facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

विरोध के बीच सिजिमाली प्रोजेक्ट को हरी झंडी, अब खदान तक पहुंचेगी 3.4 किमी लंबी सड़क

Advertisement

केंद्र सरकार ने सिजिमाली बॉक्साइट खनन परियोजना तक पहुंचने वाली 3.4 किमी सड़क के लिए अंतिम वन मंजूरी दे दी है।

Last Updated- June 01, 2026 | 9:30 AM IST
Road to contentious Sijimali bauxite block gets final forest clearance
Representative image

केंद्र ने ओडिशा की विवादित सिजिमाली बॉक्साइट खनन परियोजना तक सड़क को वन मंजूरी दे दी है। इसके अंतर्गत 4.911 हेक्टेयर वन भूमि का बदलाव कर सड़क की मंजूरी चरण-II (अंतिम) में दी गई है। यह सिजिमाली बॉक्साइट खनन परियोजना के लिए महत्त्वपूर्ण बदलाव है।

वेदांत समूह को पट्टे पर दिए गए खनिज ब्लॉक तक जाने वाली 3.4 किलोमीटर लंबी सड़क विवादों का केंद्र रही है। दरअसल, रायगड़ा जिले के कांतमाल और सागाबारी गांवों में 7 अप्रैल को पुलिस और प्रदर्शनकारी स्थानीय लोगों के बीच झड़पें हुई थीं। इसमें 58 पुलिसकर्मियों सहित लगभग 70 लोग घायल हो गए थे।

आखिरकार केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने रायगड़ा जिले में सिजिमाली बॉक्साइट खदान की पहाड़ी को राज्य राजमार्ग-44 से जोड़ने वाली सड़क के निर्माण के लिए वन भूमि के डायवर्जन के लिए वैधानिक मंजूरी प्रदान कर दी है। यह सड़क राज्य के सबसे बड़े अप्रयुक्त खनिज भंडारों में से एक से बॉक्साइट के परिवहन के लिए महत्त्वपूर्ण मानी जाती है।

हिंसक झड़पों के कुछ ही हफ्तों बाद यह मंजूरी मिली है। स्थानीय आदिवासी समूह और कार्यकर्ता इस पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील और मुख्य रूप से आदिवासी क्षेत्र में खनन गतिविधियों का विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि अपर्याप्त परामर्श किया गया है और उनकी पारंपरिक आजीविका को खतरा है।

मंत्रालय ने मंजूरी के हिस्से के रूप में पर्यावरण सुरक्षा उपायों का एक व्यापक सेट भी लागू किया है। इनमें रायगड़ा जिले के टिंगारझोला गांव में चिन्हित 6.07 हेक्टेयर सरकारी गैर-वन भूमि पर क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण और पेडाकोंडा आरक्षित वन में पांच हेक्टेयर खराब वन भूमि पर अतिरिक्त क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण शामिल हैं। वृक्षारोपण और रखरखाव का पूरा खर्च उपयोगकर्ता एजेंसी वहन करेगी।

Advertisement
First Published - June 1, 2026 | 9:30 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement