सरकार इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) के दूसरे चरण की अवधि को वर्तमान 5 साल से बढ़ाकर 12 साल तक करने पर विचार कर रही है। अधिकारियों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि प्रोत्साहन के लिए विस्तारित समयसीमा उन कंपनियों के लिए आवश्यक लंबी तैयारी और मार्गदर्शन के अनुरूप होगी जो चिप विनिर्माण और पैकेजिंग इकाइयों को कच्चा माल मुहैया कराती हैं। एक अधिकारी ने कहा, ‘हमारा लक्ष्य अधिक से अधिक एमएसएमई को वैश्विक स्तर पर बड़ी सेमीकंडक्टर कंपनियों के आपूर्तिकर्ता बनने के लिए विकसित करना है। गुणवत्ता और मात्रा के स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में उनकी मदद के लिए ऐसी एमएसएमई कंपनियों को लंबे समय तक मार्गदर्शन की आवश्यकता है।’
कुल मिलाकर आईएसएम के दूसरे चरण में मिश्रित सेमीकंडक्टर इकाइयों, गैस, इंगॉट्स और चिप विनिर्माण तथा पैकेजिंग इकाइयों के लिए अन्य इनपुट के कच्चे माल के विनिर्माताओं को वित्तीय और गैर-वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करने पर अधिक ध्यान केंद्रित होने की संभावना है। इस चरण में लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि देश में बौद्धिक संपदा अधिकार बनाए रखने वाली कंपनियों के लिए घरेलू सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन क्षमताओं में सुधार पर भी विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है।
इस बरे में जानकारी के लिए इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भेजे गए ईमेल का खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं आया।
अधिकारी ने कहा कि पारंपरिक और उन्नत चिप पैकेजिंग के लिए चिप विनिर्माण, आउटसोर्स असेंबली और टेस्टिंग (ओएसएटी) तथा असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (एटीएमपी) इकाइयों के लिए समग्र प्रोत्साहन ढांचे में भी बदलाव किया जा सकता है और आईएसएम के पहले चरण के तहत प्रदान किए गए 50 फीसदी के प्रोत्साहन को दूसरे चरण में घटाकर 30 फीसदी तक किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, ‘आईएसएम के पहले चरण के तहत हमने 12 चिप विनिर्माण और पैकेजिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिसमें कुल 1.64 लाख करोड़ रुपये का निवेश शामिल है। हमारा ध्यान अब कच्चे माल के आपूर्तिकर्ताओं के साथ पारिस्थितिकी तंत्र को पूरा करने और डिजाइन क्षमताओं में सुधार करने पर है, जिसके लिए वित्तीय व्यय बढ़ाना होगा।’
76,000 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन वाली आर्एसएम के पहले चरण को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिसंबर 2021 में मंजूरी दी थी और जून 2023 में पहली परियोजना मंजूर हुई थी। इस परियोजना के तहत माइक्रोन के 2.75 अरब डॉलर के प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई, जिसके तहत गुजरात के साणंद में सेमीकंडक्टर चिप असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (एटीएमपी) इकाई लगाने की योजना है।
उसी वर्ष सरकार ने भारत के पहले चिप फैब्रिकेशन परियोजना प्रस्ताव को मंजूरी दी, जो भारत के टाटा समूह और ताइवान की पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेशन का संयुक्त उद्यम था और इसमें लगभग 11 अरब डॉलर (91,000 करोड़ रुपये) का निवेश का प्रावधान किया गया था। इस महीने की शुरुआत में सरकार ने आईएसएम के पहले चरण के तहत लगभग 4,000 करोड़ रुपये की दो और परियोजनाओं को मंजूरी दी थी। 3,068 करोड़ रुपये की क्रिस्टल मैट्रिक्स और 868 करोड़ रुपये की लागत के साथ सूची सेमीकॉन लिमिटेड की परियोजना शामिल है।
क्रिस्टल मैट्रिक्स मिनी और माइक्रो लाइट-एमिटिंग डायोड डिस्प्ले मॉड्यूल के लिए गैलियम नाइट्राइड सेमीकंडक्टर चिप वेफर्स का उत्पादन करेगी जबकि सूची सेमीकॉन, जिसकी आउटसोर्स असेंबली और टेस्टिंग इकाई गुजरात के सूरत में पहले से ही चालू है, को लीड फ्रेम और वायरबॉन्ड पैकेजिंग सेमीकंडक्टर चिप को पैकेज करने के लिए सरकारी मंजूरी मिली है। इसका उपयोग रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में किया जाता है।