अपनी सूचीबद्ध भारतीय सहायक कंपनी से बाहर निकलने के कुछ महीने बाद नोवार्टिस ने देश में नई दवाओं के बाजार के प्रति अपनी कटिबद्धता को और मजबूत किया है। कंपनी ने एडवांस्ड प्रोस्टेट कैंसर के लिए भारत की पहली रेडियोलिगैंड थेरेपी पेश की है जिसे नियामक से मंजूरी मिली है। यह कदम इस स्विस दवा कंपनी की अगली पीढ़ी के इलाज की रणनीति में भारत की बढ़ती भूमिका बताता है।
प्लुविक्टो को ऐसे समय लॉन्च किया गया है, जब बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियां भारत में पेटेंट वाली दवाओं, प्रिसिशन ऑन्कोलॉजी और विशेष उपचारों पर तेजी से ध्यान केंद्रित कर रही हैं। दूसरी ओर घरेलू दवा विनिर्माता जेनेरिक, बायोसिमिलर और जटिल फॉर्मूलेशन में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं। विक्टो (लूटेशियम-177 विपीवोटाइड टेट्राजेटन) को उन मरीजों के लिए बनाया गया है, जिन्हें प्रोस्टेट-स्पेसिफिक मेम्ब्रेन एंटीजन (पीएसएमए)-पॉजिटिव मेटास्टेटिक प्रोस्टेट कैंसर है। इस थेरेपी में भारत में प्रोस्टेट कैंसर के मरीजों के इलाज के लिए बिल्कुल नया तरीका पेश किया गया है। इनमें से कई मरीजो में बीमारी का पता तब चलता है जब वह प्रोस्टेट से आगे फैल चुकी होती है।
इस लॉन्च से भारत के नाभिकीय चिकित्सा तंत्र की बढ़ती परिपक्वता भी जाहिर होती है। नोवार्टिस भारत में नाभिकीय चिकित्सा सुविधा के तेजी से विस्तार पर भी दांव लगा रही है। रेडियोलिगैंड थेरेपी के लिए रेडियोधर्मी दवाओं को संभालने के लिए विशेष सुविधाओं और प्रशिक्षित कर्मियों की जरूरत होती है। इस कारण कई उभरते बाजारों में इसका उपयोग सीमित हो जाता है। कंपनी का अनुमान है कि भारत में अब 250 से अधिक नाभिकीय चिकित्सा केंद्र हैं, जो बताता है कि चिकित्सा का यह तंत्र ऐसे स्तर पर पहुंच गया है जहां लक्ष्य के साथ आधुनिक विकिरण थेरेपी का व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन विशेषज्ञ आगाह करते हैं कि अभी कुछ समय तक इसकी उपलब्धता सीमित रहेगी।
मुंबई के सैफी हॉस्पिटल में न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. पराग आलंद ने कहा, ‘भारत में रेडियोलिगैंड थेरेपी अपनाने की प्रक्रिया अभी शुरुआती दौर में है। बुनियादी सुविधाएं सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। इन इलाज के लिए खास न्यूक्लियर मेडिसिन सुविधाओं की जरूरत होती है, जिनमें आइसोलेशन वार्ड और विकिरण सुरक्षा के कड़े नियम शामिल हैं।’
शुरुआत में प्लुविक्टो चुनिंदा अस्पतालों और न्यूक्लियर मेडिसिन केंद्रों पर उपलब्ध होगी। इसे स्पेन और इटली में नोवार्टिस की विनिर्माण इकाइयों से आयात किया जाएगा।
नोवार्टिस के अनुसार भारत में प्रोस्टेट कैंसर के सालाना लगभग 2,50,000 मामले आते हैं। इनमें से आधे से अधिक का पता एडवांस्ड स्टेज में लगता है जब उपचार के विकल्प और ज्यादा सीमित हो जाते हैं तथा नतीजे अच्छे नहीं होते हैं। प्रोस्टेट कैंसर अब देश में शहरी पुरुषों में तीन सबसे आम कैंसर में से एक है।
कीमोथेरेपी कैंसर कोशिकाओं और स्वस्थ कोशिकाओं दोनों को ही प्रभावित करती है। इसके विपरीत रेडियोलिगैंड थेरेपी कैंसर कोशिकाओं को ढूंढती है और सीधे उन तक ही विकिरण पहुंचाती है। यह उपचार एक लक्ष्यबद्ध अणु को रेडियोधर्मी आइसोटोप लूटेशियम-177 के साथ जोड़ता है। लक्ष्य वाला घटक पीएसएमए से जुड़ा होता है। यह कई प्रोस्टेट कैंसर कोशिकाओं पर बड़ी मात्रा में पाया जाने वाला प्रोटीन होता है। यह विकिरण को सीधे ट्यूमर तक पहुंच देता है जबकि आसपास के स्वस्थ ऊतकों तक इसका संपर्क सीमित रहता है।