भारत और चिली के बीच प्रस्तावित समग्र आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) को लेकर बाधाएं आ रही हैं। एक सरकारी अधिकारी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि चिली के कुछ संवेदनशील वस्तुओं की भारत के बाजार में पहुंच की अब मांग उठाने से इस समझौते में बाधाएं खड़ी हो गई हैं।
अधिकारी ने बताया कि दोनों पक्ष ‘अड़चनों’ को सुलझाने और अक्टूबर तक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए उत्सुक हैं। अधिकारी ने कहा, ‘चिली ने सोना, सैल्मन, वाइन, सेब, अखरोट, एवोकाडो और कुछ अन्य फलों व बेरीज के लिए बाजार पहुंच की मांग की है।’
भारत फलों और वाइन पर कोटा या न्यूनतम आयात मूल्य तंत्र के माध्यम से रियायतें देने के लिए सहमत हो सकता है ताकि उनका लैंडिंग मूल्य घरेलू मूल्य से अधिक रहे। उधर चिली इन उत्पादों पर अधिकतम संभव रियायत चाहता है। अधिकारी ने बताया, चिली अपने देश के सीमा शुल्क की सूची में सूचीबद्ध 90 प्रतिशत उत्पादों पर भारत को शुल्क देने के लिए तैयार है जबकि भारत इस मामले में करीब 79 प्रतिशत उत्पादों पर शुल्क में कटौती देने के लिए तैयार है।
चिली दुनिया के शीर्ष पांच वाइन उत्पादकों में से एक है। लिहाजा चिली अपने इन उत्पादों के निर्यात के लिए सुरक्षित पहुंच का उत्सुक है। चिली में आम चुनाव और सरकार परिवर्तन ने भी व्यापार समझौते की बातचीत में देरी की। अधिकारी ने बताय कि चिली के राष्ट्रपति जोस एंटोनियो कास्ट के नेतृत्व वाली नई सरकार भी समझौते को अंतिम रूप देने में पूर्ववर्ती सरकार जितनी ही रुचि रखती है।