क्रिसिल और केयरएज जैसी रेटिंग एजेंसियों ने वित्त वर्ष 26 की पहली छमाही की तुलना में दूसरी छमाही में रेटिंग अनुपातों में नरमी की सूचना दी। उनका कहना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से भारत के उद्योग जगत के बही खातों की मजबूती का पता चल सकेगा।
हालांकि इंडिया रेटिंग्स ने कहा कि वित्त वर्ष 25 की तुलना में वित्त वर्ष 26 में अपग्रेड से डाउनग्रेड का अनुपात गिर गया। बहरहाल, आईसीआरए ने कहा कि ऋण अनुपात वित्त वर्ष 25 के 2.0 गुना की अपेक्षा वित्त वर्ष 26 में सुधरकर 3.1 गुना हो गया। इससे 388 अपग्रेड के मुकाबले 124 डाउनग्रेड हुआ।
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि चूक दर 0.4 प्रतिशत पर कम बनी हुई है और यह अनुकूल ऋण स्थितियों का संकेत देती है। क्रिसिल के अनुसार ऋण अनुपात रेटिंग अपग्रेड से डाउनग्रेड का अनुपात है। यह वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में ऋण अनुपात सुस्त होकर 1.50 गुना हो गया जबकि यह पहली छमाही में 2.17 गुना था। इस अवधि के दौरान कुल मिलाकर रेटिंग 383 अपग्रेड और 255 डाउनग्रेड हुईं।
क्रिसिल ने बताया, ‘डाउनग्रेड दर 7.0 प्रतिशत (पहली छमाही में 6.4 प्रतिशत) तक बढ़ गई और यह 10 साल के औसत से थोड़ी अधिक है। नतीजतन, ऋण अनुपात में नरमी आई। इसमें शुल्क-संबंधित अनिश्चितताओं के कारण निर्यात पर अधिक निर्भरता वाली कंपनियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।’
केयर एज रेटिंग्स ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में ऋण अनुपात 1.93 गुना रहा, जो पहली छमाही में देखे गए 2.56 गुना से कम है। केयर एज रेटिंग्स ने बताया, ‘डाउनग्रेड दर 7 प्रतिशत है और यह 10 प्रतिशत के दीर्घकालिक औसत से नीचे बनी हुई है।’