सरकार की महत्त्वाकांक्षी प्रशिक्षु योजना से बाहर निकलने वालों की संख्या बीते पांच वर्षों में 15 गुना से अधिक बढ़ गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार योजना में नामांकन और प्रशिक्षण पूर्ण करने से कहीं अधिक तेजी से बाहर निकलने वालों की संख्या बढ़ी है।
नैशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम के प्रदर्शन डैशबोर्ड के आंकड़ों के अनुसार प्रशिक्षण बीच में छोड़ने वाले अप्रेंटिस की संख्या वित्त वर्ष 26 में बढ़कर 4,25,080 हो गई जबकि यह वित्त वर्ष 21 में 27,183 थी। हालांकि इस अवधि में अप्रेंटिस करने वालों की संख्या 3,07,779 से लगभग चार गुना बढ़कर 12.1 लाख हो गई जबकि प्रशिक्षण पूरा करने वालों की संख्या 2,14,959 से लगभग तीन गुना बढ़कर 6,26,379 हो गई।
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 21 में अप्रेंटिस के मुकाबले छोड़ने वालों की संख्या लगभग नौ प्रतिशत थी जबकि वित्त वर्ष 26 में यह करीब 35 प्रतिशत थी। यह प्रशिक्षुता कार्यक्रम कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के तहत संचालित होता है और इसे नैशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम के माध्यम से लागू किया जाता है।
यह योजना प्रशिक्षुओं को दिए गए वजीफे के हिस्से को वापस करके अप्रेंटिस को नियुक्त करने वाले प्रतिष्ठानों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इसका उद्देश्य ऑन-द-जॉब सीखने को कक्षा निर्देश के साथ जोड़कर उद्योग-आधारित प्रशिक्षण को बढ़ावा देना है।
नियुक्त किए गए अप्रेंटिस की संख्या वित्त वर्ष 21 से वित्त वर्ष 26 के दौरान तीन गुना से अधिक बढ़ गई। हालांकि इस दौरान प्रशिक्षण पूरा करने वालों की संख्या भी बढ़ी लेकिन इसकी वृद्धि धीमी रही।
नतीजतन हाल के वर्षों में नियुक्त अप्रेंटिस और प्रशिक्षण पूरा करने वालों के बीच का अंतर बढ़ गया है। जहां वित्त वर्ष 21 में लगभग 70 प्रतिशत प्रशिक्षुओँ ने प्रशिक्षण पूरा किया था, वहीं वित्त वर्ष 26 तक यह अनुपात घटकर आधे से थोड़ा अधिक रह गया।
आंकड़ों से पता चलता है कि प्रशिक्षण पूरा करने वाले कुल प्रशिक्षुओं की संख्या बढ़ी है, लेकिन पूर्णता दर नामांकन में तेजी से हुई वृद्धि के साथ तालमेल नहीं बिठा पाई है। इस योजना को 2016 में क्षेत्रों में शिक्षुता के अवसरों का विस्तार करने और उद्योग की भागीदारी बढ़ाने के लिए शुरू किया गया था। कार्यक्रम में भाग लेने वाले प्रतिष्ठान अप्रेंटिस अधिनियम ढांचे के तहत निर्दिष्ट और वैकल्पिक दोनों तरह के ट्रेडों में अप्रेंटिस को नियुक्त करते हैं।