देश के वाहन उद्योग में नए कंपनियों की बड़ी लहर नजर आ रही है। अपने तमिलनाडु संयंत्र से 10,000वीं गाड़ी का उत्पादन करने वाली वियतनाम की वाहन विनिर्माता विनफास्ट की सफलता और पिछले एक साल के दौरान भारत में वैश्विक दिग्गज टेस्ला की धूम के बीच यह लहर दिख रही है।
साल 2025-26 में वाहनों की विभिन्न श्रेणियों में इनकी संख्या हैरतअंगेज रूप से 37 प्रतिशत बढ़कर 480 हो गई है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह संख्या 350 थी। नीतिगत प्रोत्साहन, बेहतर होती बुनियादी ढांचा और पारंपरिक ईंधन की बढ़ती लागत के कारण इनमें से अधिकांश इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) हैं।
एनवायरोकैटेलिस्ट्स द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार अकेली दोपहिया वाहन श्रेणी में ही साल 2025-26 के दौरान कुल 27 नई कंपनियों ने भारतीय बाजार में प्रवेश किया, जिनमें से 96 प्रतिशत यानी 26 कंपनियां इलेक्ट्रिक वाहन श्रेणी की हैं। ई-रिक्शा जैसी कुछ श्रेणियों आने वाली नए कंपनियों की संख्या लगभग 104 रही।
नए वाहन विक्रेताओं में वे भी शामिल हैं, जो भारत में उनका निर्माण या असेंबलिंग कर रहे हैं और वे भी जो उन्हें आयात कर रहे हैं। उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि नए भागीदारों का आगमन हुआ है, लेकिन ब्रांड की प्रतिष्ठा अब भी मायने रखती है। सफलता के उदाहरणों में चार पहिया वाहनों के मामले में विनफास्ट, दोपहिया वाहनों में काइनेटिक वाट्स ऐंड वोल्ट्स और माल ढुलाई वाले वाहनों के मामले में जेएम-बक्सी ग्रुप के निवेश वाली एनर्जी इन मोशन शामिल हैं, जिन्होंने पहले से ही शीर्ष 10 में अपनी जगह बना ली है।
एनवायरोकैटेलिस्ट्स के संस्थापक और प्रमुख विश्लेषक सुनील दहिया ने कहा, ‘नए प्रवेश करने वालों की ज्यादातर संख्या ईवी में हैं। दोपहिया वाहनों के मामले में 27 नई कंपनियों में से केवल एक कंपनी लैम्ब्रेटा के पास ही तेल-गैस इंजन वाला वाहन था। इन कंपनियों में कई ऐसे उदाहरण हैं जो दर्शाते हैं कि बाजार की प्रतिष्ठा मायने रखती है। उदाहरण के लिए बसों में संस्थागत खरीदार जाने-माने नामों को पसंद करते हैं।’