मैकलॉयड रसेल इंडिया ने असम में अपने तीन चाय बागान बेचने पर सहमति जताई है। ये बागान नैशनल ऐसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (एनएआरसीएल) की ओर से जारी स्वीकृति पत्र से जुड़ी ऋण समाधान योजना के तहत बेचे जाएंगे।
चाय उत्पादक कंपनी के बोर्ड ने सोमवार को संभावित खरीदारों के साथ समझौतों को लागू करने की मंजूरी दे दी, ताकि कर्ज के आंशिक भुगतान में आसानी हो सके। ये सहमति पत्र उचित जांच-पड़ताल और नियामकीय मंजूरी के अधीन हैं।
नियामक को भेजी जानकारी के अनुसार न्या गोगरा टी एस्टेट को बंगाल टी ऐंड फैब्रिक्स लिमिटेड को 44.79 करोड़ रुपये में बेचा जाएगा, जबकि रूपाजुली टी एस्टेट 16.76 करोड़ रुपये में खोना टी एस्टेट एलएलपी को दिया जाएगा। बोरोई टी एस्टेट की बिक्री जातिंगा एग्रो-टेक को 27.30 करोड़ रुपये में की जाएगी।
मैकलॉयड रसेल के अधिकारियों ने कहा कि सहमति पत्रों का मकसद चाय का सीजन जोर पकड़ने से पहले ही लेनदेन पक्का करना है, क्योंकि उसके बाद संभावित खरीदारों के लिए अधिग्रहण का मूल्यांकन करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा, ‘अभी तो बाजार बस खुला ही है।’
सहमति पत्रों पर दस्तखत कंपनी द्वारा 9 अप्रैल को एनएआरसीएल के कर्ज पुनर्गठन वाले प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद हुए हैं। इस कदम से आठ साल से चली आ रही रुकावट खत्म हो गई है। इस पत्र के मुताबिक मैकलॉयड रसेल को 15 फरवरी, 2029 तक या उससे पहले एनएआरसीएल को कर्ज के भुगतान तौर पर 1,050 करोड़ रुपये चुकाने होंगे।
पुनर्गठन पैकेज के हिस्से के तौर पर एनएआरसीएल को मैकलॉयड रसेल के 10 प्रतिशत नए इक्विटी शेयर पूरी तरह से डाइल्यूटेड आधार पर मिलेंगे। ये शेयर, कंपनी के ऐसे कर्ज को इक्विटी में बदलने और प्रवर्तक शेयरधारिता को गिरवी रखने के बदले दिए जाएंगे, जिसे चुकाना संभव नहीं है।