दुनिया भर में पर्यटक रोमांच के साथ-साथ प्राकृतिक नजारों, ऐतिहासिक स्थलों को देखने और अलग-अलग जगहों के भोजन का स्वाद लेने के लिए यात्राएं करते हैं, लेकिन एशिया में स्थिति थोड़ी बदली हुई लगती है, यहां लोग धार्मिक स्थलों, परंपराओं का पालन करने और अध्यात्मिक केंद्रों को महत्त्व देते हैं। इनमें भी भारत सबसे आगे है।
ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म अगोडा की ताजा रिपोर्ट में यह रुझान सामने आएं हैं। वर्ष 2026 के लिए यात्रा रुझानों को रेखांकित करने वाली रिपोर्ट में एगोंडा ने कहा कि इस वर्ष आध्यात्मिक उद्देश्यों के लिए यात्रा करने वालों में एशिया में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक हो सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘लगभग पांच में से एक भारतीय पर्यटक यानी लगभग 19 फीसदी इस वर्ष आध्यात्मिक केंद्रों पर समय बिताना पसंद करेंगे। यह एशिया में सबसे अधिक है। इसके बाद इंडोनेशिया, मलेशिया, जापान और थाईलैंड के लोगों का नंबर है, जो सुकून के कीमती पल आध्यात्मिक स्थलों पर गुजारना चाहेंगे।’
पिछले साल महाकुंभ मेले के दौरान जनवरी और फरवरी के बीच प्लेटफॉर्म पर प्रयागराज में आवास खोज में 233 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई थी। इसके अलावा, इस वर्ष होली के दौरान मंदिरों में अनुष्ठान के लिए और मेला-उत्सव स्थलों पर जाने के लिए अधिक सर्च किए गए।
रिपोर्ट के अनुसार विश्व प्रसिद्ध पुष्कर मेला देखने जाने वालों की संख्या बढ़ने का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वहां आवास खोजों में 195 फीसदी की वृद्धि देखी गई है। वृंदावन जैसे धार्मिक स्थलों पर समय बिताने वाले भी बढ़ रहे हैं और इस धार्मिक शहर में आवास खोजने वालों की संख्या में 126 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि इसके बाद मथुरा में समय बिताने के लिए आवाज खोजने वालों में 109 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
अगोडा में भारत और हिंद महासागर द्वीपों के कंट्री डायरेक्टर गौरव मलिक ने कहा, ‘आध्यात्मिक केंद्र लंबे समय से भारत की यात्रा संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। अधिकांश लोग वहां जाना पसंद करते हैं।’