facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

वैश्विक कारोबार पर जुर्माने के प्रावधान के खिलाफ ऐपल की याचिका पर केंद्र और CCI से जवाब तलब

Advertisement

आईफोन विनिर्माता ने प्रतिस्पर्धा नियमों में हालिया संशोधनों पर चुनौती दी है, जिसमें कंपनी के वैश्विक कारोबार के आधार पर जुर्माना लगाने की अनुमति दी गई है

Last Updated- December 01, 2025 | 10:41 PM IST
Apple
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

दिल्ली उच्च न्यायालय ने आईफोन बनाने वाली ऐपल इंक की एक याचिका पर केंद्र सरकार और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) से जवाब मांगा है। आईफोन विनिर्माता ने प्रतिस्पर्धा नियमों में हालिया संशोधनों पर चुनौती दी है, जिसमें कंपनी के वैश्विक कारोबार के आधार पर जुर्माना लगाने की अनुमति दी गई है।

यह संशोधन 6 मार्च, 2024 से प्रभावी हुआ है। इसके तहत प्रतिस्पर्धा आयोग को प्रतिस्पर्धा विरोधी आचरण अथवा दबदबा का दुरुपयोग का दोषी पाए जाने वाली संस्थाओं पर पिछले तीन वित्त वर्ष के औसत कारोबार के 10 फीसदी तक का जुर्माना लगाने का अधिकार दिया गया है।

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला के पीठ के समक्ष ऐपल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दिया कि यह प्रावधान असंवैधानिक और अनुपातहीन है। सिंघवी ने अदालत को बताया कि एक से अधिक उत्पाद वाली कंपनियों के लिए जुर्माना भी उस खास उत्पाद से होने वाले कारोबार तक ही सीमित होना चाहिए, जो भारत के भीतर कथित उल्लंघन में शामिल है। यह न हो कि जुर्माना की राशि दुनिया भर के राजस्व पर गणना की जानी चाहिए।

Also Read: सरकार ने मांगा 41,455 करोड़ रुपये का अतिरिक्त धन, उर्वरक व पेट्रोलियम सब्सिडी सबसे बड़ी वजह

सिंघवी ने संशोधन के पूर्वव्यापी आवेदन पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने तर्क दिया कि यह लंबित मामलों को भी अनुचित तरीके से प्रभावित करता है। सिंघवी ने कहा, ‘इंगलैंड के मेरे कारोबार के भारत के कारोबार से कोई लेना-देना नहीं है। मेरा मामला यहां 2021 में शुरू हुआ। यह संशोधन 6 मार्च, 2024 को लागू हुआ। इसका प्रभाव बहुत बड़ा है।’

इसके बाद अदालत ने सरकार और प्रतिस्पर्धा आयोग से यह स्पष्ट करने को कहा कि किसी विशेष बाजार के लिए जुर्माने की गणना में असंबंधित उत्पादों के कुल कारोबार को कैसे शामिल किया जा सकता है।

Also Read: बिजली उत्पादन में तेज गिरावट और विनिर्माण कमजोर पड़ने से अक्टूबर में IIP ग्रोथ 14 माह के निचले स्तर पर

पीठ ने पूछा, ‘कृपया हमें बताएं कि अगर प्रतिस्पर्धा आयोग एक उत्पाद के संबंध में कार्यवाही शुरू करता है, तो आप अन्य उत्पादों के संबंध में टर्नओवर को कैसे ध्यान में रख सकते हैं? क्या अन्य उत्पादों को शामिल करना बहुत अनुचित नहीं लगता?’

सरकार और प्रतिस्पर्धा आयोग की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल बलबीर सिंह ने कहा कि आयोग प्रासंगिक टर्नओवर के सिद्धांत को लागू करता है और वैश्विक टर्नओवर तभी लागू होता है जब कंपनियां वित्तीय डेटा रोकती हैं।

Advertisement
First Published - December 1, 2025 | 10:39 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement