भारत में यात्री वाहनों के निर्यात में काफी मजबूती दिख रही है। वित्त वर्ष 26 में देश से किए गए कुल 9,05,200 यात्री वाहनों के निर्यात में दो वैश्विक कार विनिर्माताओं – मारुति सुजूकी इंडिया और ह्युंडै मोटर इंडिया की संयुक्त रूप से 70.03 प्रतिशत हिस्सेदारी रही। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सायम) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 25 के दौरान वाहनों के कुल निर्यात में उनकी हिस्सेदारी 64.05 प्रतिशत पर काफी कम रही।
अगर तीसरी सबसे बड़ी यात्री वाहन निर्यातक निसान इंडिया को भी इन आंकड़ों में शामिल कर लिया जाए, तो वित्त वर्ष 26 के दौरान देश से कुल यात्री वाहनों के निर्यात में इन तीनों विदेशी कंपनियों की संयुक्त हिस्सेदारी 80 प्रतिशत रही। वित्त वर्ष 25 के दौरान यात्री वाहनों के निर्यात में इन तीनों कार विनिर्माताओं की कुल हिस्सेदारी 73 प्रतिशत थी।
इसके एकदम उलट अग्रणी देसी यात्री वाहन विनिर्माता टाटा मोटर्स और महिंद्रा ऐंड महिंद्रा (एमऐंडएम) विदेशी प्रतिस्पर्धियों से पीछे रहीं। वित्त वर्ष 26 में यात्री वाहनों के निर्यात में उनकी हिस्सेदारी मात्र 3.2 प्रतिशत रही। दोनों कंपनियों ने संयुक्त रूप से 29,072 यात्री वाहनों की निर्यात किया, जो वित्त वर्ष 26 के दौरान किया मोटर्स इंडिया के 27,953 वाहन निर्यात से कुछ ही अधिक है। निश्चित रूप से इसमें पिछले वित्त वर्ष की तुलना में मामूली बढ़ोतरी हुई है। उस साल कुल यात्री वाहन निर्यात में टाटा मोटर्स और एमऐंडएम की हिस्सेदारी केवल 2.4 प्रतिशत थी।
निर्यात में इस बड़ी मजबूती की अगुआई मारुति सुजूकी इंडिया ने की। उसने वित्त वर्ष 26 के दौरान निर्यात में 34.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। उसने वित्त वर्ष 25 में 3,30,081 यात्री वाहनों का निर्यात किया था, जो वित्त वर्ष 26 में 4,43,825 वाहन निर्यात के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। वित्त वर्ष 26 में ह्युंडै इंडिया का कार निर्यात 16.36 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1,90,725 तक पहुंच गया, जबकि निसान इंडिया का निर्यात 15.5 प्रतिशत बढ़कर 84,408 हो गया। नतीजतन समूचा यात्री वाहन निर्यात वित्त वर्ष 26 में सालाना आधार पर लगभग 15 प्रतिशत बढ़ा।
इन विपरीत आंकड़ों को सरकार की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत यात्री इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के बड़े प्रयासों की पृष्ठभूमि में देखा जाना चाहिए, जो पहले से ही ईवी विनिर्माताओं को खासा प्रोत्साहन दे रही है।
ये आंकड़े सतर्कता की वजह भी दे रहे हैं। जापान की कार विनिर्माता होंडा मोटर्स जैसी वैश्विक कंपनियां देश से निर्यात में कटौती कर रही हैं। होंडा कार्स इंडिया ने निर्यात में तेज गिरावट दर्ज की। उसका वित्त वर्ष 25 में 60,229 वाहन निर्यात की तुलना में वित्त वर्ष 26 में 26,485 वाहन निर्यात रहा। जर्मन कार विनिर्माता फोक्सवैगन इंडिया ने भी देश से अपने निर्यात में मामूली कमी की है। वह यात्री वाहनों की लगातार निर्यातक रही है।
वित्त वर्ष 26 में भारत से निर्यात हुए प्रमुख कार मॉडल में मारुति सुजूकी ब्रेजा (1,63,000) और बलेनो (1,59,000), यूरोप को निर्यात की गई ई-विटारा इलेक्ट्रिक एसयूवी (62,886) तथा छोटी कारें ऑल्टो और स्प्रेसो (45,934) शामिल हैं। ह्युंडै इंडिया के शीर्ष निर्यात में आई10, आई20, ऑरा और ग्रैंड (संयुक्त रूप से 1,00,000) और वेरना सिडैन (63,044) शामिल रहीं। निसान के शीर्ष निर्यात मॉडल में सनी सिडैन (25,696) शामिल थी।