुछ सामान्य रहा है।’
दिल्ली के सबसे पुराने क्लबों में से एक जिमखाना क्लब के सदस्यों को सेवाओं में किसी प्रकार की कटौती या मेन्यू में कोई बदलाव नहीं देखने को मिला है। मध्य दिल्ली में आयोजनों के प्रमुख केंद्र इंडिया इंटरनैशनल सेंटर के महासचिव कंवल वली ने बताया कि रसोई में एलपीजी का उपयोग सामान्य रूप से जारी है।
इंद्रप्रस्थ गैस ने समझ-बूझ के साथ गैस इस्तेमाल का सुझाव दिया है और सलाह जारी की है मगर सेवाओं के स्तर या भोजन की उपलब्धता में कोई बदलाव नहीं हुआ है। आयोजन भी लगातार जारी हैं और अब तक किसी के रद्द होने की सूचना नहीं मिली है।
भुवनेश्वर क्लब को बड़े फेरबदल करने पड़े हैं। यह क्लब व्यावसायिक एलपीजी सिलिंडरों पर निर्भर है। इसने अस्थायी रूप से पार्टी बुकिंग निलंबित कर दी है और रेस्तरां सेवाएं सीमित कर दी हैं। संचालन जारी रखने के लिए इंडक्शन स्टोव, माइक्रोवेव और पारंपरिक ‘काठ चूल्हा’ जैसे विकल्पों का उपयोग किया जा रहा है।
क्लब के सचिव ललित दास ने कहा,‘हमने इस चुनौती को भोजन एवं व्यंजनों के विशेष अनुभव में बदलने का प्रयास किया है। हम अपने ग्राहकों को पारंपरिक लकड़ी के चूल्हों पर तैयार किए गए व्यंजनों का स्वाद चखने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। ये व्यंजन अपनी विशिष्ट सुगंध और स्वाद के लिए जाने जाते हैं। सदस्य इन व्यंजनों के साथ एक नए अनुभव का आनंद ले सकते हैं।’ कुल मिलाकर, प्रतिबंधों का सामना करते हुए क्लब नए तरीके अपना रहे हैं और परिस्थितियों के अनुसार ढल रहे हैं।
(शाइन जेकब, अभीक दास, शिवानी शिंदे, विशाल छाबड़िया, गुलवीन औलख, हेमंत कुमार राउत और ईशिता आयान दत्त)