निवेश बैंकरों ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) से ब्लॉक डील ढांचे में अधिक लचीलेपन की मांग की है। बाजार नियामक ने ब्लॉक डील से संबधित ढांचे को पिछले साल संशोधित किया था। सूत्रों के अनुसार बैंकरों ने ब्लॉक डील विंडो के माध्यम से किए जाने वाले सौदों के लिए व्यापक मूल्य दायरे की मांग की है। वर्तमान ढांचा अक्टूबर 2025 में पेश किया गया था जब सेबी ने ब्लॉक डील के समय, न्यूनतम ऑर्डर आकार और मूल्य दायरे को नियंत्रित करने वाले नियमों को संशोधित किया था।
सूत्रों ने कहा कि कुछ निवेश बैंकरों ने सेबी से मूल्य दायरे को बढ़ाकर 5 फीसदी करने का आग्रह किया है। स्टॉक एक्सचेंज बड़े सौदों को एक ही लेनदेन में पूरा करने के लिए अलग विंडो मुहैया कराते हैं और इस तरह के सौदों को ब्लॉक डील कहा जाता है। निवेश बैंकर बड़े खरीदारों और विक्रेताओं के बीच ऐसे लेनदेन की संरचना और सुविधा प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
संशोधित नियमों के मुताबिक किसी ब्लॉक डील के लिए ऑर्डर का न्यूनतम आकार बढ़ाकर 25 करोड़ रुपये कर दिया गया था। सेबी ने ब्लॉक डील या बड़े सौदों के लिए अनुमत मूल्य सीमा को भी लागू संदर्भ मूल्य के 3 फीसदी तक बढ़ा दिया है, जो निगरानी उपायों और मूल्य दायरे पर निर्भर है। इस बदलाव से पहले, अनुमत मूल्य दायरा 1 फीसदी था।
घटनाक्रम के जानकार एक व्यक्ति ने कहा, ‘वर्तमान ढांचा खरीदारों के लिए अधिक फायदेमंद है और बिकवाल पक्ष की सौदेबाजी की क्षमता कम हो गई है। नियमित नकद बाजार में कारोबार की मात्रा मजबूत बने रहने के साथ, खरीदार ब्लॉक डील को पूर करने के लिए बड़ी छूट की मांग कर रहे हैं। उद्योग अभी भी यह पता लगा रहा है कि इस तरह के सौदों को पूरा करने का कोई और बेहतर तरीका है या नहीं। कई फंड मैनेजर नए ढांचे के अनुसार खुद को ढाल भी रहे हैं।’
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इस साल अभी तक विशेष विंडो पर 8,582 करोड़ रुपये के थोक सौदे हुए हैं जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 17,618 करोड़ रुपये था। बैंकरों ने यह भी संकेत दिया है कि वर्तमान ढांचे के तहत ब्लॉक डील की गतिविधियों में गिरावट बनी रह सकती है।
एक अन्य निवेश बैंकर ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया, ‘शेयर की कीमतों में इस समय काफी उठापटक देखा जा रहा है। ऐसी अस्थिरता के दौरान बड़ी छूट सौदों को सुगम बनाने में मदद कर सकती है। उदाहरण के लिए पात्र संस्थागत नियोजना (क्यूआईपी) ढांचा सेबी के फॉर्मूले द्वारा निर्धारित आधार मूल्य पर 5 फीसदी तक की छूट की अनुमति देता है। यदि ब्लॉक डील में अनुमत मूल्य भिन्नता अधिक है तो लेनदेन पूरा होने की संभावना बढ़ जाती है।’
इस बारे में जानकारी के लिए सेबी को ईमेल किया गया मगर खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं आया। हालांकि नियामन का अनुभव रखने वाले उद्योग के जानकारों का कहना है कि सेबी द्वारा निकट भविष्य में इस ढांचे में ढील दिए जाने की संभावना सीमित नजर आती है।
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उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हालिया बदलाव से पहले सेबी ने लंबे समय तक 1 फीसदी का पुराना मूल्य दायरा ही बनाए रखा था। ऐसे में इसकी संभावना कम ही है कि नियामक इतनी जल्दी इस ढांचे पर दोबारा विचार करेगा। इसके अलावा निगरानी और बाजार की निष्ठा के लिहाज से यह बेहतर है कि बड़े सौदे खुले बाजार में ही हों।’