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भारत में माइक्रो ड्रामा बाजार का तेजी से विस्तार, 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान

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माइक्रो ड्रामा की पेशकश करने वाले प्लेटफार्मों ने ओटीटी के 68 करोड़ की तुलना में 45 करोड़ डाउनलोड दर्ज किए हैं।

Last Updated- March 26, 2026 | 9:50 AM IST
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भारत का माइक्रो ड्रामा बाजार बहुत तेजी से विस्तार कर रहा है और आने वाले वक्त में यह मनोरंजन का सबसे तेजी से फैलता हुआ फॉर्मेट बन जाएगा। एक रिपोर्ट के अनुसार 30 सेकंड से 3 मिनट के मनोरंजन वीडियो वाले इस बाजार के 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक बढ़ने की उम्मीद है। वर्तमान में इसका आकार 30 करोड़ डॉलर है।

लूमिकाई की ‘स्टेट ऑफ इंडिया इंटरैक्टिव मीडिया रिपोर्ट 2025’ के अनुसार, यह श्रेणी ओवर-द-टॉप (ओटीटी) प्लेटफॉर्मों के लिए प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभर रही है, जिसके मासिक सक्रिय उपयोगकर्ता 10 करोड़ हैं, जबकि ओटीटी के 45 करोड़ हैं।

माइक्रो ड्रामा मोबाइल पर आसानी से देखने के लिए डिजाइन की गई छोटी, क्रमबद्ध, वर्टिकल वीडियो कहानियां होती हैं, जिनमें उच्च-तीव्रता वाले हुक और क्लिफ-हैंगर होते हैं। ये कहानियां 30 सेकंड से 3 मिनट तक की हो सकती हैं।

माइक्रो ड्रामा की पेशकश करने वाले प्लेटफार्मों ने ओटीटी के 68 करोड़ की तुलना में 45 करोड़ डाउनलोड दर्ज किए हैं। माइक्रो ड्रामा प्लेटफॉर्म जहां सक्रिय उपयोगकर्ताओं और डाउनलोड के मामले में काफी आगे हैं, वहीं ओटीटी

मोनेटाइजेशन के मोर्चे पर बढ़त बनाए हुए हैं। माइक्रो ड्रामा मंचों पर 1.7 करोड़ उपयोगकर्ता ऐसे हैं, जो भुगतान करके इस मनोरंजन क्लिप या शॉर्ट्स देखते हैं और इनका प्रति उपयोगकर्ता औसत राजस्व 15 डॉलर है। इसकी तुलना में ओटीटी पर भुगतान करने वाले उपयोगकर्ताओं की संख्या 13.3 करोड़ हैं, जिनका प्रति उपयोगकर्ता औसत राजस्व 35 डॉलर है। निश्चित रूप से माइक्रो ड्रामा देश के इंटरैक्टिव मीडिया परिदृश्य में अभी नया है, लेकिन आने वाले समय में यह बहुत प्रभावी साबित हो सकता है।

लूमिकाई के संस्थापक और प्रबंध भागीदार सलोने सहगल ने कहा कि माइक्रो ड्रामा श्रेणी की सफलता सामग्री की गुणवत्ता, वितरण और खोजे जाने की क्षमता के साथ-साथ कई अन्य तत्वों पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा, ‘यह सामग्री की गुणवत्ता, जो आईपी है, सामग्री की गति यानी आप कितनी तेजी से सामग्री का उत्पादन कर पाते हैं, वितरण, प्रदर्शन विपणन के माध्यम से खोजे जाने की क्षमता होनी चाहिए। साथ ही, यह देखना भी महत्त्वपूर्ण है कि वर्तमान सांस्कृतिक रुझानों के साथ क्या काम करता है।’

रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल सरकार द्वारा देश में रियल मनी गेमिंग पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद इस क्षेत्र में सक्रिय हर तीसरा उपयोगकर्ता विदेशी प्लेटफार्मों पर चला गया, जहां ये हर माह लगभग 10,000 रुपये से अधिक खर्च करते हैं। सहगल ने यह भी कहा, ‘वर्तमान में कुछ लोग केवल समय बिताने तो कई पैसा खर्च कर और पैसा कमाने के उद्देश्य से प्लेटफार्म बदल रहे हैं। अनेक लोग सिर्फ अपना खाली समय बिताने के लिए माइक्रो ड्रामा, संगीत स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया, फ्री-टू-प्ले गेम की ओर मुड़ रहे हैं।’

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First Published - March 26, 2026 | 9:50 AM IST

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