लगातार छह दिनों की गिरावट के बाद सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) शेयरों में बुधवार को तेजी देखने को मिली। निफ्टी आईटी इंडेक्स 2.8 फीसदी चढ़कर 29,559 पर बंद हुआ। ब्रोकरेज फर्मों ने नवीनतम आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) टूल्स से पैदा हुए व्यवधान की चिंता को दूर करने की कोशिश की। इस कारण आईटी शेयरों में उछाल आई और निफ्टी आईटी इंडेक्स में शामिल सभी 10 शेयर हरे निशान में बंद हुए।
यह तेजी सूचकांक के लगभग तीन वर्षों के सबसे निचले स्तर पर बंद होने के एक दिन बाद आई। पिछले छह सत्रों में सूचकांक में 4.65 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए के यह कहने के बाद कि एंथ्रोपिक और ओपनएआई के नए एआई टूल लॉन्च किए जाने के बाद भारतीय आईटी सेवा फर्मों के नवीनीकरण अनुबंधों में कीमत का दबाव बढ़ने का कोई सबूत नहीं है, नए सिरे से उम्मीदें जगीं।
सीएलएसए ने एक नोट में कहा, टीसीएस, इन्फोसिस, एचसीएल टेक और विप्रो के साथ हमारी चर्चाओं में हमें नवीनतम एआई टूल्स के कारण नवीनीकरण अनुबंधों में बढ़ती अपस्फीति का कोई सबूत नहीं मिला है। इसमें कहा गया है कि प्रमुख क्षेत्रों में मांग के रुझान काफी हद तक बरकरार हैं और बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा (बीएफएसआई) क्षेत्रों में सकारात्मक रुझान जारी हैं।
ब्रोकरेज फर्म ने बताया कि कुछ कंपनियों ने ग्राहकों के निर्णय लेने में देरी की बात कही है, जिसका आंशिक कारण उद्यमों द्वारा नए एआई टूल्स की क्षमता का मूल्यांकन करना और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव है। लेकिन सौदों की संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं। सीएलएसए ने यह भी बताया कि पश्चिम एशिया में भारतीय आईटी फर्मों का प्रत्यक्ष कारोबार अभी एक ही अंक में है और इसका व्यापक प्रभाव मुद्रास्फीति, ब्याज दरें और वृद्धि जैसे व्यापक आर्थिक कारकों पर निर्भर करता है।
इसके अलावा, एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने कहा कि आईटी शेयरों में हाल में आई तेज गिरावट (पिछले तीन महीनों में करीब 25 फीसदी) इस आशंका के कारण थी कि जेनरेटिव एआई प्लेटफॉर्म पारंपरिक आईटी सेवाओं और सॉफ्टवेयर मॉडल में बाधा डाल सकते हैं।
लेकिन ब्रोकरेज फर्म ने तर्क दिया कि बड़े, नियमन वाले उद्यम परिवेशों में ऐसी प्रौद्योगिकियों को लागू करने की जटिलता निकट भविष्य में होने वाले व्यवधान को सीमित कर सकती है। ब्रोकरेज ने कहा, पुराने जटिल नियामकीय परिदृश्यों में इन अप्रमाणित प्रौद्योगिकियों को लागू करना प्रचार से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण है।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज का अनुमान है कि एआई के कारण कीमतों पर पड़ने वाला दबाव पहले के अनुमानों (करीब 4 फीसदी) से बढ़कर 6-7 फीसदी तक हो सकता है, मगर उसका यह भी मानना है कि नए सौदों से समय के साथ यह दबाव संतुलित हो जाएगा। कंपनी का कहना है कि आईटी सेवाओं का मॉडल मजबूत बना हुआ है और जेनरेटिव एआई से लंबी अवधि में बड़ा अवसर मिलने की उम्मीद है।
ब्रोकरेज फर्म ने यह भी बताया कि वैल्यूएशन कोविड-पूर्व स्तर पर आ गए हैं और प्रथम श्रेणी की आईटी कंपनियां अब अपने 10 वर्षीय औसत मल्टीपल से कम कीमत पर कारोबार कर रही हैं।