उद्योगपति अनिल अंबानी ने उच्चतम न्यायालय का रुख करते हुए अपने कर्ज संकट के समाधान के लिए अदालत की निगरानी में प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। उन्होंने अदालत से गुजारिश की है कि उन्हें भी वही राहत दी जाए जैसी स्टर्लिंग समूह के नितिन संदेसरा और चेतन संदेसरा सहित उनके परिवार के अन्य पांच सदस्यों को दी गई थी।
अंबानी ने दलील दी कि उच्चतम न्यायालय ने पहले संदेसरा बंधुओं और आर्थिक मामलों में कानूनी उल्लंघन करने वाले अन्य लोगों के खिलाफ सभी मामलों को बंद करने की अनुमति दी थी बशर्ते वे अपने कुल बकाया का एक-तिहाई भुगतान करें। इसी आधार पर उन्होंने अपने लिए भी समान स्तर के राहत की मांग की है।
अदालत में दायर हलफनामे में अंबानी ने 17 मार्च को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लिखे पत्र की प्रति भी संलग्न की है। इस पत्र में उन्होंने एक ऋणदाताओं की समिति बनाने का अनुरोध किया जो कुल बकाया राशि तय करे और एक व्यवस्थित पुनर्भुगतान योजना तैयार करे। अंबानी ने सुझाव दिया कि या तो तीन सदस्यों की एक उच्चस्तरीय समिति बनाई जाए या फिर ऋणदाताओं की कमेटी गठित की जाए जो रिलायंस एडीएजी (अनिल धीरुभाई अंबानी समूह) के कर्ज के समाधान पर काम करे।
अंबानी ने अपने पत्र और हलफनामे में कहा, ‘पहले ऋणदाताओं ने उन प्रवर्तकों से भी समझौता किया था जो देश छोड़कर जा चुके थे और जिन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया था। इसके बावजूद सभी एजेंसियों और फोरम पर पूरा और अंतिम समझौता हुआ और सभी मामलों का निपटारा कर दिया गया।’