राष्ट्रीय खनिक विकास निगम (एनएमडीसी) अगले तीन वर्षों में करीब 40,000 करोड़ रुपये से 50,000 करोड़ रुपये तक की निवेश करने की योजना बना रहा है। इसके तहत उत्पादन क्षमता बढ़ाने, कोयला खनन में विस्तार और भारत व विदेश में महत्त्वपूर्ण खनिज के अवसरों का लाभ शामिल है।
एनएमडीसी के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक अमिताभ मुखर्जी ने परिणाम घोषित करने के कार्यक्रम में बताया, ‘हमें अपनी वांछित 10 करोड़ टन क्षमता स्तर तक पहुंचने के लिए अगले तीन वर्षों के भीतर इस 40,000 करोड़ रुपये से 50,000 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे।’
कंपनी को वित्त वर्ष 27 में लगभग 6,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय की उम्मीद है, फिर यह 9,000 करोड़ रुपये से 10,000 करोड़ रुपये सालाना तक बढ़ जाएगी। इसका कारण यह है कि विस्तार परियोजनाएं तेजी से पूरी की जाएंगी।
मुखर्जी ने कहा कि कंपनी विदेशी खनिज अधिग्रहण के लिए प्रयासरत है। उन्हें चालू वित्त वर्ष के दौरान विदेशों में संपत्ति के अधिग्रहण पर 2,000 -3,000 करोड़ रुपये खर्च करने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, ‘उनमें से कुछ अधिग्रहण के बहुत उन्नत चरणों में हैं।’ गोपनीयता समझौतों के कारण विवरण का खुलासा नहीं किया जा सकता। एनएमडीसी ने विविधीकरण रणनीति के हिस्से के रूप में झारखंड में टोकीसुद कोयला ब्लॉक को चालू कर दिया है और दूसरी तिमाही के दौरान कोयला खनन शुरू होने की उम्मीद है। कंपनी लंबित स्वीकृतियों के तहत तीसरी तिमाही के अंत तक रोहने कोकिंग कोल ब्लॉक खोलने का भी लक्ष्य बना रही है। मुखर्जी के अनुसार तीन साल के दरमियान कोयला व्यवसाय सालाना 5,000 करोड़ रुपये से 8,000 करोड़ रुपये का राजस्व देगा।
कंपनी ने रेयर अर्थ और महत्त्वपूर्ण खनिजों पर ध्यान केंद्रित करने वाली समर्पित सहायक कंपनी भी स्थापित की है और यह सक्रिय रूप से विदेशी अवसरों की तलाश कर रही है।
प्रबंधन ने कहा कि उसने गुजरात मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के साथ एक दुर्लभ पृथ्वी परियोजना के लिए एक समझौते में प्रवेश किया है और विश्व स्तर पर अतिरिक्त संपत्तियों का मूल्यांकन कर रहा है।
एनएमडीसी के बोर्ड ने विशाखापत्तनम में एक ब्लेंडिंग यार्ड विकसित करने के लिए लगभग 3,000 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी है।