facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

प्रशिक्षु योजना में बीच में छोड़ने वालों की संख्या 5 साल में 15 गुना बढ़ी, सरकार के लिए चिंता

Advertisement

कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 21 में अप्रेंटिस के मुकाबले छोड़ने वालों की संख्या लगभग नौ प्रतिशत थी जबकि वित्त वर्ष 26 में यह करीब 35 प्रतिश

Last Updated- March 27, 2026 | 11:00 AM IST
PM's Internship Scheme

सरकार की महत्त्वाकांक्षी प्रशिक्षु योजना से बाहर निकलने वालों की संख्या बीते पांच वर्षों में 15 गुना से अधिक बढ़ गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार योजना में नामांकन और प्रशिक्षण पूर्ण करने से कहीं अधिक तेजी से बाहर निकलने वालों की संख्या बढ़ी है।

नैशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम के प्रदर्शन डैशबोर्ड के आंकड़ों के अनुसार प्रशिक्षण बीच में छोड़ने वाले अप्रेंटिस की संख्या वित्त वर्ष 26 में बढ़कर 4,25,080 हो गई जबकि यह वित्त वर्ष 21 में 27,183 थी। हालांकि इस अवधि में अप्रेंटिस करने वालों की संख्या 3,07,779 से लगभग चार गुना बढ़कर 12.1 लाख हो गई जबकि प्रशिक्षण पूरा करने वालों की संख्या 2,14,959 से लगभग तीन गुना बढ़कर 6,26,379 हो गई।

कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 21 में अप्रेंटिस के मुकाबले छोड़ने वालों की संख्या लगभग नौ प्रतिशत थी जबकि वित्त वर्ष 26 में यह करीब 35 प्रतिशत थी। यह प्रशिक्षुता कार्यक्रम कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के तहत संचालित होता है और इसे नैशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम के माध्यम से लागू किया जाता है।

यह योजना प्रशिक्षुओं को दिए गए वजीफे के हिस्से को वापस करके अप्रेंटिस को नियुक्त करने वाले प्रतिष्ठानों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इसका उद्देश्य ऑन-द-जॉब सीखने को कक्षा निर्देश के साथ जोड़कर उद्योग-आधारित प्रशिक्षण को बढ़ावा देना है।

नियुक्त किए गए अप्रेंटिस की संख्या वित्त वर्ष 21 से वित्त वर्ष 26 के दौरान तीन गुना से अधिक बढ़ गई। हालांकि इस दौरान प्रशिक्षण पूरा करने वालों की संख्या भी बढ़ी लेकिन इसकी वृद्धि धीमी रही।

नतीजतन हाल के वर्षों में नियुक्त अप्रेंटिस और प्रशिक्षण पूरा करने वालों के बीच का अंतर बढ़ गया है। जहां वित्त वर्ष 21 में लगभग 70 प्रतिशत प्रशिक्षुओँ ने प्रशिक्षण पूरा किया था, वहीं वित्त वर्ष 26 तक यह अनुपात घटकर आधे से थोड़ा अधिक रह गया।

आंकड़ों से पता चलता है कि प्रशिक्षण पूरा करने वाले कुल प्रशिक्षुओं की संख्या बढ़ी है, लेकिन पूर्णता दर नामांकन में तेजी से हुई वृद्धि के साथ तालमेल नहीं बिठा पाई है। इस योजना को 2016 में क्षेत्रों में शिक्षुता के अवसरों का विस्तार करने और उद्योग की भागीदारी बढ़ाने के लिए शुरू किया गया था। कार्यक्रम में भाग लेने वाले प्रतिष्ठान अप्रेंटिस अधिनियम ढांचे के तहत निर्दिष्ट और वैकल्पिक दोनों तरह के ट्रेडों में अप्रेंटिस को नियुक्त करते हैं।

Advertisement
First Published - March 27, 2026 | 11:00 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement