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द्विपक्षीय अधिकारों में संरक्षणवाद किसी के लिए भी अच्छा नहीं: एतिहाद एयरवेज के सीईओ

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भारत और अबू धाबी के बीच द्विपक्षीय हवाई सेवा समझौता प्रत्येक पक्ष की विमानन कंपनियों के लिए 50,000 साप्ताहिक सीटों की उपलब्धता देता है।

Last Updated- January 29, 2026 | 8:48 AM IST

द्विपक्षीय अधिकारों में संरक्षणवाद विमानन क्षेत्र में किसी के लिए भी अच्छा नहीं है। भारतीय विमानन कंपनियों को प्रतिस्पर्धा से भी डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि वे ‘काफी अच्छा’ प्रदर्शन कर रही हैं। अबू धाबी की एतिहाद एयरवेज के मुख्य कार्य अधिकारी (CEO) एंटोनोआल्डो नेव्स ने आज यह बात कही। भारत संयुक्त अरब अमीरात और कतर के साथ द्विपक्षीय उड़ान अधिकारों का विस्तार करने का इच्छुक नहीं है। इसकी वजह यह है कि दुबई और दोहा जैसे पश्चिम एशिया के हब मुख्य रूप से उत्तर अमेरिका और यूरोप जाने वाले भारतीय यात्रियों के लिए काफी हद तक ट्रांजिट पॉइंट का काम करते हैं। भारतीय विमानन कंपनियों ने इस पर चिंता व्यक्त की है क्योंकि वे वाइड-बॉडी विमान शामिल कर रही हैं और नॉन-स्टॉप लंबी दूरी की उड़ानों को बढ़ा रही हैं।

दूसरी तरफ अदाणी एयरपोर्ट्स होल्डिंग्स जैसे हवाईअड्डा परिचालकों ने सरकार को बताया है कि प्रमुख भारतीय हवाईअड्डों के साथ-साथ नवी मुंबई और नोएडा जैसे नए हवाई अड्डों पर जोड़ी जा रही बड़ी क्षमताओं का पूरी तरह उपयोग करने के लिए द्विपक्षीय अधिकारों का विस्तार करना आवश्यक है।

विंग्स इंडिया 2026 शिखर सम्मेलन में बिजनेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में नेव्स ने कहा ‘भारतीय विमानन कंपनियां काफी अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। मुझे पता है कि हाल में कुछ चुनौतियां आई थीं। लेकिन इंडिगो अब भी दुनिया के इक्विटी बाजारों में सबसे कीमती कंपनियों में से एक है, अकासा एयर काफी बढ़ रही है। एयर इंडिया बहुत निवेश कर रही है। मुझे लगता है कि यह मानसिकता कि भारतीय विमानन कंपनियों को प्रतिस्पर्धा से डर लगता है, उन दिनों की पुरानी मानसिकता है, जब भारतीय विमानन कंपनियां अच्छा प्रदर्शन नहीं करती थीं।’

भारत और अबू धाबी के बीच द्विपक्षीय हवाई सेवा समझौता प्रत्येक पक्ष की विमानन कंपनियों के लिए 50,000 साप्ताहिक सीटों की उपलब्धता देता है। अबू धाबी की विमानन कंपनियों ने अपने आवंटन का पूरी तरह से इस्तेमाल कर लिया है, जबकि भारतीय विमानन कंपनियों के लिए उपलब्ध 10,000 सीटों का इस्तेमाल नहीं हुआ है।

नेव्स ने कहा, ‘अगर भारतीय विमानन कंपनियां आज अबू धाबी के हवाई अड्डा परिचालकों के पास जाती हैं और कहती हैं कि ‘मैं द्विपक्षीय अधिकारों के तहत बची हुई शेष 10,000 सीटों का उपयोग करना चाहती हूं’, तो अबू धाबी हवाई अड्डा परिचालक स्वागत करेगा। साथ ही एतिहाद भी स्वागत करेगी। क्योंकि हमारा मानना है कि जितना ज्यादा, उतना बेहतर। हम नहीं मानते कि संरक्षणवाद किसी के लिए भी अच्छा है।’

उन्होंने कहा कि एतिहाद काफी समय से किसी न किसी रूप में विभिन्न भारतीय विमानन कंपनियों के साथ भागीदार रही है। ‘हम एतिहाद की पायलट प्रशिक्षण इकाई में इंडिगो के पायलटों को प्रशिक्षित करते हैं। अगर मुझे इंडिगो से डर लगता, तो मैं उनके पायलटों को प्रशिक्षित क्यों करुंगा?

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First Published - January 29, 2026 | 8:48 AM IST

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