पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। तेल कंपनियां अपने ग्राहकों को तेल और गैस आपूर्ति करने में लाचार हैं। ऐसे में हर्जाने से बचने के लिए वे फोर्स मैज्योर क्लॉज का सहारा लेने को मजबूर हो रही हैं। पेट्रोनेट एलएनजी और कतरएनर्जी जैसी प्रमुख प्राकृतिक गैस आपूर्तिकर्ता कंपनियों ने अपने ग्राहकों को द्रवित प्राकृतिक गैस की आपूर्ति करने में असमर्थता के संबंध में ‘फोर्स मैज्योर’ क्लॉज का सहारा लिया है।
गैस की किल्लत से भारत भी प्रभावित हुआ है और यहां कई रेस्तरां बंद हो गए हैं। घरेलू गैस की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। इसके अलावा, बड़े पैमाने पर प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल करने वाले उर्वरक उद्योग के समक्ष भी युद्ध की वजह से गैस का संकट पैदा हो गया है।
भारत का एलएनजी आयात पिछले दशक में दोगुने से अधिक हो गया है, जो वित्त वर्ष 17 में 6 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 25 में लगभग 15 अरब डॉलर हो गया है। कतर भारत का सबसे बड़ा एलएनजी आपूर्तिकर्ता था। वित्त वर्ष 17 में हमारे कुल आयात में उसकी हिस्सेदारी 56.83 प्रतिशत थी, जो वित्त वर्ष 25 में घटकर 42.91 प्रतिशत रह गई है। हाल के वर्षों में अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात की हिस्सेदारी बढ़ी है।
भारत में प्राकृतिक गैस की खपत पिछले दशक में लगातार बढ़ी है। लेकिन बढ़ती मांग की अधिकांश पूर्ति आयात से की जा रही है। वित्त वर्ष 26 (अप्रैल-दिसंबर) में देश के कुल उपभोग में प्राकृतिक गैस की सबसे अधिक 28.57 प्रतिशत खपत उर्वरक उद्योग में दर्ज की गई है।