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भूषण पावर ऐंड स्टील परिसमापन मामला, सर्वोच्च न्यायालय ने वापस लिया आदेश

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शीर्ष अदालत ने 2 मई को बीएसपीएल के कर्ज समाधान के लिए जेएसडब्ल्यू स्टील की ओर से पेश प्रस्ताव को गैरकानूनी ठहराने के साथ ही उसे खारिज कर दिया था।

Last Updated- July 31, 2025 | 10:56 PM IST
Supreme Court of India

सर्वोच्च न्यायालय ने भूषण स्टील ऐंड पावर लिमिटेड (बीएसपीएल) के परिसमापन का आदेश वाला 2 मई का अपना फैसला गुरुवार को वापस ले लिया। शीर्ष अदालत ने 2 मई को बीएसपीएल के कर्ज समाधान के लिए जेएसडब्ल्यू स्टील की ओर से पेश प्रस्ताव को गैरकानूनी ठहराने के साथ ही उसे खारिज कर दिया था।

भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा के पीठ ने 2 मई के फैसले की समीक्षा को मंजूरी दी और समाधान योजना को चुनौती देने वाली अपील पर नए सिरे से सुनवाई करने का फैसला किया। पीठ अब अगले गुरुवार यानी 7 अगस्त को सभी दलीलें पर सुनवाई करेगा। पीठ ने कहा, ‘ प्रथम दृष्टया हमारा मत है कि विवादित निर्णय में विधिक स्थिति पर सही ढंग से विचार नहीं किया गया है।’

न्यायालय ने कहा, ‘यह मामला पिछले निर्णय को वापस लिए जाने के लिहाज से एकदम माकूल है और मामले की नए सिरे से सुनवाई की जानी चाहिए। इसलिए यह कहने की जरूरत नहीं है कि हम समीक्षा की इजाजत दे रहे हैं। हम सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के सभी जरूरी सवालों पर बहस करेंगे।’

सुनवाई शुरू होने पर न्यायालय ने पुनर्विचार याचिका स्वीकार करने की इच्छा जताई क्योंकि अदालत का मानना था कि निर्णय स्थापित नजीरों के अनुरूप नहीं लग रहा था।

मुख्य न्यायाधीश गवई ने कहा, ‘प्रथम दृष्टया, हम पुनर्विचार की अनुमति देने के पक्ष में हैं। हम पूरी सुनवाई करेंगे, लेकिन ऐसा लगता है कि यह दृष्टिकोण पहले दिए गए निर्णयों के अनुरूप नहीं है। हम किसी अन्य दस्तावेज पर विचार नहीं करेंगे, केवल निर्णय पर ही विचार करेंगे।’

उन्होंने यह भी कहा कि न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा (2 मई का फैसला सुनाने वाले न्यायाधीशों में से एक) भी पुनर्विचार के लिए सहमत हो गए हैं। उन्होंने कहा, ‘कल मेरी न्यायमूर्ति शर्मा से चर्चा हुई और उन्होंने भी पूरी उदारता से स्वीकार किया कि फैसले पर पुनर्विचार की आवश्यकता है।

मुख्य न्यायाधीश ने जोर दिया कि जेएसडब्ल्यू द्वारा किया गया करीब 20,000 करोड़ रुपये का निवेश तथा इससे करीब 25,000 श्रमिकों की आजीविका जैसे जमीनी हकीकतों पर भी विचार किए जाने की जरूरत है। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की, ‘हमें जमीनी हकीकतों को भी ध्यान में रखना होगा। 25,000 लोगों को हम सड़क पर नहीं छोड़ सकते हैं। अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल 25,000 मजदूरों के साथ अन्याय करने के लिए नहीं, बल्कि पूरा न्याय करने के लिए किया जाना चाहिए।’

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 142 सर्वोच्च न्यायालय को उसके समक्ष लंबित किसी भी मामले में पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कोई भी आदेश पारित करने की अनुमति देता है।

उल्लेखनीय है कि दो मई को शीर्ष अदालत ने जेएसडब्ल्यू स्टील लिमिटेड की तरफ से बीएसपीएल के लिए दी गई समाधान योजना को अवैध ठहराते हुए खारिज कर दिया था। शीर्ष अदालत ने बीएसपीएल के सभी पक्षकारों- समाधान पेशेवर, सीओसी और एनसीएलटी की आलोचना करते हुए कहा था कि समाधान प्रक्रिया में दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) का ‘घोर उल्लंघन’ हुआ है।

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First Published - July 31, 2025 | 10:48 PM IST

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