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E100 की ओर तेज कदम: सरकार फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को दे रही बढ़ावा, एथनॉल इकोनॉमी को मिलेगा बूस्ट

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पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला, एथनॉल आधारित ईंधन से बढ़ेगी ऊर्जा सुरक्षा

Last Updated- April 30, 2026 | 9:03 AM IST
flex fuel
Representational Image

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के लिए उत्सर्जन परीक्षण मानकों को बढ़ाने की योजना बना रहा है। ये वे वाहन हैं जो 100 प्रतिशत एथनॉल (ई100) पर चल सकते हैं। इस कदम का मकसद ऐसे वाहनों के उत्पादन को बढ़ावा देना है। मंगलवार रात जारी मसौदा अधिसूचना में मंत्रालय ने ई85 को शामिल करने वाले वर्तमान प्रावधान को बदलकर ई100 को परीक्षण और प्रमाणन मानकों में शामिल करने का प्रस्ताव पेश किया है।
पश्चिम एशिया संकट ने फ्लेक्स फ्यूल वाहनों को तेजी से अपनाने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट बाधित होने से ऊर्जा आपूर्ति, जिसमें कच्चा तेल भी शामिल है, बुरी तरह बाधित हुई है।

ग्रेन एथनॉल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने कहा, ‘सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा यह मसौदा अधिसूचना भारत के जैव ईंधन पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक प्रगतिशील और दूरदर्शी कदम है।’ उसने यह भी कहा कि यह एक मजबूत नीतिगत संकेत है कि देश ई20 से आगे बढ़कर एक संरचित और विनियमित तरीके से उच्च एथनॉल मिश्रण को अपनाने के लिए तैयार है।

अनाज-आधारित एथनॉल उद्योग के लिए यह कदम उत्पादन बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और देश के ऊर्जा सुरक्षा एवं डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों को हासिल करने में अधिक सार्थक योगदान देने के अवसर पैदा करता है। उसने कहा कि ई85 और ई100 जैसे उच्च एथनॉल मिश्रण अनाज की मांग को काफी बढ़ाएंगे, जिससे किसानों की आय मजबूत होगी और एक अधिक लचीली कृषि-मूल्य श्रृंखला बनेगी। इस प्रस्ताव पर 30 दिनों के भीतर हितधारकों से अपनी टिप्पणियां देने के लिए कहा गया है। इसका उद्देश्य ऑटोमोबाइल बाजार में फ्लेक्स फ्यूल वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ाना है। टिप्पणियों-सुझावों के आधार पर इस रास्ते में आगे बढ़ा जाएगा।

पश्चिम एशिया युद्ध की पूर्व संध्या पर 1 फरवरी की बैठक में तेल विपणन कंपनियों ने कमजोर फ्लेक्स ईंधन की मांग सहित कई चिंताएं उठाई थीं। ऑटो उद्योग के अधिकारियों ने बुधवार को बिजनेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में इन चिंताओं को पुन: दोहराया।

बीते 28 फरवरी को आयोजित बैठक में इन कंपनियों ने देश में फ्लेक्स-फ्यूल वाहन मॉडल की अनुपस्थिति और इसे लाने के लिए स्पष्ट समय-सीमा न होने पर चिंता जताई। यह बैठक पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय और भारी उद्योग द्वारा पश्चिम एशिया संकट के प्रभावों पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी। युद्ध के कारण विश्व स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हुई है और ईंधन की कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई है। भारतीय ऑटोमोबाइल निर्माता सोसायटी तथा चुनिंदा वाहन निर्माता भी इस बैठक में मौजूद थे।

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First Published - April 30, 2026 | 9:03 AM IST

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