भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सोमवार को अपने कर्मचारियों के लिए हितों के टकराव, खुलासे, आचार संहिता और स्वयं को अलग रखने के मानदंडों से संबंधित ढांचे में व्यापक बदलाव को मंजूरी दी। कर्मियों में संस्था के चेयरमैन और पूर्णकालिक सदस्य भी शामिल हैं। सेबी की उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों को अब केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। हालांकि, सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि नियामक औपचारिक संशोधनों की अधिसूचना जारी होने से पहले ही स्वेच्छा से इन उपायों को लागू करेगा।
पुनर्गठन के तहत केंद्रीय सिविल सेवाओं और अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों पर लागू मानदंडों के अनुरूप चेयरमैन, पूर्णकालिक सदस्यों, कार्यकारी निदेशकों और मुख्य महाप्रबंधकों की अचल संपत्ति का विवरण सार्वजनिक किया जा सकता है। सेबी हितों के टकराव से संबंधित खुलासों को दर्ज करने और स्वयं को अलग रखने के निर्णयों पर नजर रखने के लिए एक डिजिटल प्रणाली और औपचारिक तौर पर स्वयं को अलग रखने का ढांचा भी लागू करेगा।
संयुक्त निवेश योजनाओं में नए निवेश की अनुमति दी जाएगी, बशर्ते कि उनका प्रबंधन नियमन वाले बाजार मध्यस्थों द्वारा पेशेवर रूप से किया जाए। पदभार ग्रहण करने पर चेयरमैन और पूर्णकालिक सदस्यों (डब्ल्यूटीएम) के पास निवेश बेचने, फ्रीज करने, ट्रेडिंग योजना के माध्यम से विनिवेश करने या पूर्व मंजूरी के साथ बेचने का विकल्प होगा।
अब चेयरमैन और डब्ल्यूटीएम को इनसाइडर माना जाएगा। परिवार के सदस्यों की परिभाषा का भी विस्तार किया गया है और इसमें पति/पत्नी, आश्रित बच्चे, कानूनी रूप से संरक्षित व्यक्ति और रक्त या वैवाहिक संबंधियों को शामिल किया गया है।
परिवार के सदस्यों पर प्रत्यक्ष इक्विटी निवेश पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे, सिवाय गैर-सूचीबद्ध प्रतिभूतियों, क्षतिपूर्ति के हिस्से के रूप में शामिल ईसॉप्स और विवेकाधीन पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाओं के। ये प्रतिबंध भविष्य में लागू होंगे और मौजूदा होल्डिंग्स को छूट दी जाएगी।
सेबी ने किसी एक इंटरमीडियरी में निवेश की सीमा पोर्टफोलियो के 25 फीसदी तक सीमित कर दी है। सदस्यों को अपने कार्यकाल के दौरान ऐसी होल्डिंग्स को या तो बेचना होगा या फ्रीज करना होगा, जिनमें गैर-सूचीबद्ध वाणिज्यिक उद्यम भी शामिल हैं। ज्वाइन करने से पहले मिले हुए स्टॉक विकल्पों का प्रयोग करना होगा।
इसके अलावा, सेबी ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए नकदी बाजार में सीधे लेनदेन की खातिर निधियों की नेटिंग को मंजूरी दे दी है। इसे 31 दिसंबर, 2026 तक लागू किया जाना है। इस कदम का मकसद लागत और परिचालन संबंधी चुनौतियों जैसे विदेशी मुद्रा में होने वाली चूक को कम करना है, विशेष रूप से सूचकांक पुनर्संतुलन के दौरान।
हालांकि, ऐसे सौदों का निपटान सकल आधार पर ही जारी रहेगा। नियामक ने मध्यस्थों के लिए योग्य और उपयुक्त व्यक्ति के मानदंडों में भी ढील दी है। इसके तहत आर्थिक अपराध की जांच शुरू होने पर स्वतः अयोग्यता का प्रावधान खत्म कर दिया गया है। अब अयोग्यता केवल दोष सिद्ध होने पर ही लागू होगी। यह निर्णय मौजूदा प्रावधानों को कई कानूनी चुनौतियां दिए जाने के बीच आया है।
इसके अतिरिक्त, सेबी ने एक ही जगह निवेश के जोखिमों को कम करने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (इनविट्स) और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (रीट्स) के लिए निवेश विकल्पों का विस्तार किया है। इन संस्थाओं को अब क्लास ए-1 या बी-1 श्रेणियों के अंतर्गत कम से कम 10 (वर्तमान में 12) क्रेडिट जोखिम मूल्य वाली लिक्विड म्युचुअल फंड योजनाओं के यूनिटों में निवेश की अनुमति होगी। निजी नियोजन वाले इनविट्स को ग्रीनफील्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में परिसंपत्ति मूल्य के 10 फीसदी तक निवेश करने की अनुमति होगी।