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1 जून से नया नियम लागू: अब विदेशी सेल नहीं, सिर्फ भारतीय सेल से बने सोलर मॉड्यूल ही मान्य

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1 जून से सौर परियोजनाओं में घरेलू सेल का उपयोग अनिवार्य हो गया है, जिससे उद्योग में समर्थन और चिंता दोनों देखने को मिल रही हैं।

Last Updated- June 01, 2026 | 9:10 AM IST
Solar Energy
Representative image

अक्षय ऊर्जा डेवलपरों को अब ऐसे सोलर मॉड्यूल का इस्तेमाल करना होगा, जिनमें घरेलू विनिर्मित सेल का इस्तेमाल किया गया हो। सोमवार 1 जून, 2026 या उसके बाद  चालू होने वाली सभी नेट-मीटरिंग परियोजनाओं और ओपन एक्सेस आरई पावर परियोजनाओं को अनिवार्य रूप से अप्रूव्ड लिस्ट ऑफ मॉडल्स ऐंड मैन्युफैक्चरर्स  लिस्ट-1 से सौर पीवी मॉड्यूल और एएलएमएम लिस्ट-2 से सौर पीवी सेल प्राप्त करने होंगे।

हालांकि जिन परियोजनाओं के लिए सौर मॉड्यूल पहले ही साइट पर पहुंच चुके हैं, इंस्टॉलेशन पूरा हो गया है लेकिन अभी तक चालू नहीं हुए हैं, या जहां डेवलपर्स ने परियोजनाओं की ग्राउंडिंग शुरू कर दी है, वहां पहले से किए गए निवेश की सुरक्षा के लिए और वक्त की अनुमति दी जा सकती है। यह सरकारी निर्णय उद्योग प्रतिनिधियों द्वारा और समय दिए जाने के अनुरोध के बाद आया है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने कहा, ‘ऐसे मामलों पर, डेवलपर्स द्वारा प्रदान की गई सहायक जानकारी/दस्तावेजी प्रमाणों के वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन के बाद, पारदर्शी तरीके से, उचित समय विस्तार के लिए विचार किया जा सकता है।’

सीएसईपी के एसोसिएट फेलो रोहित विजय के अनुसार, वाणिज्यिक और औद्योगिक (सीऐंडआई) और ओपन-एक्सेस डेवलपरों को चुनौतियों का सामना तत्काल करना पड़ेगा। उन्होंने कहा, ‘इनमें से कई परियोजनाएं भूमि की सीमित उपलब्धता से अधिकतम ऊर्जा उत्पादन के लिए उच्च-दक्षता वाले टॉपकॉन तकनीक पर निर्भर हैं। जिन परियोजनाओं पर पहले से काम चल रहा है, उनके लिए इस स्तर पर प्रौद्योगिकी या खरीद योजनाओं को बदलना अक्सर व्यावहारिक नहीं होता है।’ उन्होंने यह भी जोड़ा कि कुछ डेवलपरों को बढ़ी परियोजना लागत से जूझना पड़ सकता है और इसकी वजह से शुल्क में 30 से 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि हो सकती है।’

उद्योग के अग्रणी लोग  सरकार के फैसले पर बंटे हुए हैं। जहां कुछ का कहना है कि एक व्यापक विस्तार की आवश्यकता थी, वहीं अन्य की राय है कि किसी भी विस्तार की आवश्यकता नहीं है क्योंकि देश के पास पर्याप्त क्षमता है। एंपिन एनर्जी ट्रांजिशन के संस्थापक, एमडी और सीईओ पिनाकी भट्टाचार्य ने कहा, ‘ईरान युद्ध के कारण गैस और डीजल ईंधन की कमी की वजह से निर्माण धीमा पड़ गया है। ऐसे में वाणिज्यिक और औद्योगिक परियोजनाओं को मानदंडों का पालन करने के लिए दो महीने का एक व्यापक विस्तार मिलना चाहिए। यह एक अप्रत्याशित घटना (फोर्स मेजर) की स्थिति थी। अन्यथा, हम मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने वाले एएलसीएम विनियमन का समर्थन करते हैं।’ प्रीमियर एनर्जीज के सीबीओ विनय रुस्तगी ने कहा, ‘हमारे पास पर्याप्त सेल क्षमता है और अगले 12 महीनों में और भी आने वाली है।’ उन्होंने कहा, ‘विनिर्माताओं के लिए, नीति की समय-सीमा की सरकार की पुष्टि बड़ी राहत है।

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First Published - June 1, 2026 | 9:10 AM IST

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