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तेल में उबाल से बाजार बेहाल; सेंसेक्स 2,497 अंक लुढ़का, निफ्टी में 776 अंक की गिरावट

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कच्चे तेल की कीमतों में आई नई तेजी ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया जिससे बेंचमार्क सूचकांकों में लगभग दो वर्षों की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई

Last Updated- March 19, 2026 | 10:49 PM IST
IT Stock Crash
फोटो: एआई जनरेटेड

प​श्चिम ए​शिया में जारी युद्ध के प्रभाव से मुद्रास्फीति बढ़ने और आर्थिक वृद्धि को नुकसान पहुंचने की आशंकाओं के बीच भारतीय शेयर बाजार में आज जबरदस्त गिरावट आई। कच्चे तेल की कीमतों में आई नई तेजी ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया जिससे बेंचमार्क सूचकांकों में लगभग दो वर्षों की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

बीएसई सेंसेक्स आज 2,497 अंक या 3.3 फीसदी की गिरावट के साथ 74,207 पर बंद हुआ। एनएसई निफ्टी भी 776 अंक या 3.3 फीसदी लुढ़ककर 23,002 पर बंद हुआ। दोनों सूचकांकों ने 4 जून, 2024 के बाद अपनी सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की।

बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण में आज 13 लाख करोड़ रुपये की कमी आई और वह 426.1 लाख करोड़ रुपये रह गया। ईरान युद्ध की शुरुआत के बाद से सेंसेक्स में 8.7 फीसदी और निफ्टी में 8.6 फीसदी की गिरावट आई है। इस दौरान कुल बाजार पूंजीकरण को 37.4 लाख करोड़ रुपये की चपत लगी है।

शेयर बाजार में आज की बिकवाली ऐसे समय में शुरू हई जब प​श्चिम ए​शिया के कुछ सबसे महत्त्वपूर्ण ऊर्जा केंद्रों पर किए गए हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आई। ब्रेंट क्रूड गुरुवार को 2 फीसदी बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। युद्ध की शुरुआत से कच्चे तेल की कीमतों में 49 फीसदी की वृद्धि हो चुकी है।

सऊदी अरब ने गुरुवार को लाल सागर के समीप सैमरेफ रिफाइनरी पर ड्रोन हमले की सूचना दी। यह हमला दक्षिण पार्स गैस क्षेत्र पर इजरायल द्वारा किए गए हमले के बाद किया गया।

भारत कच्चे तेल की अपनी अधिकांश जरूरतें आयात के जरिये पूरी करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि होने से भारत में मुद्रास्फीति बढ़ जाती है और आर्थिक वृद्धि को झटका लगता है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के अनुसंधान प्रमुख (परिसंप​त्ति प्रबंधन) सिद्धार्थ खेमका ने कहा, ‘प​श्चिम ए​शिया का संघर्ष तेजी से ऊर्जा युद्ध का रूप ले रहा है जहां दोनों पक्षों द्वारा अहम बुनियादी ढांचों किए जा रहे हमलों से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से वृद्धि हो रही है। इससे निवेशकों का विश्वास डगमगा गया है। आगे बाजार बेहद नाजुक दौर में पहुंचता दिख रहा है जहां भावनाएं भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और कच्चे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि से प्रेरित हो रही हैं। पश्चिम एशिया में ऊर्जा बुनियादी ढांचे के आसपास तनाव के मद्देनजर लघु अवधि में हम बाजार के प्रति सतर्क हैं और उम्मीद करते हैं कि उतार-चढ़ाव की ​स्थिति आगे भी बनी रहेगी।’

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First Published - March 19, 2026 | 10:44 PM IST

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