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महिला आरक्षण पर संसद में घमासान, क्या बदल जाएगा सियासी गणित

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महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर संसद में जोरदार बहस हुई जहां सरकार ने दक्षिण राज्यों के साथ भेदभाव से इनकार किया जबकि विपक्ष ने गंभीर सवाल उठाए

Last Updated- April 17, 2026 | 8:31 AM IST
MP: Women reservation increased in government jobs, will get more employment opportunities MP: सरकारी नौकरियों में महिला आरक्षण बढ़ा, मिलेंगे रोजगार के ज्यादा अवसर

विपक्ष के महिला आरक्षण कानून में संशोधन के विरोध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को लोक सभा में जोर देकर कहा कि प्रस्तावित विधेयक दक्षिणी राज्यों के साथ भेदभाव नहीं करते हैं। विस्तारित बजट सत्र के तीन दिवसीय विशेष सत्र के पहले दिन अपने 32 मिनट के भाषण में प्रधानमंत्री ने विपक्ष को आगाह किया कि देश की ‘नारी शक्ति’ उन्हें 2029 तक लोक सभा और राज्य विधान सभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रयास को अवरुद्ध करने के कारण माफ नहीं करेगी।

मोदी ने महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, ‘परिसीमन विधेयक 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक 2026’ पर अपने विचार रखते हुए यह भी कहा कि इस विषय को राजनीति के तराजू से नहीं तौलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इसका श्रेय वह विपक्षी दलों को भी देने को तैयार हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘हमारे देश में जबसे महिला आरक्षण को लेकर चर्चा शुरू हुई है और जब-जब चुनाव आया है, जिस दल ने महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का विरोध किया है, देश की महिलाओं ने उन्हें माफ नहीं किया।’

मोदी ने कहा, ‘वर्ष 2024 के चुनाव में ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि सब ने (2023 में) सहमति से इसे (महिला आरक्षण विधेयक) पारित किया था। किसी का राजनीतिक फायदा नहीं हुआ, किसी का नुकसान नहीं हुआ।’ उन्होंने कहा, ‘अगर हम सब साथ में रहेंगे तो इतिहास गवाह है कि यह किसी के राजनीतिक पक्ष में नहीं जाएगा, देश के लोकतंत्र और सामूहिक निर्णय के पक्ष में जाएगा। जिन्हें इसमें राजनीति की बू आ रही है, वे खुद के 30 साल के परिणामों को देख लें। उनका इसमें ही फायदा है। वे नुकसान से बच जाएंगे। राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं। जो विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।’

बढ़ेगी हिस्सेदारी : शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नए परिसीमन के बाद दक्षिणी राज्यों का संसद में प्रतिनिधित्व कम होने की आशंकाओं को खारिज करते हुए सदन में कहा कि उनकी हिस्सेदारी कम नहीं होगी, बल्कि बढ़ेगी ही और 2029 के लोक सभा चुनाव से पहले सभी चुनाव मौजूदा व्यवस्था के तहत ही होंगे। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में अभी 28 लोक सभा सीट हैं, जो कुल 543 सीट का 5.15 प्रतिशत हैं, लेकिन ये विधेयक पारित होने के बाद कर्नाटक के सदस्यों की संख्या 42 हो जाएगी जो कुल 816 सीटों का 5.14 प्रतिशत होगी। आंध्र प्रदेश में अभी 25 लोक सभा सीट हैं और उसका प्रतिनिधित्व 4.6 प्रतिशत है जो परिसीमन के बाद 38 यानी 4.65 प्रतिशत हो जाएंगी।

तेलंगाना में मौजूदा सीट की संख्या 17 (3.13 प्रतिशत) है, जो बाद में 26 यानी 3.18 प्रतिशत हो जाएंगी। तमिलनाडु में 39 लोक सभा सदस्य (7.18 प्रतिशत) हैं, जो परिसीमन के बाद 59 (7.23 प्रतिशत हो जाएंगे। इसी तरह केरल का प्रतिनिधित्व अभी 6.38 प्रतिशत है, जो बढ़कर 3.67 प्रतिशत यानी 30 सीट तक हो जाएगा। इस तरह अभी दक्षिणी राज्यों से 129 लोक सभा सदस्य आते हैं और उनका प्रतिनिधित्व 23.76 प्रतिशत है, जो 50 प्रतिशत वृद्धि के बाद 195 सीट और 23.97 प्रतिशत यानी 24 प्रतिशत हो जाएगा।

मतविभाजन में हारेगी सरकार: कांग्रेस

कांग्रेस ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोक सभा में अपने वक्तव्य के दौरान परिसीमन से जुड़ी चिंताओं का समाधान नहीं किया और अब महिला आरक्षण संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पर मत विभाजन के समय सरकार को हार का सामना करना पड़ेगा।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु की जनता भी इस महीने विधान सभा चुनावों में जवाब देगी। इससे पहले कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर महिला आरक्षण संबंधी संविधान संशोधन विधेयक को सत्ता बनाए रखने के लिए बहाने के तौर पर उपयोग करने का आरोप लगाया तथा दावा किया कि यदि परिसीमन के प्रावधान वाला विधेयक पारित हो गया तो देश में लोकतंत्र खत्म हो जाएगा। (साथ में एजेंसियां)

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First Published - April 17, 2026 | 8:31 AM IST

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