बर्नस्टीन का मानना है कि अगले एक साल में बेंचमार्क निफ्टी 50 तेजी से ऊपर-नीचे हो सकता है। उसका तेजी-मंदी का दायरा 19,900 से लेकर 27,500 तक हो सकता है। यह सब निर्भर करेगा, कच्चे तेल की कीमतों के रुख और भू-राजनीतिक तनावों में इजाफे पर।
ब्रोकरेज ने हालात के आधार पर विश्लेषण किया। उसका मानना है कि अगर हालात बिगड़े तो इंडेक्स मौजूदा स्तर से करीब 15 फीसदी तक गिर सकता है। लेकिन अगर माहौल ज्यादा अनुकूल रहा तो यह 18 फीसदी तक चढ़ सकता है। सबसे अच्छे हालात वो हैं जब अगर दो हफ़्तों के अंदर तनाव में तेजी से कमी आए और कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी हो तो निफ़्टी 27,500 तक पहुंच सकता है, जिसका मतलब है कि इसमें करीब 18 फीसदी की बढ़त। अगर एक महीने में हालात धीरे-धीरे सामान्य होते हैं और कच्चा तेल 85–90 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रहता है तो इंडेक्स बढ़कर लगभग 26,000 तक पहुंच सकता है।
लेकिन अगर तनाव दो से तीन महीने तक रहता है और इस वजह से साल के ज्यादातर समय तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं तो बढ़त सीमित रह सकती है और निफ़्टी लगभग 24,100 के स्तर पर दिख सकता है। दूसरी ओर, अगर यह तनाव एक साल तक खिंचता है तो इंडेक्स गिरकर 19,900 तक आ सकता है, जो गिरावट का जोखिम बताता है।
यह विश्लेषण इस बात पर जोर देता है कि तेल की कीमतों को लेकर भारतीय इक्विटीज बहुत ज्यादा संवेदनशील हैं क्योंकि भारत तेल के आयात पर निर्भर है। साथ ही, उसने भू-राजनीति को निकट भविष्य के लिहाज से बाजारों के लिए उतार-चढ़ाव वाला अहम कारक बताया है। बर्नस्टीन के रणनीतिकार वेणुगोपाल गैरे और निखिल अरेला ने कहा, पिछले कई सालों से वैश्विक मंच पर भारत की प्रगति की शानदार कहानी का एक ही साझा आधार रहा है, कच्चे तेल की कीमतें बहुत ज्यादा कम रहना।
उन्होंने चेतावनी दी, अगर यह संघर्ष 2026 के ज्यादातर समय तक चलता रहा तो इसके नतीजे बहुत बुरे हो सकते हैं – आपूर्ति में रुकावटें, दो अंक में महंगाई, आर्थिक वृद्धि दर घटकर 2 से 3 प्रतिशत के दायरे में आ जाना, रुपए का 110 से भी ज्यादा कमजोर होना और निफ्टी का 20,000 से काफी नीचे गिर जाना।