लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने निष्पक्षता और नियमों के अनुरूप सदन की कार्यवाही संचालित करने का प्रयास किया है तथा किसी भी सदस्य को नियमों से परे जाकर बोलने का विशेषाधिकार नहीं है। बिरला ने विपक्ष द्वारा उनके खिलाफ लाए गए संकल्प को सदन द्वारा अस्वीकार किए जाने पर सदस्यों का आभार व्यक्त किया और कहा कि वह पूरी निष्ठा और संवैधानिक मर्यादा के साथ जिम्मेदारी निभाने का प्रयास करेंगे।
बिरला ने कहा, ‘उन्होंने हमेशा यह प्रयास किया है कि सदन के अंदर प्रत्येक सदस्य नियमों और प्रक्रियाओं के तहत अपने मुद्दों पर विचार व्यक्त करे और सभी को इसके लिए पर्याप्त अवसर मिले।’
लोक सभा अध्यक्ष ने कहा, ‘मैंने दोनों कार्यकाल में उन सभी माननीय सदस्यों से बोलने का आग्रह किया, जिन्होंने सदन में एक बार भी नहीं बोला। क्योंकि इस सदन में बोलने से लोकतंत्र का संकल्प और मजबूत होता है और सरकार की जवाबदेही भी तय होती है।’
बिरला का कहना था, ‘मैंने हमेशा यह प्रयास किया है कि सदन की कार्यवाही निष्पक्षता, अनुशासन, संतुलन और नियमों के साथ संचालित हो। सदन में सभी को साथ लेकर सामन्जस्य से व्यवस्था एवं कार्यकुशलता बनाये रखना अध्यक्ष का मुख्य कार्य है। मेरा हमेशा यह प्रयास रहता है कि सदन की गरिमा, मर्यादा और प्रतिष्ठा में उत्तरोत्तर वृद्धि होती रहे।’
बिरला ने कहा, ‘चर्चा के दौरान कुछ माननीय सदस्यों ने कहा कि प्रतिपक्ष के नेता को बोलने से रोका जाता है और उन्हें बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जाता है। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि चाहे सदन के नेता हों, नेता प्रतिपक्ष हों, मंत्री या अन्य कोई सदस्य, सभी को सदन के नियमों के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए ही बोलने का अधिकार मिलता है।’
दूसरी ओर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोक सभा में कांग्रेस सदस्यों को कड़े शब्दों में संदेश दिया कि वे मुद्दा उठा कर सदन से भाग नहीं सकते और मंत्री का जवाब सुनने के लिए उन्हें यहां बैठना होगा। कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई और के. सुरेश की कुछ टिप्पणियों के बाद वित्त मंत्री ने यह बात कही।