भारत का विमानन क्षेत्र नई उथल-पुथल से जूझ रहा है। ईंधन की बढ़ती लागत,नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के मुफ्त सीटों से जुड़े दिशानिर्देश और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक संकट का अल्पावधि के आय परिदृश्य पर प्रभाव पड़ रहा है।
ऐस इक्विटी के आंकड़ों के अनुसार 2026 की शुरुआत से अब तक इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) और स्पाइसजेट के शेयरों में सेंसेक्स की 10 प्रतिशत की गिरावट के मुकाबले क्रमशः 13.97 प्रतिशत और 56.15 प्रतिशत की गिरावट आई है। विश्लेषकों का मानना है कि इन शेयरों के लिए सबसे बुरा दौर अभी खत्म नहीं हुआ है।
एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज के विश्लेषकों ने कहा, ‘ईरान युद्ध से बढ़ते तनाव ने पश्चिम एशिया के हवाई क्षेत्र के बड़े हिस्से को ‘नो-गो’ जोन बना दिया है। इस कारण उड़ानों को रद्द करना और कई सेवाओं का मार्ग बदलना पड़ा है। उड़ान के समय में वृद्धि, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण ईंधन की लागत में बढ़ोतरी अल्पावधि में एयरलाइनों के लाभ और मार्जिन पर भारी पड़ेगी।’
ईरान युद्ध की शुरुआत के बाद से एयरलाइन कंपनियों शेयरों में 18.9 प्रतिशत तक की गिरावट आई है, जबकि सेंसेक्स 5.64 प्रतिशत नीचे आया है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी इस क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। भले ही कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर से घटकर 100 डॉलर रह गई हों, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि भविष्य की दिशा के बारे में अभी कुछ बताना कठिन है।
इंडिगो और एयर इंडिया सहित कई एयरलाइनों ने अपनी ओर से विभिन्न मार्गों पर 400 से 16,600 रुपये तक के ईंधन शुल्क लागू किए हैं। लेकिन स्वतंत्र बाजार विश्लेषक अंबरीश बालिगा का मानना है कि ईंधन शुल्क तेल की कीमतों में पूरी बढ़ोतरी की भरपाई नहीं कर पाएगा, जिससे अल्पावधि में आय की संभावना पर असर आएगा।
विश्लेषकों ने चेताया है कि तेल की कीमतों में इतनी तेज वृद्धि वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के साथ साथ संभवतः वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भी मार्जिन पर असर डाल सकती है।
डीजीसीए ने बुधवार को एयरलाइनों से 60 प्रतिशत सीटों को अतिरिक्त शुल्क से मुक्त रखने के लिए कहा। इससे सीट का चुनाव करने पर कमाई की उनकी क्षमता सीमित हो गई है। विश्लेषकों का मानना है कि ये दिशानिर्देश एयरलाइनों के सहायक राजस्व को काफी हद तक कम कर सकते हैं, जो हाल के वर्षों में एयरलाइनों के मुनाफे में मददगार बन गया था।
एक निवेश रणनीति के रूप में विश्लेषक निवेशकों को ईरान युद्ध समाप्त होने तक इन शेयरों से बचने का सुझाव दे रहे हैं। खाड़ी क्षेत्र में कई अंतरराष्ट्रीय मार्ग, जो भारतीय वाहकों के लिए एक प्रमुख बाजार है, बाधित हो गए हैं। साथ ही, यात्रा सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता यात्रियों के मनोबल पर भारी पड़ने लगी है।
अंबरीश बालिगा ने कहा, ‘छुट्टियों के मौसम से पहले, विशेष रूप से लीजर ट्रैवल पर असर पड़ने की संभावना है।’
उन्होंने सुझाव दिया कि निवेशकों को फिलहाल इन शेयरों से बचना चाहिए क्योंकि वित्तीय प्रभाव अगली कुछ तिमाहियों में महसूस किया जा सकता है। वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज में इक्विटी निदेशक क्रांति बाथिनी ने कहा कि निवेशकों, विशेष रूप से अल्पावधि व्यापारियों को हालात सामान्य होने का इंतजार करना चाहिए।